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श्री पारस अस्पताल: क्लीनचिट देकर बचाई अपनी गर्दन, पैसे राजनीति के गठजोड़ से पंगु बना प्रशासन, पीड़ितों ने बयां किया 'दर्द'

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Mon, 21 Jun 2021 10:04 AM IST
श्री पारस अस्पताल आगरा
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श्री पारस अस्पताल में मॉकड्रिल मामले में प्रशासनिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद सबसे बड़ा धक्का पीड़ितों को लगा है। किसी ने अपनी पत्नी को खोया, तो किसी ने अपने पति को। किसी के सिर से पिता का साया उठ गया, तो किसी दुनिया संवरने से पहले ही उजड़ गई। वीडियो वायरल होने के बाद पीड़ितों को न्याय की उम्मीद थी, जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद पीड़ितों का कहना है कि अस्पताल को क्लीनचिट देकर प्रशासन ने अपनी गर्दन बचाई है। पैसे और राजनीति के गठजोड़ से प्रशासन पंगु हो गया। उन्हें भगवान की अदालत पर भरोसा है, ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती...

मधु नगर निवासी 65 वर्षीय नत्थीलाल को दोहरा आघात लगा है। 26 अप्रैल को श्री पारस में 60 वर्षीय पत्नी रामवती की मृत्यु हो गई। इसके नौ दिन बाद जवान बेटे की मौत हो गई। प्रशासनिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद रविवार को उन्होंने अपना आक्रोश जाहिर करते हुए कहा कि पैसे और राजनीति के गठजोड़ में प्रशासन पंगु हो गया है।
श्री पारस अस्पताल प्रकरण: 12वें मृतक के पिता
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मैंने नहीं किया कभी भरोसा
मैं प्रशासन और सरकार की बात पर कभी भरोसा नहीं करता। आम आदमी की कोई सुनवाई नहीं होती। राशन कार्ड, नाली के लिए सुनवाई नहीं होती तो इतने बड़ आदमी के खिलाफ क्या होता। 2020 में भी अस्पताल पर मुकदमा हुआ था। कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। फिर  उसकी सील भी खुल गई। दो-तीन महीने बाद ये सील भी खुल जाएगी। प्रशासन ने अपनी गर्दन बचाने के लिए क्लीनचिट दी है। भ्रष्टाचार हुआ है। जिसने अरबों रुपये कमाए हों, वो करोड़ों फूंक देगा। मुझे शुरू से ही भरोसा नहीं था। मेरी पत्नी से ज्यादा मुझे मेरे जवान बेटे का दुख है। बहू विधवा हो गई। उसके दो बच्चे हैं। बेटा ही घर का अकेला कमाने वाला था। - नत्थीलाल, मधु नगर
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श्री पारस अस्पताल
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मेरी मां की क्या गलती थी
मां मुन्नी देवी को 25 अप्रैल की रात 9.30 बजे भर्ती किया था। 26 अप्रैल सुबह चार बजे फोन आया ऑक्सीजन खत्म हो गई है। 12 बजे सिलिंडर इंतजाम किया। शाम चार बजे अस्पताल स्टाफ ने कहा, तुम्हारे मरीज को बचा नहीं सके। मेरी मां की क्या गलती थी जो उन्हें ऑक्सीजन बंद कर मार दिया। मुझे जांच रिपोर्ट से गहरा धक्का लगा है। चिकित्सक को इस कृत्य पर सजा मिलनी चाहिए थी। पैसे के दम पर फर्जी रिपोर्ट तैयार हो गई। एडीएम सिटी को हमने बयान दिया थे। हमारे बयानों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। - प्रियंका सिंह, दहतोरा
शिकायतकर्ता सौरभ और श्री पारस अस्पताल
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ऑक्सीजन बंद करने से हुई मौतें
मैंने अपनी पत्नी राधिका को 15 अप्रैल को भर्ती कराया था। 25 अप्रैल तक उसकी तबीयत में सुधार हो गया। एसपीओटू-80 था। डॉक्टर रूम में शिफ्ट करने की कह रहा था। 25 को ऑक्सीजन की कमी हो गई। 27 अप्रैल को सुबह साढ़े पांच बजे मुझे बताया कि तुम्हारा मरीज नहीं रहा। ऑक्सीजन बंद कर के मॉकड्रिल की गई। आईसीयू में क्या हो रहा है हमें कैसे पता चलता। पूरे मामले में निष्पक्ष जांच होती तो सच सामने आता। प्रशासन ने जांच निष्पक्ष नहीं की। जो बच सकते थे उन्हें भी अस्पताल ने मार दिया। - सौरभ अग्रवाल, राजा मंडी 
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श्री पारस अस्पताल: मुख्य दरवाजे पर तैनात पुलिसकर्मी
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तीन साल की नातिन रोज पूछती है... पापा कब आएंगे
मेरे दामाद कार्तिकेय लवानिया 32 साल के थे। 23 अप्रैल को शाम छह बजे भर्ती कराया था। 26 अप्रैल को अस्पताल की लापरवाही से उनकी मृत्यु हो गई। मेरी बेटी बहुत डिप्रेशन में है। उसकी भी तीन साल की बेटी है। जो रोज पूछती है पापा कब आएंगे। मेरे लिए खिलौने लाएंगे...। उसे अब कैसे समझाऊं मैं। एडीएम सिटी को बयान दर्ज कराए थे। जांच में लीपापोती हो गई। प्रशासन की जांच पर अब मैं क्या कहूं... पूरा शहर जानता है। ऑक्सीजन की कमी थी। अस्पताल में क्या हुआ था। मुझे तो अब भगवान का न्याय देखना है। उसकी लाठी में आवाज नहीं होती। - सुनील शर्मा, आवास विकास कॉलोनी
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