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Shani Dev: शनिदेव इन तीन देवताओं के भक्तों को कभी नहीं देते कष्ट,साढ़ेसाती होने पर नहीं करते हैं ज्यादा परेशान

धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 07 Dec 2022 12:55 PM IST
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वैदिक ज्योतिष शास्त्र में जितना महत्व शनिदेव है उतना ही महत्व धार्मिक नजरिए से इनकी पूजा करने का है। शनिदेव को न्याय और कर्मफल दाता माना गया है। यह लोगों को उनके बुरे कर्मों पर दण्ड देने के साथ शुभ फल भी प्रदान करते हैं। शनि के प्रकोप से हर कोई डर जाता है क्योंकि शनि की अशुभ द्दष्टि जिन पर पड़ जाती है उनको जीवन में कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है। अगर शनि देव की पूजा की जाए तो वे भक्तों के कष्टों को कुछ कम कर देते हैं। शनिदोष से बचने के लिए लोग शनिदेव के अलावा अगर तीन देवतों की पूजा करते हें शनि की कृपा प्राप्त होती है। 
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धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनिदेव हर एक किसी के अच्छे और बुरे कर्मो का खाता बना कर रखते हैं। जो उनको कर्मों के आधार पर ही फल देते हैं। शुभ कर्म करने पर शुभ फल जबकि बुरे कर्म करने पर दण्ड भी देते हैं। इसी कारण इन्हें कर्मफलदाता, न्यायाधीश और दण्डाधिकारी कहा जाता है। 

वैदिक ज्योतिष में शनि का चाल का विशेष महत्व होता है। शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं। यह किसी एक राशि से दूसरी राशि में जाने के लिए ढाई वर्षों का समय लेते हैं।  शनि अभी मकर राशि में हैं और अगले वर्ष 17 जनवरी 2023 को कुंभ राशि मे प्रवेश कर जाएंगे। शनि के कुंभ राशि में प्रवेश करने से मकर, कुंभ और मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती रहेगी। मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण शुरू हो जाएगा जबकि धनु राशि से साढ़ेसाती खत्म हो जाएगी। वहीं शनि के कुंभ राशि में प्रवेश करने से कर्क और वृश्चिक राशि पर ढैय्या शुरू हो जाएगी। जबकि मिथुन और तुला राशि वालों को ढैय्या से मुक्ति मिल जाएगी।
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shani dev never gave unauspicious result who devotee of hanuman ji shri krishna and shiv
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शनिदेव इन देवों के हैं परम भक्त
शनिदेव भगवान कृष्ण के परम भक्त माने जाते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार जब शनिदेव ने भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप किया था। तब भगवान कृष्ण ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर कोयल के रूप में उनको दर्शन दिया था। ऐसी मान्यता है जो लोग भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त होते हैं शनिदेव उनको कभी कष्ट नहीं देते हैं।  
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शनिदेव भगवान शिव के भी परम भक्त हैं। शनिदेव का अपने पिता सूर्यदेव से हमेशा बैर रहा है क्योंकि सूर्यदेव ने उनकी माता छाया का अपमान किया था। तभ भगवान शनि ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए  कठोर तपस्या की थी। तब भगवान भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर उन्हें सभी ग्रहों का न्यायाधीश नियुक्ति किया था। जो लोग भगवान शिव की पूजा करते हैं उनके ऊपर शनि की अशुभ द्दष्टि नहीं पड़ती है।
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शनिदेव हनुमान जी के भी भक्त हैं। हनुमानजी ने शनिदेव को रावण के कैद से उन्हे मुक्त करवाया था। इसके अलावा जब शनिदेव को अपनी शक्ति का बहुत अहंकार हो गया था तब हनुमानजी ने ही उनके अहंकार को नष्ट किया था। तभी से ऐसी मान्यता है जो लोग हनुमान जी की नियमित पूजा-आराधना करते हैं शनिदेव उन्हें कभी परेशान नहीं करते हैं। 
 
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