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दर्दनाक मंजर: जिगर के टुकड़े को टुकड़ों में देख कांप उठा पिता का कलेजा, मुंह में सिर लेकर दौड़ता रहा कुत्ता

अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Wed, 07 Dec 2022 01:04 PM IST
दिल्ली पुलिस ने बच्चे का शव बरामद किया।
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यह मंजर रूह कंपा देने वाला था। मेरठ के नंगला ईसा गांव में जंगल में हत्या कर फेंके गए मासूम बच्चे मानव के शव को टुकड़ों में देखकर पिता हीरालाल का कलेजा कांप उठा। क्षत-विक्षत शव का दृश्य देखना मुश्किल हो रहा था। कुत्ते शव नोंच रहे थे। एक कुत्ता सिर को मुंह में लेकर जंगल में करीब 30 मिनट तक दौड़ता रहा। 

वहीं देर से पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से खूंखार कुत्ते से सिर को छुड़वाया। लोगों में इस बात को लेकर आक्रोश था कि पुलिस समय रहते बच्चे का शव तक सुरक्षित नहीं रख पाई। पोस्टमार्टम स्थल पर भी शव देख हीरालाल कई बार बेसुध हो गए।
आरोपी युवक।
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मंगलवार को मवाना रोड पर सड़क किनारे ग्राम प्रधान युद्धवीर सिंह के ईंख के खेत में कुछ लोगों ने कुत्तों का झुंड देखा। कुत्ते बच्चे के शव को नोंच रहे थे। ग्रामीणों ने यह मंजर देखा तो कुत्तों को दौड़ाया, तभी एक कुत्ता बालक के सिर को मुंह में दबाकर जंगल की तरफ भाग गया। सूचना पर इंस्पेक्टर इंचौली पुलिस टीम के साथ पहुंचे। पुलिस और ग्रामीण जंगल में बालक का सिर को ढूंढने में लग गए। करीब 30 मिनट बाद सिर कुत्ते से छुड़ाया गया। उसका एक हाथ भी गायब था। वह भी बहुत बाद में मिला। शव की यह दुर्दशा देख हर कोई हैरान था। इस हालत में शव को पहचानना भी मुश्किल हो रहा था। 
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जांच करती पुलिस।
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वहीं, दिल्ली पुलिस आरोपी दीपक के साथ इंचौली थाने पहुंची थी। बाद में दीपक की निशानदेही पर शव बरामद किया गया था। दीपक ने बताया कि वह मासूम को लेकर रिश्तेदार के पास मेरठ आया था। तीन दिसंबर को यहां मासूम की गला दबाकर हत्या की और फिर शव खेत में फेंक दिया।
जांच करती पुलिस।
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घर के बाहर खेलते समय अगवा किया था
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, मासूम परिवार के साथ प्रीत विहार की झुग्गियों में रहता था। परिवार में माता-पिता के अलावा दो बहनें हैं। पिता रिक्शा चालक हैं, जबकि मां घरों में सफाई करती हैं। 30 नवंबर की शाम को मानव घर के बाहर खेल रहा था। तभी दीपक उसे बहलाकर ले गया। इसके बाद वह नहीं लौटा। बाद में पकड़े गए दीपक ने बताया था कि उसने मासूम की हत्या कर शव को इंचौली के गांव नंगली-ईसा में फेंक दिया है।
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आरोपी को ले जाती पुलिस।
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पुलिस गंभीर होती तो शायद बच जाती जान
दो वाहनों में एसीपी हीरालाल, विष्णु यादव, धर्मेंद्र सहित सात पुलिसकर्मी बच्चे के पिता के साथ यहां पहुंचे। शव देखने के बाद पिता ने कहा कि यदि पुलिस पहले से गंभीर होती तो शायद बच्चे की जान बच जाती। बच्चा 30 नवंबर से लापता था। आरोपी ने तीन दिसंबर को मारना कबूल किया है। तीन दिन दिल्ली पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं है। आरोपी का रिश्तेदार भी नहीं पकड़ा।
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