देश-दुनिया में गांव का बड़ा नाम: ...पर मुश्किल में लोगों की जान, यहां रिश्ता करने से कतराते हैं लोग, तस्वीरों में देखें मलकपुर के हालात

मुकेश पंवार, संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत Published by: कपिल kapil Updated Sat, 25 Dec 2021 07:11 PM IST
बागपत के मलकपुर गांव में जलभराव की समस्या। फोटो- राजदीप तोमर
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खेल की दुनिया में देश और दुनिया तक धाक जमाने वाले खिलाड़ियों के गांव मलकपुर में अब लोग रिश्ता करने से भी कतराने लगे हैं। बेटियां व बेटे जवान हो चुके हैं, लेकिन कोई रिश्ता लेकर जाना पसंद तक नहीं करता। जो रिश्ते तय हुए थे, वे टूटने की कगार पर हैं। क्योंकि गांव में लोग जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण जलभराव की विकराल समस्या से जूझ रहे हैं। गली में दो से तीन फीट गंदा पानी भरा होने के कारण लोगों को छतों से होकर गुजरना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि गंदगी के कारण गांव में बीमारी से कई लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों बीमार पड़े हैं। इसके बावजूद न तो ग्राम प्रधान इस ओर ध्यान दे रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधि। 

इनसे है मलकपुर की पहचान
अर्जुन अवार्डी सुभाष पहलवान, शौकेंद्र पहलवान, राजीव तोमर, अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी नितिन तोमर, अंतरराष्ट्रीय पहलवान संदीप तोमर के अलावा यश भारती, भारत केसरी व लक्ष्मीबाई अवार्डी महिला मल्ल अंशु तोमर के नाम से मलकपुर की पहचान है। इसके अलावा देश और प्रदेश स्तर पर यहां के कई खिलाड़ी नित नए मुकाम हासिल कर रहे हैं।
गांव में जलभराव की समस्या।
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जलभराव से परेशान है 100 परिवार
गांव की मोना पट्टी में जलभराव से एक नहीं दो नहीं बल्कि 100 घरों के लोग परेशान हैं। ग्रामीण बलजोर, प्रकाश, सूरजे, धर्मवीर, मंशी, दरियाव, चंद्र, धर्मवीर, कृष्ण, विजयपाल का कहना है कि अब तो रिश्तेदारों ने भी गांव में आना बंद कर दिया है। त्योहारों पर महिलाओं की कोथलियां भी आनी बंद हो गई है। बेटियां व बेटे जवान है, लेकिन कोई रिश्ता लेकर नहीं आता। करीब दस महीने पहले विपिन पुत्र ओमकार की शादी हुई थी, उस दौरान जलभराव की समस्या कम थी। मगर, अब गली में दो से तीन फीट गंदा पानी हर समय भरा रहता है। 
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गंदे पानी में निकलकर जाते किसान।
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छत के लिए नहीं, गलियां पार करने के लिए लकड़ी की सीढ़ियों का प्रयोग
गलियां गंदे पानी और कीचड़ से हमेशा भरी रहती है। हालात ऐसे है कि दूसरी गलियों में जाने के लिए सड़कों पर लकड़ी की सीढ़ियां, फट्टे आदि डालकर पार करना पड़ता है। 

ग्रामीण अरविंद, विक्की, भोपाल का कहना है कि स्कूली बच्चे, महिलाओं व बेटियों को या तो गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है या फिर एक-दूसरे के मकानों की छतों से। गली में आमने-सामने बने मकानों में आने के लिए लोगों को गली में सीढ़ियां डालकर जाना पड़ता है।
गांव में जलभराव की बड़ी समस्या।
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बीमारी ढेर, चिकित्सक भी मुंह रहे फेर
जलभराव से गांव में संक्रामक बीमारी फैल चुकी है। कई बीमार है तो कई असमय काल के गाल में समा चुके हैं। ग्रामीण विजयपाल और बलजोर ने बताया कि प्रीति, कुसुम, सुमन, मूर्ति, रवीन, शर्मिष्ठा आदि बीमार पड़े हैं, जबकि टीकाराम, सूरजमल, चरण सिंह व रामबीर की बीमारी से मौत हो चुकी है। 

हालात ऐसे है कि कोरोना काल में भी स्वास्थ्य विभाग व पशु पालन विभाग की टीम गांव में नहीं पहुंची। जिस कारण न तो लोगों को कोरोनारोधी वैक्सीन लगी है और न ही पशुओं को खुरपका-मुंहपका के टीके। इस संबंध में सीएचसी डॉ. विजय कुमार का कहना है कि घर-घर टीकाकरण चल रहा है, फिर भी स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में भेजी जाएगी।
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गंदे में पानी में निकलकर जाते बच्चे।
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तालाब से हटे कब्जा तो मिले स्थायी समाधान
जलभराव की समस्या का कारण गांव के तालाब पर अवैध कब्जा है। पूर्व में मोना पट्टी के घरों का सारा गंदा पानी तालाब में जाता था। वर्तमान में तालाब पर कब्जा हो गया। ऐसे में पानी निकासी तालाब में न होकर गलियों में भरना शुरू हो गया है। ऐसा नहीं है कि मोना पट्टी की जलभराव की समस्या का समाधान नहीं हो सकता। मगर, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ग्रामीणों को अपनी भूमिका सुनिश्चित करनी होगी। 

पूर्व प्रधान कृष्णपाल और पूर्व ग्राम सचिव रोहित तोमर बताते हैं कि पांच साल के कार्यकाल में तकरीबन डेढ़ लाख रुपये खर्च जलनिकासी में किए थे। गली में पानी निकालने के लिए पंप सेट खरीदा गया था, लेकिन अब फिर हालात ऐसे ही हो गए है। वर्तमान में यह पंप सेट झाड़ियों में पड़ा है और धूल फांक रहा है।
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