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Bday Special : बस कंडक्टर से एक्टर बने जॉनी वॉकर, 5 रुपये मिलती थी सैलरी

टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 11 Nov 2016 02:15 AM IST
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मुंबई का नाम सामने आते ही होठों पर एकदम से मचल उठता है 'सीआईडी' फिल्म का गीत 'ऐ दिल है मुश्किल जीना यहां, जरा हटके जरा बचके ये है बॉम्बे मेरी जां', जो जॉनी वाकर पर फिल्माया गया था। वैसे तो मुंबई का चेहरा काफी बदल चुका है लेकिन आम आदमी की मुश्किलें वही हैं और मुंबई की बसें भी वही हैं। ऐसी ही एक बस में कंडक्टर हुआ करते थे बदरुद्दीन काजी। उनके पिता जमालुद्दीन काजी इंदौर में मिल के मजदूर थे। आर्थिक परेशानी के कारण जब बड़े परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हुआ तो वो सपरिवार मुंबई चले आए।

Bday Special : बस कंडक्टर से एक्टर बने जॉनी वॉकर, 5 रुपये मिलती थी सैलरी

birthday special story on johnny walker
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बदरुद्दीन को मुंबई में बस कंडक्टर की नौकरी मिल गई। उन्हें शुरू से सिनेमा का जुनून था और लोगों की नकल उतारने में वो बहुत माहिर थे। वो बस में मिमिक्री से यात्रियों का मनोरंजन करते रहते थे। 
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माहिम में उन्हें एक एक्स्ट्रा सप्लायर ने देखा और उन्हें फिल्मों में एक्स्ट्रा का काम ऑफर किया। भीड़ में खड़े होने होनें के लिए उन्हें 5 रुपये मिलते थे जिसमें से एक रुपए सप्लायर ले लेता था। 

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शूटिंग के बीच में फुर्सत के दौरान सितारों के मनोरंजन के लिए लोग अक्सर जॉनी वॉकर को बुला लेते और लतीफे सुनाने को कहते। 'हलचल' की शूटिंग पर बलराज साहनी ने जब उन्हें दिलीप कुमार, याकूब जैसे स्टार्स का मनोरंजन करते देखा तो उन्हें बुरा लगा। उन्होंने बाद में बुलाकर बदरु से कहा कि तुम कलाकार हो, भांड नहीं। कला की इज्जत करना सीखो।
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बदरु ने जब अपनी मजबूरी बताई तो बलराज साहनी ने उन्हें एक आइडिया सुझाया और अगले दिन गुरुदत्त के ऑफिस में आने को कहा। बलराज साहनी उन दिनों 'बाजी' की स्क्रिप्ट लिख रहे थे। अगले दिन गुरुदत्त अपने ऑफिस में चेतन आनंद के साथ कुछ डिस्कस कर रहे थे कि बदरुद्दीन अचानक आ धमके और शराबी की ऐक्टिंग शुरू कर दी। उन्होंने न सिर्फ धमाल मचाया बल्कि गुरुदत्त के साथ बदतमीजी भी शुरू कर दी। हरकतें जब हद को पार करने लगीं, तो गुरुदत्त को गुस्सा आ गया। उन्होंने स्टाफ को बुलाया और शराबी को बाहर सड़क पर फेंक आने का फरमान जारी कर दिया।

तभी बलराज साहनी हंसते हुए वहां आ पहुंचे और गुरुदत्त को सारा माजरा समझाया। गुरुदत्त इतने खुश हुए कि पीठ थपथपा कर न केवल उनकी ऐक्टिंग की दिल खोलकर तारीफ की बल्कि 'बाजी' में फौरन एक रोल दिया। उन्होंने बदरुद्दीन काजी को जॉनी वाकर का नया फिल्मी नाम दे डाला।
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