बेबाक: नसीरुद्दीन शाह बोले- मन की बात कहने पर उत्पीड़न का डर, इसलिए हर मुद्दे पर चुप रहते हैं तीनों 'खान'

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: स्वाति सिंह Updated Tue, 14 Sep 2021 05:34 PM IST
नसीरुद्दीन शाह
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बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार नसीरुद्दीन शाह इंडस्ट्री के उन सितारों में शामिल हैं जो किसी भी मुद्दे पर अपनी बेबाक राय साझा करने से पीछे नहीं हटते हैं। कई बार उनके बयानों को लेकर विवाद भी हो जाता है हालांकि किसी भी सामाजिक राजनीतिक और फिल्मों से जुड़े गंभीर मुद्दे पर नसीरुद्दीन शाह बेबाक राय रखते हैं। हाल ही में उन्होंने अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता के बाद इंडियन मुस्लिमों के कुछ सामने आए बयानों पर टिप्पणी की थी। अब उन्होंने बताया है कि कुछ बड़े फिल्ममेकर्स और एक्टर्स को प्रो-इस्टैब्लिशमेंट्स फिल्में बनाने के लिए कैसे इनकरज किया जाता है। नसीरुद्दीन ने कहा कि उनके पास इस बात के सबूत नहीं हैं कि प्रोपेगैंडा फिल्में बनाने के लिए फिल्ममेकर्स और एक्टर्स को क्लीन चिट देने का वादा किया जाता है या नहीं, लेकिन उन्हें लगता है कि जिस तरह की आजकल फिल्में बन रही हैं, उससे यह स्पष्ट है। 
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अभिनेता कहते हैं, 'उन्हें सरकार द्वारा, सरकार समर्थक और प्रिय नेताओं की कोशिशों की तारीफ करते हुए फिल्में बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्हें इसके लिए आर्थिक रूप से भी मदद दी जा रही है। इसके साथ ही अगर वे प्रोपेगैंडा फिल्में बनाते हैं तो क्लीन चिट का भी वादा किया जाता है। ' 
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वहीं, नसीरुद्दीन ने कहा कि उन्हें मुस्लिम होने के कारण फिल्म इंडस्ट्री में कभी भी भेदभाव का शिकार नहीं होना पड़ा लेकिन उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों को अपने मन की बात कहने के लिए हर जगह पर परेशान किया जाता है। उन्होंने कहा कि आखिर बॉलीवुड के तीनों खान (सलमान, शाहरुख और आमिर) क्यों हमेशा खामोश रहते हैं। वह इन तीनों की तरफ से तो नहीं बोल सकते हैं मगर उन्हें इस बात का अंदाजा है कि इन लोगों को कितने उत्पीड़न का शिकार होना पड़ेगा।'
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नसीरुद्दीन ने कहा, 'वे (सलमान, शाहरुख और आमिर) उस उत्पीड़न के कारण चिंतित हैं जिसका उन्हें शिकार बनाया जाएगा। उनके पास खोने के लिए काफी कुछ है। यह केवल आर्थिक उत्पीड़न नहीं होगा या एक दो विज्ञापन छूटने तक सीमित नहीं होगा बल्कि हर तरह से परेशान किया जाएगा।' अभिनेता कहते हैं कि जो भी बोलने की हिम्मत करता है उसी का उत्पीड़न किया जाता है। 
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उन्होंने कहा, 'यह केवल जावेद साहब या मुझ तक सीमित नहीं है, जो भी दक्षिणपंथी मानसिकता के खिलाफ बोलेगा उसके साथ ऐसा होगा।' बता दें कि नसीरुद्दीन शाह लगभग पांच दशकों से इंडियन फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा हैं और 'निशांत', 'आक्रोश', 'मिर्च मसाला', 'अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है', 'जुनून', 'मंडी', 'अर्ध सत्य', 'जाने भी दो' जैसी कुछ बेहतरीन फिल्में भी की हैं।  
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