Vijaya Ekadashi 2021 : इस दिन है विजया एकादशी, जानें महत्व, तिथि-शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Fri, 26 Feb 2021 06:34 PM IST
विजया एकादशी 2021 व्रत (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की ग्याहरवीं तिथि को विजया एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस बार विजया एकादशी 9 मार्च 2021 दिन मंगलवार को पड़ रही है। धर्म शास्त्रों में एकादशी व्रत की बहुत महिमा बताई गई है। एकादशी को सभी व्रतों में श्रेष्ठ बताया गया है। धार्मिक मान्यता अनुसार जो मनुष्य प्रत्येक एकादशी का व्रत करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से भगवान विष्णु की कृपा से व्यक्ति के जीवन की सभी समस्याओं का अंत होता है और उसे सुखों की प्राप्ति होती है। जानते हैं विजया एकादशी व्रत का महत्व, समय और पूजा विधि... 
विजया एकादशी 2021(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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विजया एकादशी का शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि आरंभ- 08 मार्च 2021 दिन सोमावर दोपहर 03 बजकर 44 मिनट से

एकादशी तिथि समाप्त- 09 मार्च 2021 दिन मंगलवार दोपहर 03 बजकर 02 मिनट पर 
 
एकादशी व्रत पारण समय-10 मार्च बुधवार को प्रात: 6 बजकर 36 मिनट से सुबह लेकर 08 बजकर 58 मिनट तक
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विजया एकादशी 2021(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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विजया एकादशी का महत्व
पद्म पुराण के अनुसार इस व्रत का वर्णन स्वयं भगवान शिव और नारद मुनि के द्वारा किया गया है। इस एकादशी के प्रभाव से मनुष्य के संपूर्ण पापों का नाश होता है। इसके साथ ही मान्यता है कि जो व्यक्ति इस व्रत को सच्चे हृदय, नियम और निष्ठा के साथ करता है, उसका पितृ दोष दूर होता है।
विजया एकादशी 2021(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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एकादशी व्रत पूजन विधि
हर एकादशी की तरह विजया एकादशी के व्रत का नियम भी दशमी तिथि से ही आरंभ हो जाता है। इसलिए एकादशी के एक दिन पहले दूसरे प्रहर के बाद रात्रि में भोजन नहीं करना चाहिए, ताकि आपके पेट में अन्न का अंश न रहे। 
 
  • एकादशी को प्रातः उठकर स्नानादि करने के पश्चात माता एकादशी और भगवान विष्णु का ध्यान देते हुए व्रत का संकल्प करें।
  • भगवान विष्णु के समक्ष धूप दीप प्रज्वलित करें।
  • विष्णु जी को चंदन का तिलक लगाकर पुष्प अर्पित करें।
  • पूजा संपन्न करके वहीं आसन पर बैठकर एकादशी व्रत का महातम्य पढ़ें या श्रवण करें। 
  • एकादशी के व्रत का पारण द्वादशी तिथि यानि एकादशी के अगले दिन किया जाता है। 
द्वादशी तिथि पर प्रातः उठकर स्नानादि करने के पश्चात पूजा करें और भोजन बनाकर किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को खिलाएं। दान दक्षिणा देकर उन्हें सम्मान के साथ विदा करें। पारण मुहूर्त में स्वयं भी व्रत का पारण करें।
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