CBSE 10th Result: सफलता की कहानी, 10 टॉपर्स की जुबानी...तीन ऑल इंडिया टॉपर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 07 May 2019 11:16 AM IST
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CBSE 10th Result: देश में गाजियाबाद के मेधावियों का डंका, तीन ऑल इंडिया टॉपर

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सीबीएसई 10वीं बोर्ड के परिणाम में गाजियाबाद का फिर देश में बोलबाला रहा। जिले के तीन मेधावियों ने ऑल इंडिया टॉप किया है। छबीलदास पब्लिक स्कूल के छात्र ईश मदान, उत्तम स्कूल फॉर गर्ल्स की छात्रा अपूर्वा जैन और सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल के छात्र अंकुर मिश्रा ने संयुक्त रूप से ऑल इंडिया में पहला स्थान हासिल किया। तीनों मेधावियों ने 500 में से 499 अंक हासिल कर अपना हुनर दिखाया। दूसरी ओर ऑल इंडिया टॉप-3 की लिस्ट में गाजियाबाद के 18 मेधावियों ने स्थान पाया है।

ऑल इंडिया टॉप-1 में तीन, ऑल इंडिया टॉप-2 में छह और ऑल इंडिया टॉप-3 में गाजियाबाद के नौ मेधावियों ने टॉपर्स की सूची में जगह बनाई है। ऑल इंडिया टॉप-2 में डीपीएसजी मेरठ रोड की छात्रा निशिता सिंह, गुरुकुल द स्कूल की छात्रा पाखी वत्स, एमिटी इंटरनेशनल स्कूल वसुंधरा के प्रथम कुमार श्रीवास्तव, खेतान पब्लिक स्कूल राजेंद्रनगर के मनन गुप्ता, चिल्ड्रंस एकेडमी विजयनगर की छात्रा पुष्पा चौधरी और राली इंटरनेशनल स्कूल इंदिरापुरम की छात्रा जाह्ववी बिस्ट ने 500 में से 498 अंक प्राप्त कर संयुक्त रूप से मुकाम हासिल किया। 


वहीं, ऑल इंडिया टॉप-3 की लिस्ट में गाजियाबाद के स्कूलों के नौ मेधावियों ने जगह बनाई। दीप मेमोरियल स्कूल रामप्रस्थ की सुहानी जोशी, डीपीएस इंदिरापुरम की छात्रा अशिता सिंह पवांर, गुरुकुल द स्कूल के राघव सिंघल, डीपीएस राजनगर के आदित्य तोमर, डीपीएसजी मेरठ रोड के मेहुल गर्ग, डीएवी पब्लिक स्कूल राजेंद्रनगर की इशिता अग्रवाल, वनस्थली पब्लिक स्कूल वसुंधरा की रिधिमा गुप्ता, एमिटी इंटरनेशनल वसुंधरा के शौर्य अग्रवाल और एमिटी इंटरनेशनल स्कूल सेक्टर-1 वसुंधरा की कशिश मल्होत्रा ने 500 में से 497 अंक हासिल कर ऑल इंडिया तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया।

ऑल इंडिया टॉप-3 में 18 गाजियाबादी

सीबीएसई की ऑल इंडिया टॉप-3 की लिस्ट में कुल 97 मेधावियों ने जगह बनाई है। इसमें ऑल इंडिया टॉपर में 13 मेधावी, ऑल इंडिया टॉप-2 में 25 और ऑल इंडिया टॉप-3 में कुल 59 मेधावियों ने जगह बनाई। इनमें से ऑल इंडिया टॉप-3 में 18 मेधावी गाजियाबाद के हैं। गाजियाबाद में टॉप-3 में जगह बनाने वाले 18 मेधावियों ने 10 लड़कियां, जबकि आठ लड़के शामिल हैं। वहीं, ऑल इंडिया टॉपर में एक लड़की व दो लड़कों ने स्थान पाया है।

सफलता की कहानी, 10 टॉपर्स की जुबानी... आपकी कामयाबी पक्की

Sidhant
Sidhant
सीबीएसई में दसवीं में सर्वाधिक अंक लाने वाले होनहारों का कहना है कि पढ़ाई को ‘पढ़ाई बोझ समझकर नहीं, शौक समझकर करें’। कामयाबी निश्चिंत ही आपके कदम चूमेगी। इसके साथ ही इनका सोशल मीडिया का इस्तेमाल तो करें लेकिन नियमित...

सिद्धांत पनगोरिया,नोएडा

कामयाबी के लिए एक साल तक फोन तक का नहीं किया इस्तेमाल
सीबीएसई के 10वीं के नतीजों में लोट्स वैली स्कूल में पढ़ने वाले सिद्धांत पेनगोरिया पढ़ाई के साथ-साथ स्पोर्ट्स में भी अव्वल है। एक साल तक फोन तक का इस्तेमाल नहीं किया। सोशल मीडिया से पूरी तरह से दूर रहें। अगर कुछ समझ नहीं आता तो मम्मी की मदद लेते थे। हालांकि मनोरंजन के लिए स्पोर्ट्स, मूवी और गाने सुनते थे। यही वजह है कि कभी पढ़ाई का तनाव महसूस नही किया। 
लक्ष्य:  आगे कानून की पढ़ाई करना चाहते हैं।
टिप्स: सोशल मीडिया से रहे दूर
रिपोर्ट कार्ड
गणित 100
इंग्लिश 99
फ्रेंच 100
सोशल साइंस 100 
साइंस 100 

शिवानी लाठ, नोएडा

साल भर की मेहनत का मिला फल
शिवानी परीक्षा के दौरान मुश्किल गड़ी से गुजरी थी। परीक्षा के दौरान शिवानी की ताई की का निधन थी। इस वजह से परिवार के लोग पटना चले गए थे। अकेली रहकर शिवानी ने पढ़ाई की। वसुंधरा में रहने वाली शिवानी ने बताया कि मैंने 10 वीं में शुरू से ही पढ़ाई की थी। इसलिए कभी अंतिम समय में पढ़ाई को तनाव महसूस नहीं किया।  शिवानी के पिता शिव कुमार लाठ सीए हैं और मां नीतू लाठ गृहणी हैं। मां से घर से ही बिजनेस करती हैं। शिवानी ने बताया कि 11 वीं में मैंने कॉमर्स के साथ गणित विषय लिया है। सीए करना चाहती हूं। उसके बाद सिविल सर्विस में जाना चाहूंगी। जब भी खाली समय मिलता है पेंटिंग करना पसंद है। इससे उन्हें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। 

लक्ष्य:  सिविल सर्विस में जाने का
टिप्स:  पेपर देते समय साफ-साफ लिखें। महत्वपूर्ण वाक्यों को अंडर लाइन करें। इससे परीक्षक को कॉपी चैक करते समय आसानी होती है। परीक्षा की तैयारी करते समय खुद के नोट्स बनाएं। इससे बहुत मदद मिलती है।
रिपोर्ट कार्ड
हिंदी  99
गणित 100
विज्ञान 100
अंग्रेजी 100
सामाजिक विज्ञान 100

परिणाम जारी होने के बाद खुशी जाहिर करतीं छात्राएं
परिणाम जारी होने के बाद खुशी जाहिर करतीं छात्राएं - फोटो : अमर उजाला

एक नंबर कम आने का मलाल- दिव्यांश वाधवा, नोएडा

बाल भारती स्कूल के दिव्यांश वाधवा ने भी स्थान हासिल किया है। दिव्यांश वाधवा को पूरी उम्मीद थी कि वो सीबीएसई के रिजल्ट में 10 वीं में टॉप करेंगे। इसकी खुशी के साथ-साथ रिजल्ट में एक नंबर कम आने का दुख भी है। दिव्यांश का कहना है कि सोशल साइंस में हमेशा पूरे नंबर आते थे। इस विषय में 100 नंबर आने की उम्मीद थी। दिव्यांश ने बताया कि मैंने कभी ट्यूशन नहीं लिया है। कभी कोई दिक्कत होती थी तो टीचर हमेशा मदद करती थीं। प्रिंसिपल खुद कॉपी देखती थीं। दिव्यांश ने बताया कि 12 वीं के बाद में मैं न्यूक्लियर फिजिक्स में पढ़ाई करना चाहता हूं। इस विषय में मुझे बहुत रुचि है। मैं साइंस के नेशनल लेवल की प्रतियोगिता में हिस्सा लेता रहता हूं। इसकी वजह से मुझे कई रिसर्च सेंटर में घूमने का मौका भी मिलता है।

लक्ष्य:  इसरो और नासा में करना चाहते हैं काम
टिप्स : कोचिंग के बजाय स्वअध्ययन करें। इसके साथ ही वर्ष भर नियमित पढ़ाई बहुत जरूरी है।
रिपोर्ट कार्ड
हिंदी  100
गणित 100
विज्ञान 100
अंग्रेजी 100
सामाजिक विज्ञान 99

परीक्षा के समय सोशल मीडिया से बनाई दूरी- अपूर्वा जैन, गाजियाबाद

अपूर्वा अपनी सफलता के पीछे शिक्षक और परिजनों का बड़ा हाथ मानती हैं। कहती हैं इन लोगों ने हमें कभी तनाव महसूस नहीं होने दिया। अगर कोई विषय बोझिल लगता था तो उस पर स्कूल के साथ कोचिंग में समझ लेती थी। शुरुआत से मेरी कोशिश हर विषय को समझकर चलने की रही, जिसका मुझे परीक्षा में लाभ मिला। अपूर्वा का मानना है कि सोशल मीडिया गलत नही है, बशर्ते उसका सीमित इस्तेमाल हो। परीक्षा के दिनों में बहुत ज्यादा बोर हो जाने पर ही व्हाट्सएप का इस्तेमाल करती।
लक्ष्य : कंप्यूटर इंजीनियर बनना।
सक्सेस मंत्र : रूटीन से नियमित पढ़ाई करें।
रिपोर्ट कार्ड
अंग्रेजी 100
संस्कृत 100
गणित 100
विज्ञान 100
सामाजिक विज्ञान 99
 

तनाव दूर करने में टेबल टेनिस बना मददगार- ईश मदान, गाजियाबाद

ईश मदान ने बताया कि वह रोजाना छह से सात घंटे पढ़ाई करते थे। तनाव भगाने के लिए हर दिन एक घंटे टेबल टेनिस खेला, साथ ही खानपान पर भी ध्यान रखा। सिर्फ परीक्षा के दिनों में सोशल मीडिया से दूरी बनाई। विज्ञान और गणित थोड़ा कठिन लगा तो उसके लिए अलग से कोचिंग ली। ईश अपनी सफलता का श्रेय परिजनों और शिक्षकों को देते हैं।
लक्ष्य : इंजीनियर बनना।
सक्सेस मंत्र : परीक्षा के समय सोशल मीडिया से बनाई दूरी।
रिपोर्ट कार्ड
अंग्रेजी 100
हिन्दी 100
सामाजिक विज्ञान 100
गणित 100
विज्ञान 99

किसी तरह का कोई ट्यूशन नहीं लिया- अंकुर मिश्रा, गाजियाबाद

अंकुर का कहना है कि पढ़ाई के लिए कभी समय तय नहीं किया था, बल्कि लक्ष्य निर्धारित किया था। पढ़ाई शुरू करने से पहले यह तय कर लेता था कि आज कितना सिलेबस पूरा करना है। अब वह लक्ष्य चार घंटे में पूरा हो या फिर पांच से आठ घंटे में। जब तक एक-एक बिंदु समझ में नहीं आता था, तब तक उसी के पीछे लगा रहता था। किसी तरह का कोई ट्यूशन नहीं लिया। सिर्फ  सेल्फ स्टडी के जरिये हर विषय को समझा। ईश पढ़ाई के अलावा क्रिकेट पसंद करते हैं और एमएस धोनी के फैन हैं। पढ़ाई के बाद तनाव दूर करने के लिए क्रिकेट खेलते हैं।
लक्ष्य : इंजीनियर बनना।
सक्सेस मंत्र : पढ़ाई का समय नहीं, हर दिन की पढ़ाई का लक्ष्य बनाएं।
रिपोर्ट कार्ड
अंग्रेजी 100
हिन्दी 100
विज्ञान 100
सोशल साइंस 100
गणित 99

फ्री माइंड होकर की पढ़ाई- योगेश गुप्ता, जौनपुर

योगेश कुमार गुप्ता अपनी सफलता पर काफी खुश हैं। इसका श्रेय वह माता-पिता को देते हैं। योगेश ने बताया कि पढ़ाई को लेकर कभी बहुत दबाव में नहीं रहा। फ्री माइंड होकर पढ़ाई की। परीक्षा के दौरान भी सामान्य दिनों की तरह ही पढ़ाई की। स्कूल के अलावा घर पर रोज चार से पांच घंटे मेहनत करता था। इसी कारण परीक्षा के समय कभी दबाव महसूस नहीं हुआ। योगेश डॉ. एपीजे कलाम और स्वामी विवेकानंद को वह आदर्श मानते हैं।
लक्ष्य:  डॉक्टर बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं। 
टिप्स : पढ़ाई को कभी बोझ न समझे, हमेशा तानव मुक्त होकर पढ़ें
रिपोर्ट कार्ड
अंग्रेजी 100
हिन्दी 100
विज्ञान 100
सोशल साइंस 99
गणित 100

फेसबुक से रहे बिल्कुल आउट: वत्सल वार्ष्णेय, मेरठ

सीबीएसई दसवीं की बोर्ड परीक्षा में ऑल इंडिया टॉपर में शामिल मेरठ के वत्सल वार्ष्णेय ने 500 में से 499 अंक हासिल किए हैं। वत्सल दीवान पब्लिक स्कूल कैंट के छात्र हैं। उनका परिवार सोमदत्त विहार जागृति विहार में रहता है। पिता डॉ. अनुपम वार्ष्णेय मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज में पैथोलॉजिस्ट हैं। मम्मी डॉ. तरंग गोयल मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज में त्वचा रोग विशेषज्ञ हैं। छोटा भाई वासु दीवान पब्लिक स्कूल में ही छठवीं कक्षा में पढ़ता है। वत्सल को मैथ सबसे ज्यादा प्रिय है। पढ़ाई के साथ बैडमिंटन खेलना पसंद है। वत्सल अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों व परिवार को देते हैं। वत्सल बीटेक करके इंजीनियर बनना चाहते हैं।

माता-पिता चिकित्सक हैं, लेकिन वत्सल का सपना इंजीनियर बनना है। वत्सल केवल व्हाट्सएप प्रयोग करते हैं। सोशल मीडिया पर कोई एकाउंट नहीं है। व्हाट्सएप का प्रयोग भी केवल पढ़ाई और एजुकेशन ग्रुप तक सीमित है। वत्सल ने पांच में से चार विषयों में पूरे 100 अंक लिए हैं। केवल गणित में 99 अंक हैं, 01 नंबर कटा है। गणित में एक अंक कटने की वजह वत्सल सवाल में कंफ्यूजन को बताते हैं। बिना कोचिंग सफलता हासिल की है। वत्सल आगे की पढ़ाई पीसीएम स्ट्रीम लेकर कर रहे हैं।

लक्ष्य : बीटेक करके इंजीनियर बनना
टिप्स : मन लगाकर पढ़ाई करें। पिछले साल के पेपर हल करें। साथ ही खुद के सैंपल पेपर बनाकर उन्हें लगातार हल करते रहें। पढ़ाई के दौरान तनाव न लें।
स्कोर कार्ड
अंग्रेजी -100
फ्रैंच - 100
मैथ्स - 99
साइंस - 100
सोशल साइंस - 100

खुशी मनाती छात्राएं
खुशी मनाती छात्राएं - फोटो : अमर उजाला

मोबाइल और सोशल मीडिया से बनाई दूरी, नहीं ली कोचिंग- मान्या, बठिंडा

सीबीएसई की ओर से दसवीं कक्षा के घोषित नतीजों में शहर की छात्रा मान्या ने 499.8 अंक हासिल कर अपने माता-पिता और अध्यापकों का नाम रोशन किया है। टॉप करने वाली छात्रा मान्या ने कहा कि उसे इतने अंकों की उम्मीद नहीं थी। लेकिन जैसे ही उसने अपना नतीजा देखा तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मान्या ने बताया कि उसने एग्जाम और स्कूल के दिनों में मोबाइल और सोशल मीडिया से हमेशा ही दूरी बनाकर रखी है। बहुत जरूरी होने पर ही वह मोबाइल का इस्तेमाल करती है।

बातचीत में मान्या ने बताया कि वह डाक्टर बनकर देश की सेवा करना चाहती है। उसने कहा कि अगर कोई भी स्कूली छात्र रूटीन में होमवर्क करेगा तो वो इस कामयाबी को आसानी से हासिल कर सकता है। उसने कहीं से किसी तरह की कोई कोचिंग भी नहीं ली है। मान्या ने इस कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता और अध्यापकों को दिया। सेंट जेवियर्स स्कूल के फादर एड्रिन ने बताया कि मान्या के साइंस सब्जेक्ट में एक अंक कम आया है, अन्य सभी में उसके सौ प्रतिशत नंबर हैं।
लक्ष्य: डॉक्टर बनकर गरीबों की सेवा करना

पांच घंटे, सोशल मीडिया आधे घंटे- तरू जैन, जयपुर

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अजमेर रीजन में जयपुर के जवाहर नगर निवासी तरू जैन ने 500 में से 499 अंक लेकर टॉप किया है। उन्होंने बताया कि वे चार से पांच घंटे रोजाना पढ़ाई को देती थीं और केवल आधा घंटा सोशल मीडिया को। वह रटने में विश्वास नहीं रखती। उनके पिता निजी बैंक में मुख्य प्रबंधक हैं और मां गृहिणी हैं। तरू इंटर के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई करना चाहती हैं। 
लक्ष्य:  सीए बनने का
टिप्स : जो पढ़ें, समझकर पढ़े, रट्टा नहीं मारे

जश्न मानते छात्र छात्राएं
जश्न मानते छात्र छात्राएं - फोटो : अमर उजाला

CBSE 10th Result: दिल्ली के परिणाम में सुधार, सरकारी स्कूलों का रिजल्ट भी पहले से सुधरा

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के दसवीं के नतीजों में इस बार 2.35 फीसदी का सुधार हुआ है। इस बार दिल्ली का परीक्षा परिणाम का 80.97 फीसदी रहा है जबकि बीते साल 78.62 फीसदी था। दिल्ली में सरकारी स्कूलों के परिणाम में भी सुधार हुआ है। इस साल सरकारी स्कूलों का रिजल्ट 71.97 फीसदी रहा है जबकि बीते साल 69.33 फीसदी विद्यार्थी पास हुए थे। इस तरह सरकारी स्कूलों के रिजल्ट में 2.64 फीसदी का इजाफा हुआ है। सबसे अधिक 4.17 फीसदी सुधार दिल्ली के सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में हुआ है। इन स्कूलों का पास प्रतिशत 74.13 फीसदी रहा है जबकि बीते साल 69.96 फीसदी था। परीक्षा में सरकारी स्कूूलों  के 1,66,167 बच्चे बैठे, जिनमें से 1,18,936 (71.58 फीसदी) पास हुए। 44516 बच्चों की कंपार्टमेंट आई है, जबकि 144 विद्यार्थियों को 100 फीसदी अंक मिले।

दिल्ली में सबसे अच्छा परिणाम केन्द्रीय विद्यालयों का रहा है। इस बार इन स्कूलों का रिजल्ट 99.80 फीसदी रहा है। जबकि बीते साल 7.03 फीसदी था। जवाहर नवोदय विद्यालय भी पीछे नहीं है। दिल्ली में इन स्कूलों का रिजल्ट 99.36 फीसदी है जबकि बीते साल 98.63 फीसदी था। प्राइवेट स्कूलों का बीते साल रिजल्ट 89.83 फीसदी था जो कि इस साल बढ़कर 93.18 फीसदी हो गया है। इस साल दिल्ली से 3,25,638 विद्यार्थियों ने दसवीं की परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था, जिसमें से 3,22,067 ने परीक्षा दी। इनमें से 2,60,789 विद्यार्थी पास हुए हैं। पिछले साल 2,89,717 ने परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था, जिनमें से 2,86,660 बच्चों ने परीक्षा दी थी। इनमें से 2,25,361 विद्यार्थी पास हुए थे। क्षेत्रावार नतीजों में इस बार दिल्ली नौवें स्थान पर है। 

दिव्यांग श्रेणी के 95.99 फीसदी छात्र पास 

इस साल परीक्षा में  दिव्यांग श्रेणी के 5233 विद्यार्थी बैठे, जिनमें से 5023 पास हुए हैं। इस तरह इनका पास प्रतिशत 95.99 फीसदी रहा है। इनमें से 275 छात्रों ने 90 फीसदी से अधिक जबकि 48 छात्रों ने 95 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। इस श्रेणी से पहले तीन स्थानों पर त्रिवेंद्रम रीजन के ही तीन छात्रों ने बाजी मारी है। 493 अंक प्राप्त कर त्रिसूर के दिलविन प्रिंस ने पहला स्थान प्राप्त किया है। इसी तरह कोचीन के सावन विशोय 492 अंक लाकर दूसरे व कोचीन के ही ईरेने ट्रेसा मैथ्यू 491 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहे हैं।

77.88 फीसदी देंगे कंपार्टमेंट परीक्षा, दिल्ली में सबसे अधिक

सफलता का जश्न मनाते छात्र-छात्राएं
सफलता का जश्न मनाते छात्र-छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
इस बार 1,38, 705 बच्चों की कंपार्टमेंट आई है। यह संख्या परीक्षा में बैठे कुल विद्यार्थियों की 7.88 फीसदी है। बीते साल 1,86,067 छात्रों की कंपार्टमेंट आई थी। दिल्ली में सबसे अधिक 56,160 छात्रों की कंपार्टमेंट आई है। बीते साल भी दिल्ली से ही सबसे अधिक छात्रों की कंपार्टमेंट आई थी। दूसरा नंबर पटना का है, यहां 15,068 छात्रों की कंपार्टमेंट आई है। तीसरे नंबर पर 14, 581 छात्रों के साथ प्रयागराज कंपार्टमेंट के मामले मेें तीसरे स्थान पर है। वहीं 14, 239 विद्यार्थियों के साथ पंचकूला का चौथा स्थान है। पांचवें स्थान पर देहरादून में 13, 973 विद्यार्थी कंपार्टमेंट की परीक्षा देंगे। सबसे कम 107 छात्र त्रिवेंद्रम से हैं। 

सरकारी स्कूलों के होनहार

आरपीवीवी, सिविल लाइन के छात्र धनजोत सिंह ने 98.6, राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय की शालू  ने 97.8, शहीद अमरचंद सर्वोदय विद्यालय, शामनाथ मार्ग की अर्विता  शुक्ला ने 97.8 और आरपीवीवी, हरिनगर की छात्रा श्रेया मौर्य ने 97.6 फीसदी अंक हासिल किए। 

कौन कितने पास

लड़कियां:     92.45 फीसदी
लड़के :       90.14 फीसदी
ट्रांसजेंडर:     94.74 फीसदी

देशभर में नकल के मामले पांच गुणा बढ़े, सर्वाधिक अजमेर रीजन में

खुशी का इजहार करते डीएमए के विद्यार्थी।
खुशी का इजहार करते डीएमए के विद्यार्थी।
केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा में नकल के मामले पिछले साल की तुलना में पांच गुणा बढ़ गए हैं। बीते साल जहां 26 मामले सामने आए थे, वहीं इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 137 हो गया है। नकल के सर्वाधिक 59 मामले अजमेर रीजन  से, चैन्नई 30 और पंचकूला से 22 मामले सामने आए हैं। बीते साल अजमेर व चैन्नई रीजन से नकल का  एक भी मामला नहीं था। जबकि पंचकूला से आठ मामले आए थे। त्रिवेंद्रम पास प्रतिशत हासिल करने में नंबर वन रहा है। वहीं इस रीजन से नकल का एक भी मामला सामने नहीं आया है। बीते साल यहां से नकल के तीन मामले प्रकाश में आए थे। 

दिल्ली से बीते साल एक भी नकल का मामला नहीं था जबकि इस बार दो केस पकड़े गए। देहरादून से बीते साल एक मामला था जो इस साल बढ़कर आठ तक पहुंच गया। पटना रीजन से नकल के मामलों में सुधार हुआ है। बीते साल यहां चार मामले थे जो घटकर इस साल एक रह गया है। भुवनेश्वर से पांच मामले, गुहावटी से छह, प्रयागराज से चार मामले सामने आए हैं। बीते साल प्रयागराज में नकल के सात मामले थे। 

केवीएस ने मारी बाजी, रिजल्ट में नंबर वन

दसवीं के नतीजों में केन्द्रीय विद्यालयों ने बाजी मारी है। केवीएस ने जवाहर नवोदय विद्यालयों को पीछे छोड़ते हुए नंबर वन का ताज पहना। इस साल इन स्कूलों का पास प्रतिशत 99.47 फीसदी रहा है जो कि बीते साल के मुकाबले में 3.51 फीसदी अधिक है। त्रिवेंद्रम रीजन में 99.98 फीसदी, दिल्ली में 99.80 फीसदी, पंचकूला में 99.75, देहरादून में 99.63, चैन्नई में 99.58 फीसदी, भुवनेश्वर में 99.54, अजमेर 99.37 फीसदी, प्रयागराज में 99.33, पटना में 98.93, गुहावटी में पास प्रतिशत 98.47 रहा है। 

नवोदय विद्यालयों का पास प्रतिशत 98.75 फीसदी रहा है। बीते साल ये स्कूल 97.31 फीसदी  के साथ पहले स्थान पर थे। इस साल निजी स्कूलों का परिणाम 94.15  फीसदी जबकि सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों का 76.95 फीसदी और सरकारी स्कूलों का परिणाम 71.91 फीसद रहा। प्राइवेट छात्रों का रिजल्ट 11.86 फीसदी रहा है। 

दसवीं के नतीजों में दिखा सौ का दम, विभिन्न विषयों में 44,711 छात्रों ने हासिल किए 100 फीसदी अंक

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के दसवीं के नतीजों में छात्रों ने सौ का दम दिखाया है। देशभर से इस बार 45 विषयों में 44, 711 छात्रों ने शतकीय पारी खेली है। सर्वाधिक 11,267 छात्रों ने सोशल साइंस में 100 फीसदी अंक हासिल किए। विद्यार्थियों में गणित का भय नहीं दिखा। इस विषय में 9614 छात्रों ने गणित में सौ में से सौ अंक प्राप्त किए हैं। 

अलग-अलग विषयों में 90 और 95 फीसदी अंक पाने वाले भी पीछे नहीं हैं। इस बार के नतीजों में सभी जोन में 2,82,399 छात्रों ने 90 से 100 फीसदी के बीच अंक प्राप्त किए हैं। यह आंकड़ा बीते साल के मुकाबले में काफी बढ़ा है। बीते साल 1, 58, 969 छात्रों ने 90 से 100 फीसदी के बीच अंक प्राप्त किए थे। इस बार 2,25,143 छात्रों ने 90 फीसदी से अधिक व 57,256 छात्रों ने 95 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। 

सीबीएसई के अनुसार बीते सालों में प्रश्न पत्रों का पैटर्न बदला है। ऐसे में छात्र अच्छे अंक प्राप्त करने लगे हैं। इस बार छात्रों ने काफी विषयों में सौ का आंकड़ा छुआ है। फाउंडेशन ऑफ आईटी में 6762 छात्रों ने, इंफोर्मेशन टेक्नॉलॉजी में 4475 व साइंस में 2872 छात्रों ने सौ फीसदी अंक हासिल किए हैं।

संस्कृत में भी 100 में से 100 अंक लाने वाले कम नहीं है। इस विषय में 2758 छात्रों ने यह मुकाम हासिल किया है। अंग्रेजी में 1820 छात्रों ने सौ फीसदी अंक पाए हैं। 1290 छात्रों ने हिंदी कोर्स बी में शतक लगाया है। सबसे कम ऑटोमोबाइल टेक्नॉलजी, इलेमेट्री बिजनेस व हेल्थ केयर सर्विस में एक-एक छात्र ने सौ में सौ अंक हासिल किए हैं। 
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