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यादें: 21 साल से संसद भवन में चिट्ठियां पहुंचाने वाले रामशरण सेवानिवृत्त, बोले- कई पीएम-मंत्री बदलते देखे

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 31 Aug 2021 05:03 PM IST

सार

राम शरण ने बड़ी गंभीरता के साथ अपने काम और जिम्मेदारियों को याद किया। उन्होंने कहा कि संसद भवन के अंदर रोजाना जाकर सेवा देना आसान नहीं था। क्योंकि एक गलती से संसद के अंदर आना-जाना बंद हो सकता था।
राम शरण हुए रिटायर
राम शरण हुए रिटायर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

संसद भवन में पिछले 21 साल से चिट्ठियां पहुंचाने वाले डाकिया राम शरण ने शुक्रवार को अपनी आखिरी डाक पहुंचाई और अब वह मंगलवार को अपनी सेवाओं से मुक्त हो रहे हैं। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने संसद में कई प्रधानमंत्री और मंत्री बदलते देखा, हर पांच साल में कई सांसदों को बदलते देखा। लेकिन संसद भवन के गलियारे में उनका आना-जाना बराबर जारी रहा।
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राम शरण पिछले दो दशक से भारत के सबसे शक्तिशाली लोगों के बीच रहे। उन्होंने संसद भवन के भीतर जाकर रोजाना मंत्रियों-सांसदों की चिट्ठियां पहुंचाईं। वह मंगलवार को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। सोमवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का अवकाश नहीं होता तो वह सोमवार को ही सेवानिवृत्त हो जाते। उन्होंने शुक्रवार को अपना आखिरी डाक संसद भवन के भीतर पहुंचाया।


सेवानिवृत्ति से पहले राम शरण ने बताया कि उन्होंने भले ही मंत्रियों और सांसदों के बीच काम किया, लेकिन सभी को समान महत्व दिया। कभी किसी ने उनके काम की कोई शिकायत नहीं की। 

राम शरण ने बड़ी गंभीरता के साथ अपने काम और जिम्मेदारियों को याद किया। उन्होंने कहा कि संसद भवन के अंदर रोजाना जाकर सेवा देना आसान नहीं था। क्योंकि एक गलती से संसद के अंदर आना-जाना बंद हो सकता था। लेकिन 21 साल वह सदन के अंदर जाकर लोगों को डाक देते रहे।

उन्होंने बताया कि विशाल संसद भवन परिसर के अंदर डाक पहुंचाने के लिए उन्हें एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक घंटों चक्कर लगाना पड़ता था। वरिष्ठ मंत्री हों या साधारण कर्मचारी उन्होंने सभी की डाक समय पर पहुंचाई।

60 वर्षीय राम शरण ने बताया कि उनके सामने ही कई प्रधानमंत्री और मंत्री बदलते रहे, लेकिन उनका ध्यान हमेशा अपने कर्तव्य पर रहा। साल 2000 में उनकी संसद भवन में पोस्टिंग हुई, उस वक्त ये जिम्मेदारी कोई दूसरा डाकिया नहीं लेना चाहता था। क्योंकि अधिकतर लोगों को संसद के भूलभुलैया गलियारे, एक जैसे कमरे और दरवाजे भ्रमित करते थे। लेकिन उन्होंने डाक विभाग द्वारा उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारी को लिया और बखूबी निभाया।

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