कृषि कानून होंगे वापस: पीएम मोदी के एलान के बाद उत्तराखंड में खुशी से झूमे किसान, मिठाई बांटकर की आतिशबाजी, तस्वीरें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 19 Nov 2021 09:37 PM IST
उत्तराखंड में किसानों ने मनाया जश्न
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लंबी लड़ाई के बाद तीनों कृषि कानून वापसी की घोषणा से उत्तराखंड के किसानों में भी खुशी का माहौल है। किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने एक-दूसरे को फूल मालाएं पहनाकर और मिठाइयां खिलाकर जीत की बधाई दी। वहीं, कई जगह आतिशबाजी की गई। संगठनों ने कहा कि कृषि कानून वापसी किसानों की ऐतिहासिक जीत है।

हालांकि, अब भी प्रधानमंत्री इस आंदोलन में शहीद हुए 700 किसानों की मौत की जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते हैं। सरकार को ये फैसला महीनों पहले लेना चाहिए था। वहीं, कुछ किसान संगठन इसे चुनाव नजदीक आने पर राजनीतिक स्टंट बता रहे हैं। किसानों ने ये भी स्पष्ट किया कि जब तक तीनों कानून संसद में वापस नहीं हो जाते आंदोलन जारी रहेगा।

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रुद्रपुर के रणजीत सिंह पार्क में किसानों ने मिठाई बांटकर एक-दूसरे को तीनों कृषि कानूनों के रद्द होने की बधाई दी। किसानों के साथ कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के कुछ कार्यकर्ता भी शामिल रहे। किसानों ने कहा कि नवंबर 2020 से शुरू हुए किसान आंदोलन के करीब एक साल बाद केंद्र सरकार ने किसानों की मांग मानी है। 
उत्तराखंड में किसानों ने मनाया जश्न
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काशीपुर में किसानों और राजनीतिक दलों के नेताओं में जश्न का माहौल देखने को मिला। किसान नेताओं ने इसे आधी अधूरी जीत बताया। कहा कि एमएसपी समेत दूसरे जरुरी मुद्दों का अभी कोई समाधान नहीं हुआ है। संसद में कानून निरस्त होने तक उनका विरोध जारी रहेगा। 
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उत्तराखंड में किसानों ने मनाया जश्न
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खटीमा में आप के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मुख्य चौक पर आतिशबाजी की और मिष्ठान वितरण किया। कलेर ने कहा कि कृषि कानूनों की वापसी किसानों की जीत है। जसपुर में भारतीय किसान यूनियन के सदस्यों ने सुभाष चौक पर आतिशबाजी की। दिनेशपुर में किसानों व आप कार्यकर्ताओं ने झंडे लेकर खुशी का इजहार किया। 
उत्तराखंड में किसानों ने मनाया जश्न
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रुड़की में उत्तराखंड किसान मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर इसे किसानों की जीत बताया। मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुलशन रोड़ ने कहा कि 11 महीनों तक चले आंदोलन के बाद आखिरकार सरकार को किसानों की मांगों के आगे झुकना ही पड़ा। यदि सरकार ये तीनों कानून पहले ही वापस ले लेती तो 700 किसानों की जान न जाती। इन किसानों की मौत की जिम्मेदार भाजपा ही है। गढ़वाल मंडल अध्यक्ष समीर आलम ने कहा कि एक साल बाद सत्य की जीत हुई है। किसानों की ये जीत इतिहास में दर्ज हो गई है। 
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उत्तराखंड में युवा कांग्रेस ने मनाया जश्न
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किसान-मजदूर संगठन सोसायटी ने भी प्रधानमंत्री के एलान का स्वागत किया। संगठन ने कहा कि अच्छा होता कि किसान विरोधी तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने का फैसला पहले ही ले लिया जाता। विस चुनाव में भाजपा को हार दिख रही थी, इसलिए कृषि कानून वापस लेने का फैसला लिया। कहा कि आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा। अब मृत किसानों को शहीद का दर्जा देने, उनके परिवारों को आर्थिक मदद करने और एमएसपी पर कानून बनाने की मांग को लेकर आंदोलन होगा। 
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