सावधान: ऐसे लोगों को एक साथ कोविड के दो वैरिएंट्स से संक्रमण का खतरा अधिक, जानिए कैसे रहें सुरक्षित?

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Mon, 19 Jul 2021 01:59 PM IST
एक साथ कोरोना के दो वैरिएंट से संक्रमण का खतरा (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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कोरोना वायरस में हो रहे म्यूटेशन खतरनाक रूप लेते जा रहे हैं। कई अध्ययनों में बताया जा रहा है कि वायरस के नए स्ट्रेन पहली की तुलना में कई गुना तक संक्रामक और घातक हो सकते हैं। उदाहरण के लिए कोरोना के डेल्टा और लैम्बडा वैरिएंट को कोरोना के मूल वायरस से अत्यधिक संक्रामक माना जा रहा है, वैज्ञानिक यहां तक भी कह रहे हैं कि यह नए म्यूटेटेड वैरिएंट्स शरीर में बनी एंटीबॉडीज को भी आसानी से चकमा दे सकते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर किसी को एक साथ कोविड के दो वैरिएंट्स का संक्रमण हो जाए तो इसे कितना खतरनाक माना जा सकता है? आइए इस बारे में जानते हैं।
हाल ही में बेल्जियम की एक वृद्ध महिला को डॉक्टरों ने कोरोना के दो वैरिएंट्स से संक्रमित होने की पुष्टि की। महिला को कोरोना के अल्फा और बीटा वैरिएंट से संक्रमित पाया गया था। हालांकि बाद में महिला का मृत्यु हो गई। इसके अलावा ब्राजील के वैज्ञानिकों ने अध्ययनों के दौरान दो कोरोना संक्रमित लोगों में एक समय में ही जीनोमिक रूप से वायरस के दो उपभेदों की पुष्टि की है।  ऐसे में सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि आखिर इस तरह से दो वैरिएंट्स से एक साथ संक्रमित होने का खतरा किन लोगों में अधिक है और यह स्थिति कितनी घातक हो सकती है?
कोरोना का नए वैरिएंट्स हो सकते हैं काफी खतरनाक
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कोरोना के को-इंफेक्शन का खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि वैसे तो इस तरह के मामले काफी 'दुर्लभ' हैं, लेकिन इनकी संभावना से नकारा नहीं जा सकता है। श्वसन संक्रमण के मामलों में को-इंफेक्शन (एक समय में दो स्ट्रेनों का संक्रमण) का खतरा अतिरिक्त जोखिम वाली आबादी में अधिक रहता है। इन्फ्लूएंजा और हेपेटाइटिस-सी जैसे आरएनए वायरस आमतौर पर म्यूटेट होते रहते हैं और इनके भी को-इंफेक्शन का भी खतरा रहता है। कोरोना वायरस के मामलों में भी ऐसा हो सकता है। अधिक संक्रमण वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
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कोरोना के म्यूटेटेड वैरिएंट्स ने बढ़ा दिए हैं कई तरह के खतरे
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वायरस के जीनोमिक परीक्षण की आवश्यकता
वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोनावायरस रि-कॉम्बीनेशन नामक एक प्रक्रिया के द्वारा अपने आनुवंशिक अनुक्रम में बड़े बदलाव कर सकते हैं। जब दो वायरस एक ही कोशिका को संक्रमित करते हैं, तो वे अपने जीनोम के बड़े हिस्से को एक दूसरे के साथ स्वैप करके इससे वह पूरी तरह से नया अनुक्रम बना लेते हैं। चूंकि हालिया दिनों में इस तरह के कुछ मामले सामने आए हैं ऐसे में वायरस के जीनोमिक परीक्षण का अधिक आवश्यकता हो सकती है जिससे स्थिति को और गंभीरता से समझा जा सके।
कोरोना के तमाम खतरों से सुरक्षा देगी वैक्सीन
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किन लोगों में को-इंफेक्शन का खतरा हो सकता है अधिक?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कोरोना वायरस के मामले में को-इंफेक्शन के जोखिम कारकों को समझने के लिए फिलहाल और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है। बेल्जियम में को-इंफेक्शन के कारण जिस महिला की मौत हुई उसका टीकाकरण नहीं हुआ था। इस आधार पर वैज्ञानिकों का मानना है कि जिन लोगों का टीकाकरण हो चुका है, उन्हें इस तरह के मामलों से फिलहाल सुरक्षित माना जा सकता है। हालांकि जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली पहले से ही कमजोर है या उन्हें पहले से ही कई तरह की बीमारियां हैं, उनमें भी को-इंफेक्शन का जोखिम अधिक हो सकता है। को-इंफेक्शन के खतरों को समझने के लिए अभी और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है।
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डबल मास्किंग मौजूदा परिस्थितियों की जरूरत (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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ऐसे किया जा सकता है बचाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, विश्व स्तर पर टीकाकरण की रफ्तार में कमी और कोरोनावायरस का निरंतर बढ़ता संक्रमण इस तरह के खतरे को बढ़ा सकते हैं। जिस तरह से कोरोना के नए म्यूटेशन खतरनाक रूप लेते जा रहे हैं आने वाले समय में हमें अधिक प्रभावी बूस्टर शॉट्स की आवश्यकता हो सकती है। को-इंफेक्शन से सुरक्षित रहने के लिए सभी लोगों को नियमित रूप से कोरोना से बचाव के नियमों को पालन में लाते रहना चाहिए। मास्क, विशेष रूप से डबल मास्किंग मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए बहुत आवश्यक माना जा सकता है। फिलहाल कोरोना से सुरक्षा का एकमात्र उपाय है-बचाव।


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नोट: यह लेख तमाम मीडिया रिपोर्टस में छपे विशेषज्ञों की राय के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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