गुरुग्राम: पटाखों के शोर में दब गईं गोलियों की गूंज और चीख-पुकार, बुझ गए घर के चिराग, कुत्ते ने बचाई एक जान

अमर उजाला नेटवर्क, गुरुग्राम Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sat, 06 Nov 2021 12:53 PM IST
गुरुग्राम में परिवार पर चलाई ताबड़तोड़ गोलियां
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गुरुग्राम में चौदह साल पहले मानेसर पर राज करने के लिए सोनू ने अपने साथी के साथ होली के दिन मनोज की हत्या कर दी थी। इसका बदला लेने के लिए उसके छोटे भाई रिंकू ने अपने साथियों के साथ मिलकर गुरुवार रात दिवाली के दिन खूनी खेल को अंजाम दिया। हमलावर गोलियां चलाते रहे और गोपाल राघव के घर से चीखें गूंजती रही, लेकिन पटाखों के शोर के बीच न तो गोलियों की आवाज कोई सुन पाया और न ही पीड़ित लोगों की चीख। गोलियों की आवाज सुन लोगों ने समझा पटाखे फूट रहे हैं। किसी को पता नहीं चले और वारदात को आसानी से अंजाम दिया जा सके संभवत: इसी कारण हमलावरों ने दिवाली की रात को चुना। सीआईए सहित तीन टीम आरोपियों को दबोचने के लिए जगह-जगह छापामरी कर रही है। 
इसी घर में हुई वारदात
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पुलिस के अनुसार किसी जमाने में सोहनपाल उर्फ सोनू व मनोज अच्छे दोस्त हुआ करते थे। उस दौरान मानेसर का विकास शुरू हुआ था। मानेसर पर राज करना व डॉन बनना सोनू का सपना था। यह बात उसके दोस्त मनोज को नागवार लगी। उसने शराब के नशे में सोनू को गाली दे दी। इस दौरान हुए झगड़े में मनोज ने कट्टा निकाल कर सोनू पर तान दिया। इसे देख खोह गांव के वेद ने मनोज को गोली मार दी। इस मामले में मनोज और उसके बड़े भाई बलराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इन दिनों दोनों जेल से बाहर थे। 
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मृतकों की फाइल फोटो
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फिल्मी स्टाइल में चली गोलियां 
मौके की छानबीन व मिले कारतूस के खोल से पता चलता है कि वहां पर लगभग 50 गोलियां चलीं। हमलावरों ने खिड़की से अपनी पोजिशन लेकर ताबाड़तोड़ गोलियां दागी। इससे किसी को भागने का मौका नहीं मिला। गोली चलने की आवाज तो आ रही थी मगर पड़ोस के लोगों ने सोचा दिवाले के पटाखे छूट रहे हैं। 
फाइल फोटो
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मोहल्ले में चर्चा, कुत्ते ने बचाई महिला की जान
कुत्ते को सबसे वफादार जानवर माना जाता है और पीड़ित परिवार के पेट ने यह साबित भी किया। बताया जा रहा है कि हमलावर घर की एक महिला के सामने आने पर उसे निशाना बनाना चाहते थे। गोलियों की आवाज सुनकर घर का पालतू कुत्ता सतर्क हो गया था। परिवार के लोगों ने बताया कि हमलावर ने ज्योंही गोली चलाई कुत्ते ने महिला को एक साइड में धकेल दिया। उस वक्त वह उसे खाना खिला रही थी। इससे एक गोली उसे छूते हुई निकल गई। यह वाकया पूरे मोहल्ले में चर्चा में है, हालांकि सच्चाई क्या है, इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है।
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फाइल फोटो
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भारी सुरक्षा बल तैनात 
वारदात के बाद कासन गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। बहुत से किरायेदार दिवाली पर गांव गए हुए हैं। रिंकू भी उसी गांव का रहने वाला है। वारदात के बाद और कोई घटना न घटे इसके लिए उसके घर पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। 

प्लानिंग के साथ किया हमला 
पुलिस के अनुसार जब सोनू ने मनोज की हत्या की थी तो रिंकू 14 साल का था। होली के दिन उसके भाई को मारा था तो उसने दिवाली के दिन वारदात को अंजाम दिया। सोनू का परिवार खूब सतर्क रहता था। उनको इस बात का अहसास नहीं था कि कोई दिवाली के दिन वारदात को अंजाम दे सकता था। जबकि हमलावरों ने गोलियों की गूंज छुपाने के लिए यह दिन व समय तय किया था। 
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