बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP
sun cinema

सुन सिनेमा

Entertainment

सुन सिनेमा शो में आपको सुनने को मिलती हैं मनोरंजन जगत की दिलचस्प कहानियां

सुन सिनेमा: जब पान की दुकान पर खड़े ओम प्रकाश ने गरीब विधवा की बेटी का हाथ थाम लिया

X

सभी 13 एपिसोड

अभिनेताओं और अभिनेत्रियों के अलावा चरित्र अभिनेताओं ने भी सिने जगत में खूब पहचान बनाई है। ऐसे ही एक कलाकार थे ओम प्रकाश। एक दौर वो भी था जब हर दूसरी फिल्म में ओम प्रकाश नज़र आते थे। उन्होंने कई हिट फिल्मों में अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने हर तरह के किरदार निभाए। कभी बेहद संजीदा रोल किए तो कभी दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोट-पोट कर दिया। वैसे उनको फिल्मों में काम उनके मसखरेपन की वजह से मिला था।

आपने उनके बारे में काफी सुना होगा लेकिन आज मैं आपको उनकी अधूरी प्रेम कहानी और राह चलते शादी हो जाने का वाकया बताउंगा। ओम प्रकाश का जन्म 19 दिसंबर, 1919 को विभाजन से पहले भारत के लाहौर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उनका पूरा नाम ओम प्रकाश छिब्बर था। ओम प्रकाश के पिता एक अमीर किसान हुआ करते थे।उनके पास काफी जमीन थी जिसकी देखरेख वो खुद किया करते थे। लाहौर और जम्मू जैसे क्षेत्र में उस दौर में उनके कई बड़े बंगले भी थे, लेकिन ओम को दौलत का मोह कभी नहीं रहा। उनका मन हमेशा से अभिनय के लिए धड़कता था। 

दोस्तों आज की कहानी है ट्रैजेडी किंग दिलीप कुमार और अपने जमाने की मशहूर अदाकारा सायरा बानो की...बताएंगे कैसे जुबली कुमार यानि राजेंद्र कुमार से सायरा बानो का अफेयर चला और किस तरह सायरा की मां नसीम बानो राजेंद्र कुमार और अपनी बेटी के बीच दिलीप कुमार को लेकर आईं....भले ही शादी के बाद सायरा ये कहने लगीं कि यूसुफ साहब यानि दिलीप कुमार उन्हें कायनात से तोहफे में मिले हैं लेकिन उनकी पहली मोहब्बत कोई और था....दरअसल दिलीप साहब तो मधुबाला के प्यार में इस कदर दीवाने थे कि उन्हें किसी दूसरी खातून के बारे में सोचना भी गंवारा नहीं था...लेकिन उनके ख्वाब देखने वाली खातूनों में सायरा बानो भी एक थीं...सायरा बानो गुजरे जमाने की अदाकारा नसीम बानो की बेटी हैं...हालांकि सायरा की पढ़ाई-लिखाई लंदन में हुई लेकिन उन्होंने मां के नक्शे कदम पर चलते हुए फिल्मों में अभिनय को अपने करियर के तौर पर चुना...सायरा की दिली तमन्ना था कि दिलीप साहब उनके साथ किसी फिल्म में काम करें...वहीं दिलीप कुमार अक्सर उनके साथ फिल्मों में काम करने से बचते थे....उन्हें लगता था कि 21 साल छोटी सायरा के सामने वो बहुत बड़े लगेंगे और जिस लड़की को बचपन से बड़ा होते हुए देखा है उसके हीरो वह कैसे हो सकते हैं....खैर बाद में सायरा और दिलीप साहब की कई फिल्में आईं...अब चलते हैं दिलीप साहब और सायरा की शादी की कहानी पर...कैसे अचानक दोनों की शादी हो गई...

मजरूह सुल्तानपुरी एक ऐसे शायर थे जिन्होंने कभी भी फिल्मों के लिए काम करने के बारे में नहीं सोचा और जब काम करना शुरू किया तो हिंदी सिनेमा के संगीत का एक अलहदा इतिहास रच डाला। हिंदी सिनेमा की मशहूर शख्सियतों में गिने जाने वाले मजरूह ने अपने कलामों और गीतों से लगभग चार दशक तक लोगों के दिलों पर राज किया।

मजरूह का जन्म 1 अक्टूबर 1919 को आज़मगढ़ के निज़ामाबाद में हुआ था। मजरूह का असली नाम असरारुल हसन खान था। उनके पिता पुलिस में थे। मजरूह के पिता नहीं चाहते थे कि वह इंग्लिश मीडियम में पढ़ें और उन्हें मदरसे पढ़ने के लिए भेज दिया गया।यहां उन्होंने अरबी और फारसी जबान सीखी। हालांकि, फु़टबॉल खेलने को लेकर हुए किसी मसले की वजह से वो मदरसे की पढ़ाई पूरी न कर सके।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से आलिम बनने के बाद वह लखनऊ पहुंचे यहां उन्होंने यूनानी चिकित्सा पद्धति सीखी और हकीम बन गए। जब उन्होंने इश्क़ का हकीम होने यानी की मुकम्मल शायर होने का फैसला किया, तो जिगर मुरादाबादी के शागिर्द हो गए। कहा जाता है कि जिगर मुरादाबादी न होते तो शायद मजरूह सुल्तानपुरी फ़िल्म गीतकार न होते और महज एक शायर होते।

आपने सदाबहार अभिनेता और अभिनेत्रियों के बारे में तो सुना होगा लेकिन हम आज बात करेंगे सदाबहार खलनायक की..एक ऐसा खलनायक जिसने परदे पर सबसे ज्यादा बार नारद मुनि का किरदार निभाया...जिसकी संवाद अदायगी से ही एक अलग तरह की मक्कारी झलकती थी...जी हां, हम बात कर रहे हैं हिंदी सिनेमा के मशहूर खलनायकों में शुमार रहे जीवन की...छरहरी काया, लंबे कद और डायलॉग बोलने के अपने खास अंदाज से जीवन ने हिंदी सिनेमा में ऐसी छाप छोड़ी कि नई पीढ़ी के कलाकार उनकी नकल करते नजर आते हैं...उनकी जुबान से निकलने वाले डायलॉग उनके चेहरे के हावभाव से होकर जब गुजरते थे तो देखने वाले सिर्फ नफरत की नजर से देखते थे...और यही वो कलाकारी थी जो उनके अभिनय की एक अलग पहचान बन गई।

सुरैया...जिनकी अदाकारी में नज़ाकत और गायिकी में नफ़ासत को दुनिया आज भी नहीं भूली है। सुरैया को मलिका-ए-तरन्नुम, मलिका-ए-हुस्न, और मलिका-ए-अदाकारी के खिताबों से नवाजा गया। वो एक ऐसी गायिका थीं, जिनको सुनकर लाखों दिलों की धड़कनें थम जाया करती थीं....

दोस्तों आज हम बात करेंगे बॉलीवुड के मशहूर विलेन रहे केएन सिंह के बारे में...जी हां..वही केएन सिंह जिनके बदन पर ओवर कोट,मुंह में पाइप और सिर पर हैट लगी होती थी...

अभिनेता प्रेमनाथ की पकड़ सिर्फ फिल्मों तक ही सीमित नहीं थी। उनकी साहित्य और संगीत पर पकड़ भी अच्छी थी। उनकी बेहिसाब शख्सियत को देखकर ही अभिनेत्री मुधुबाला भी उनके प्यार में दीवानी हो गई थीं। 

शशि कपूर और शबाना आजमी के बीच क्या था रिश्ता?

श्रीदेवी का जया प्रदा के साथ मनमुटाव था।  दोनों हमउम्र थीं और टॉप की हीरोइनें थीं। दोनों सार्वजनिक तौर पर भी एक दूसरे से बात नहीं करती थीं।

एक कुत्ते ने जीता था सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पहला ऑस्कर 

आवाज

Election
  • Downloads

Follow Us