बढ़ते प्रदूषण में कवच बन रहे नानी-दादी के नुस्खे, आप भी जानें

यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 27 Nov 2018 11:14 AM IST

सार

- एलोपैथिक पद्धति के डाक्टर भी लिख रहे नुस्खों को
- तुलसी, शहद, आंवला, लहसुन हैं बड़े काम के
 
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विस्तार

प्रदूषण के माहौल में बच्चों को बीमारी से बचाने के लिए नानी-दादी के नुस्खे कारगर हैं। तुलसी, शहद, अदरक, दालचीनी, लहसुन आदि से तैयार आयुर्वेदिक और यूनानी पद्धति पर आधारित बुजुर्गों के ये नुस्खे प्रदूषण के दुष्प्रभाव को कम करने और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता के कवच को अधिक मजबूत करते हैं। बढ़ रहे प्रदूषण के मद्देनजर अब एलोपैथिक चिकित्सकों ने भी इन नुस्खों को बताना शुरू कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन नानी-दादी के इन नुस्खों की संस्तुति कर चुका है।
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पूर्व महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं मेडिकल कालेज के पूर्व बालरोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर वीएन त्रिपाठी ने बताया कि प्रदूषण के कारण छोटे बच्चों में सीने की जकड़न, सांस के रोग, जल्दी-जल्दी जुकाम-बुखार, निमोनिया, ब्रोंकाइटिस आदि रोग होने लगे हैं। प्रदूषण का घनत्व नीचे अधिक रहता है। इससे बच्चे तेजी से प्रभावित होते हैं, उनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है। प्रदूषण का खतरा बच्चों में तीन गुना अधिक होता है। ऐसी स्थिति में आंवला, लहसुन, दालचीनी, तुलसी आदि के नुस्खे प्रदूषण के दुष्प्रभाव को कम करते हैं। रोगियों को इन नुस्खों का इस्तेमाल भी कराया जा रहा है।


उन्होंने बताया कि बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इनके इस्तेमाल की संस्तुति कर चुका है। सीने के जकड़न में बच्चों को टेबलेट देने के साथ ही सरसों के तेल में लहसुन कड़काकर हल्के हाथ से मालिश के लिए भी कहा जाता है। इससे जल्दी आराम मिलता है। आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. अर्पिता राज ने बताया कि शहद, जायफल आदि से बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इससे प्रदूषण का दुष्प्रभाव कम होता है। पेट दर्द में हींग, खांसी में शहद, जुकाम, बुखार में तुलसी आदि अधिक कारगर हैं।

 

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सामान्य नुस्खे
- खांसी आने पर बच्चे को शहद चटा दें या ताजा पानी में मिलाकर दें
- वायरल संक्रमण में तुलसी पीस कर शहद में मिला कर दें
- बड़े बच्चों को तुलसी की चाय बनाकर दें
- प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आंवला उबालकर खिलाएं
- तुलसी का रस पिलाने से भी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है
- एंटी आक्सीडेंट और विटामिन सी के लिए कच्चा आंवला खाएं
- सांस की एलर्जी के लिए गिलोय, हल्दी का इस्तेमाल करें
(बच्चों की उम्र के हिसाब से जड़ी-बूटी का मात्रा निर्भर करेगी)  
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