बाइस्कोप: बापू व अनिल कपूर की जोड़ी का अमर संदेश, 'सांसों से नहीं, कदमों से नहीं, मोहब्बत से....'

पंकज शुक्ल
Updated Mon, 15 Jun 2020 01:05 AM IST
मोहब्बत
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क्या आपको पता है कि मशहूर निर्देशक मणिरत्नम की बतौर निर्देशक पहली फिल्म का हीरो कौन है? क्या आपको पता है कि तमिल लेखक, निर्देशक और अभिनेता के भाग्यराज की लिखी फिल्मों की हिंदी रीमेक में सबसे ज्यादा किस अभिनेता ने काम किया है? और, क्या आपको पता है कि उस हीरो का नाम जो अपनी गर्लफ्रेंड को अपनी एक फिल्म दिखाने ले गया हो और फिल्म में उसका सीन ही काट दिया गया हो, परदे पर कुछ दिखा हो तो बस उनका पांव? नहीं पहचाना? ये हैं हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय मुन्ना, लखन और प्रेम प्रताप पटियालावाले यानी कि अनिल कपूर। अनिल कपूर से अब भी आप मिलो तो यही लगता है कि आपके छोटे भाई हैं। शेखर कपूर भले मिस्टर इंडिया के बाद टाइम मशीन न बना पाए हों, लेकिन अनिल कपूर के लिए समय रुका हुआ है। और, इसी रुके हुए समय में हम आज आपको ले चलते हैं 35 साल पीछे जब अनिल कपूर और विजेता पंडित की फिल्म मोहब्बत रिलीज हुई थी।
वो सात दिन
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मोहब्बत के निर्देशक बापू अपने समय के महान फिल्म निर्देशक रहे। लेकिन, उनके बारे में बात करने से पहले बात अनिल कपूर और इस फिल्म में उनकी हीरोइन रहीं विजेयता पंडित की। अनिल कपूर और उनके छोटे भाई संजय कपूर के नाम ही ये करिश्मा दर्ज है कि दोनों ने मोहब्बत नाम की अलग अलग फिल्मों में काम किया है। संजय कपूर वाली मोहब्बत में माधुरी दीक्षित हीरोइन थीं। उनके साथ फिल्म की रोमांटिक लीड में अक्षय खन्ना भी थे। और, ये तो आपको पता ही है कि माधुरी दीक्षित ने अक्षय खन्ना के पिता विनोद खन्ना के साथ भी सुपर रोमांटिक काम फिल्म दयावान में किया है। मेरे हिसाब से अनिल कपूर को सिनेमा का एक पुरस्कार सिर्फ इस बात के लिए मिलना चाहिए कि उन्होंने हिंदी और विभिन्न भारतीय भाषाओं के बीच एक ऐसे पुल का काम किया, जिससे निकलकर तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम सारी भाषाएं गुजरीं। अकेले के भाग्यराज की कोई एक दर्जन फिल्मों के हिंदी रीमेक में अनिल कपूर काम कर चुके हैं।

भारतीय सिनेमा के मशहूर निर्देशक मणिरत्नम ने अपनी पहली फिल्म कन्नड़ में बनाई थी, पल्लवी अनु पल्लवी। इसके हीरो थे अनिल कपूर। अगर आपको कन्नड़ नहीं भी समझ आती है तब भी कभी मौका लगे तो इसके गाने जरूर सुनिएगा। ये और बात है कि इस फिल्म में अनिल कपूर की कन्नड़ में डबिंग किसी और ने की है लेकिन हिंदी सिनेमा में नाम कमाने की सोचे बैठा कोई युवा जाकर कन्नड़ सिनेमा का हीरो बन जाए, बहुत जिगरेवाली बात है। और, जिगरा तो अनिल कपूर का शुरू से बड़ा रहा। हीरो का पहला काम भी उन्हें एक गैर हिंदी फिल्म में ही मिला था। ये फिल्म थी वंश वृक्षम और इस फिल्म के निर्देशक थे बापू। अनिल कपूर से कभी बापू का जिक्र करके देखिए, उनके सार्वकालिक चमकते रहने वाले चेहरे के पीछे एक आभा मंडल सा बनता आपको दिखेगा। बापू ने सिर्फ वंश वृक्षम में अनिल कपूर को हीरो बनने का मौका ही नहीं दिया, बल्कि अनिल कपूर की हिंदी में मेन लीड वाली पहली फिल्म वो सात दिन का निर्देशन भी बापू ने ही किया है। बापू की ही फिल्म हम पांच में भी अनिल कपूर ने एक छोटा सा रोल किया था।
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मोहब्बत
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फिल्म मोहब्बत में अनिल कपूर को फिर बापू का सानिध्य मिला। अनिल कपूर की ये फिल्म उस दौर की फिल्म है जब हिंदी सिनेमा में श्रीदेवी, जया प्रदा और जीतेंद्र का बोलबाला था और दक्षिण की आबो हवा में पगी इन फिल्मों का एक खास तरह का दृश्य संयोजन, रंगानुपात और संगीत होता था। सन सत्तर से शुरू होकर 2020 तक अनिल कपूर अगर काम कर रहे हैं तो इसका सबसे बड़ा राज यही है कि सिनेमा के इन तीनों अंगों में समय के साथ होने वाले बदलाव को अनिल कपूर दूसरों से पहले पकड़ते रहे और खुद को उसी के अनुसार ढालते रहे। बदलाव उनके लिए तरक्की का सुनहरा मौका है। अनिल कपूर कहते हैं, “ये सब नजरिए का खेल है। अगर आप किसी बदलाव को चुनौती समझने लगेंगे तो वह आपको वही लगेगी। लेकिन अगर आप बदलाव को एक मौका मानेंगे तो इस पर चौका मारने को क्रीज में आप जगह भी निकाल लेंगे और पैरों को भी उसी हिसाब से जमीन पर जमा लेंगे। मैं भी यही करता आया हूं। सीखते रहना ही जीवन है।”

हैदराबाद में बाहुबली फिल्म की रिलीज के बाद के दिनों में हुए कार्यक्रम में उन्होंने अपनी पहली लीड हीरो फिल्म वंश वृक्षम का जिक्र करते हुए बापू का गुणगान किया था, अनिल ने कहा, “मेरे करियर की शुरुआत इसी भूमि से हुई थी, इसी जमीन से हुई थी, हैदराबाद में हुई थी। मुंबई में कोई काम नहीं दे रहा था। तब महान निर्देशक बापू साब ने मुझे ये फिल्म दी। मैं हैदराबाद हवाई जहाज से आया और यहां से मैंने राजमुंदरी के लिए ट्रेन पकड़ी शूटिंग लोकेशन पर पहुंचने के लिए। अगर आज मैं यहां खड़ा हूं तो उनकी वजह से खड़ा हूं। बापू साब ने मुझे तब मौका दिया था जब मुझे कोई पूछ भी नहीं रहा था।” अनिल कपूर ने तेलुगू, कन्नड़ के अलावा मलयालम सिनेमा में भी लीड रोल किया है। चंद्रलेखा नाम की ये मलयालम फिल्म काबिल निर्देशक प्रियदर्शन ने मोहनलाल, सुकन्या व पूजा बत्रा आदि के साथ बनाई थी।
vijayta pandit
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अनिल कपूर ने मोहब्बत उस दौर में की जब उनका करियर धीरे धीरे रफ्तार पकड़ रहा था। वह सब तरह की फिल्में ट्राई कर रहे थे। मशाल में दिलीप कुमार जैसे दिग्गज अभिनेता के सामने भी सीना तानकर खड़े रहने पर उनको पूरी हिंदी फिल्म बिरादरी में इज्जत दिलाई थी। इसी फिल्म ने उन्हें मेरी जंग और जांबाज जैसी फिल्में भी दिलाई थी। अंदर बाहर, लैला, लव मैरिज में भी लोगों को उनका काम भाया था। और, जब मोहब्बत आई तो लोगों को उसमें भी शेखर और रूपा चौधरी की प्रेम कहानी खूब भाई। दोनों एक दूसरे से प्रेम करते हैं। रूपा के पिता दोनों की शादी के लिए भी मान जाते हैं। लेकिन, जब शेखर के माता पिता शादी की बात करने आते हैं तो मामला बिगड़ जाता है और रूपा के पिता उसकी शादी कहीं और करने का ऐलान कर देते हैं। दोनों की शादी कैसे होगी, इसी संघर्ष पर बनी है फिल्म मोहब्बत। इंदीवर का लिखा और संगीतकार बप्पी लाहिड़ी का संगीतबद्ध किया फिल्म का ये गाना इसकी एक झलक है..

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मोहब्बत
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फिल्म मोहब्बत दरअसल के भाग्यराज की तमिल फिल्म थूरल निन्नू पोचू की रीमेक है। तमिल फिल्म को भाग्यराज ने लिखा और निर्देशित तो किया ही, इसमें लीड रोल भी के भाग्यराज ने ही किया था। हिंदी फिल्म में अनिल कपूर को निर्देशित किया बापू ने, जिनके लिए अनिल कपूर कहते हैं, “बापू मेरे उस्ताद, मेरे गुरु, मेरे पथ प्रदर्शन और मेरे शुभचिंतक रहे। मैंने उनसे सिर्फ सिनेमा के बारे में ही नहीं बल्कि जीवन के बारे में भी बहुत कुछ सीखा।” और बहुत कुछ इस फिल्म से फिल्म की हीरोइन विजेयता पंडित ने भी सीखा। मशहूर शास्त्रीय गायक पंडित जसराज की भतीजी और संगीतकार भाइयों जतिन ललित की बहन विजयता पंडित को राजेंद्र कुमार ने अपने बेटे कुमार गौरव की डेब्यू फिल्म लव स्टोरी में साइन किया था। फिल्म ब्लॉकबस्टर हो गई तो तमाम निर्माताओं ने इस जोड़ी को फिर से रिपीट करने के लिए फिल्में साइन करने की कोशिश की पर विजेयता ने सबको मना कर दिया। फिल्म विजेयता की भी दूसरी कोई खास नहीं चली। मोहब्बत को एक तरह से विजेयता की कमबैक फिल्म माना जाता है।

अनिल कपूर और विजेयता की इस फिल्म को लेकर उन दिनों तमाम किस्से सुनने को मिलते थे। गॉसिप फिल्म पत्रिकाओं में दोनों के खूब किस्से छपते और कहा जाता कि विजेयता ने तो यहां तक तय कर लिया था कि उन्हें अब अनिल कपूर के साथ ही सेटल हो जाना है। अनिल कपूर इस मामले में पत्नीव्रता टाइप के इंसान शुरू से रहे हैं। इसी फिल्म के बनने के दौरान अनिल कपूर ने अपनी करीबी दोस्त सुनीता से शादी भी कर ली। अनिल कपूर जिस अंदाज में सुनीता कपूर की अब तक तारीफ करते हैं, दरअसल असली मोहब्बत तो उसे ही कहते हैं। फिल्म मोहब्बत बॉक्स ऑफिस पर हिट रही तो इसमें इसके लीड कलाकारों के अलावा अमरीश पुरी, अमजद खान, अरुणा ईरानी, शक्ति कपूर, शुभा खोटे और सतीश कौशिक आदि कलाकारों के किरदारों का भी बड़ा हाथ रहा। मशहूर अभिनेत्री शम्मी इसमें बरसों बाद परदे पर नजर आईं थीं। फिल्म मोहब्बत की एडीटिंग की थी अपने समय के मशहूर फिल्म एडीटर एन चंद्रा ने। एन चंद्रा ने ही अनिल कपूर की फिल्म वो सात दिन भी एडिट की थी। और यही एन चंद्रा जब डायरेक्टर बनकर अंकुश और प्रतिघात जैसी फिल्मों से हिट हुए तो उनकी हैट्रिक फिल्म रही तेजाब। फिल्म तेजाब से ही अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित दोनों सुपरस्टार बने। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।

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