अध्ययन में दावा: कोरोना से जीवनभर सुरक्षा दे सकती है यह वैक्सीन, डेल्टा वैरिएंट्स पर भी असरदार

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sun, 25 Jul 2021 11:37 AM IST
कोरोना की सबसे असरदार वैक्सीन (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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दुनियाभर में कोरोना के दोबारा से बढ़ते मामलों से सुरक्षित रहने के लिए विशेषज्ञ सभी लोगों से जल्द से जल्द वैक्सीन लगवाने की अपील कर रहे हैं। हालांकि हाल के दिनों में सामने आई कई रिपोर्टस में कहा जा रहा है कि कोरोना के नए म्यूटेटेड डेल्टा और लैम्बडा वैरिएंट्स एंटीबॉडीज को आसानी से चकमा दे सकते हैं। ऐसे में सभी लोगों के मन में एक सवाल अब भी बना हुआ है कि आखिर कौन सी वैक्सीन कोरोना से सुरक्षा देने में सबसे ज्यादा करागर साबित हो सकती है? इसी को लेकर हाल ही में हुए एक शोध में वैज्ञानिकों ने जो बताया है वह लोगों को काफी सुकून देने वाला है।
ब्रिटेन में किए गए एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि ऑक्सफ़ोर्ड-एस्ट्राजेनेका (कोविशील्ड) की वैक्सीन से बनी एंटीबॉडीज न सिर्फ कोरोना के तमाम वैरिएंट्स पर असरदार हैं, साथ ही यह वैक्सीन ता-उम्र आपको कोरोना के गंभीर संक्रमण से सुरक्षित रखने में भी मदद कर सकती है। भारत की दृष्टि से इस अध्ययन को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यहां पर कोविशील्ड वैक्सीन सबसे ज्यादा प्रयोग में लाया जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोविशील्ड वैक्सीन से बनी एंटीबॉडीज और टी- कोशिकाएं कोरोना के नए वैरिएंट्स को भी आसानी से नष्ट कर सकती हैं। आइए इस अध्ययन के बारे में आगे की स्लाइडों में विस्तार से जानते हैं।
वैक्सीन से जीवनभर की सुरक्षा
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ता-उम्र होते रह सकता है टी-कोशिकाओं निर्माण
ऑक्सफोर्ड सहित कई अन्य विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में बताया गया है कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका और जॉनसन एंड जॉनसन जैसे एडेनोवायरस वैक्सीन शरीर को इस प्रकार से प्रशिक्षित कर देते हैं जिससे लंबे समय तक भी शरीर में महत्वपूर्ण टी-कोशिकाओं की स्वाभाविक रूप से निर्माण होते रहता है। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि संभवत: इस तरह से टी-कोशिकाओं का निर्माण पूरी उम्र भर होता रह सकता है, इस आधार पर कोविशील्ड और जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन को लाइफलांग सपोर्ट वाली वैक्सीन माना जा रहा है।
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भारत में कोरोना की सबसे प्रभावी वैक्सीन
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लंबे समय पर टी-कोशिकाएं बनी रह सकती हैं प्रभावी
स्विट्जरलैंड के कैंटोनल अस्पताल में शोधकर्ता प्रोफेसर बुर्कहार्ड लुडविग कहते हैं, अध्ययन के दौरान हमने पाया है कि यह टी-कोशिकाएं काफी प्रभावशाली भी हो सकती हैं, जो कोरोना के अत्यधिक संक्रामक वैरिएंट्स से भी सुरक्षा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। अध्ययन के निष्कर्षों के अनुसार, एडेनोवायरस में लंबे समय तक जीवित रहने वाली कोशिकाओं के निर्माण करने की भी क्षमता है। इन कोशिकाओं को फाइब्रोब्लास्टिक रेटिकुलर सेल भी कहा जाता है, जो टी-सेल के रूप में कार्य करती हैं। जानकारी के लिए बता दें कि टी-कोशिकाओं को किलर कोशिकाओं के रूप में भी जाना जाता है जो शरीर में संक्रमित कोशिकाओं को ढूंढकर उन्हें नष्ट कर देती हैं, इससे संक्रमण पूरे शरीर में नहीं फैलने पाता है।



टी कोशिकाओं को बढ़ावा दे सकती है कोविशील्ड वैक्सीन
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दीर्घकालिक प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित होने से लाभ
इससे पहले के कुछ अध्ययनों में वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि एमआरएनए वैक्सीन फाइजर और मॉडर्न की तुलना में ऑक्सफोर्ड -एस्ट्राजेनेका वैक्सीन टी-कोशिकाओं को उत्पन्न करने में अधिक प्रभावी हो सकते हैं। ऑक्सफोर्ड के नफिल्ड डिपार्टमेंट ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर पॉल क्लेनरमैन ने कहते हैं, दुनिया भर में लाखों लोगों को एडेनोवायरस के टीके लगाए जा चुके हैं। 
इन टीकों का मुख्य लक्ष्य एंटीबॉडी और टी-कोशिकाओं दोनों का उपयोग करके दीर्घकालिक प्रतिरक्षा प्रणाली को विकसित करना है। इस अध्ययन के आधार पर यह कहा जा सकता है कि दुनिया की एक बड़ी आबादी में कोरोना वायरस के खिलाफ लाइफ-लॉग इम्यूनिटी विकसित हो सकती है।
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कोविशील्ड वैक्सीन के देखे गए फायदे
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डेल्टा वैरिएंट्स के खिलाफ भी पाया गया असरदार
दुनियाभार के लिए चिंता का कारण बने डेल्टा वैरिएंट्स पर भी ऑक्सफोर्ड -एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के प्रभावी होने का दावा किया जा रहा है। पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड के वैज्ञानिकों के मुताबिक इस वैक्सीन की दो खुराक डेल्टा वैरिएंट से 92 फीसदी तक सुरक्षा दे सकती है। वैज्ञानिकों ने बताया कि कोरोना वायरस के अल्फा और डेल्टा वैरिएंट के सिम्टोमैटिक मामलों के खिलाफ इस वैक्सीन की प्रभावशीलता क्रमशः 74 और 64 फीसदी हो सकती है। 

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स्रोत और संदर्भ: 
JAB 'FOR LIFE' AstraZeneca Covid vaccine gives powerful protection that may last a lifetime, study finds

अस्वीकरण नोट: यह लेख ऑक्सफोर्ड सहित कई अन्य विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। संबंधित विषय के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए अपने चिकित्सक से सलाह लें। 
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