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पहले पाकिस्तानी हीरो थे दिलीप कुमार के भाई नासिर खान, अभिनय छोड़ करने लगे थे किसानी

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दोस्तों आप महान अभिनेता दिलीप कुमार से तो वाकिफ होंगे लेकिन क्या आप उनके भाई नासिर खान को जानते हैं जो पाकिस्तानी फिल्मों के पहले हीरो कहलाते थे। उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी काफी काम किया लेकिन अपने भाई दिलीप कुमार की तरह नाम नहीं कमा पाए। नासिर खान के बेटे अय्यूब खान हैं जो कई बॉलीवुड फिल्मों में नजर आ चुके हैं। आइए जानते हैं नासिर खान की जिंदगी के बारे में....

दरअसल 'तेरे नाम' तमिल की एक फिल्म सेतु का रीमेक थी। इसके राइट्स रामगोपाल वर्मा ने खरीदे थे और अनुराग इसे लिख रहे थे। फिल्म कोई मेरे दिल से पूछे देखने के बाद राम गोपाल वर्मा ने संजय कपूर को साइन कर लिया। दक्षिण के मशहूर निर्देश ई निवास फिल्म का निर्देशन करने वाले थे। लेकिन ई.निवास के दूसरी फिल्मों में व्यस्त रहने के कारण फिल्म में महीनों की देरी हो गई। इसके बाद रामू मूल फिल्म सेतु के लेखक और निर्देशक बाला को फिल्म का निर्देशन करने के लिए ले आए। 

नासिर हुसैन ने विजय आनंद से तीसरी मंजिल को निर्देशित करने का अनुरोध किया और बहारों के सपने की पेशकश की, लेकिन ये साफ कर दिया कि तीसरी मंजिल में अब देव आनंद नहीं होंगे...

दोस्तों हम जो फिल्म देखते हैं एक तो वो कहानी होती है...दूसरी कहानी होती है पर्दे के पीछे की...फिल्म को बनाने के दौरान अभिनेता-अभिनेत्री...डायरेक्टर-प्रोड्यूसर के किस्से भी खूब मशहूर होते हैं...ऐसा ही एक किस्सा है हेमा मालिनी और मनोज कुमार का...

दोस्तों मैं हर रोज किसी फिल्म, अभिनेता या अभिनेत्री की बात करता हूं लेकिन आज बात होगी एक महान संगीतकार की...एक ऐसे संगीतकार की जिसने कभी भी संगीत से समझौता नहीं किया...संगीत के लिए धन-दौलत ठुकरा दी...जी हां...हम बात कर रहे हैं मशहूर ओ मारूफ संगीतकार नौशाद की...नौशाद फिल्मों की संख्या से ज्यादा संगीत को तरजीह देते थे। 

कई कलाकार फिल्मों में अपनी अनोखी अदाकारी से अविस्मरणीय छाप छोड़ते हैं। अपने खास अंदाज और डायलॉग डिलीवरी से उन्हें आज भी अलग पहचान हासिल है। इन्हीं में एक थे सबको हंसाने वाले उत्पल दत्त। उत्पल दत्त ने जब कॉमेडी की तो दर्शक हंस-हंसकर लोटपोट हो गए और जब खलनायिकी की तो लोगों में खौफ पैदा कर दिया।  

आज बात करेंगे मधुबाला की...क्या आप जानते हैं कि हिंदी सिनेमा की सबसे खूबसूरत अभिनेत्री मानी जाने वाली मधुबाला को भी फिल्म पाने के लिए स्क्रीन टेस्ट देना पड़ा था... यह बात सोच कर भी ताज्जुब होता है। मधुबाला ने बाल कलाकार के रूप में कैरियर शुरू किया था और जब वह हीरोइन बनने को तैयार हुईं तो हर कोई उनका मुरीद नहीं था। वह मात्र 16 साल की थीं और निर्देशक कमाल अमरोही की उन पर नजर पड़ी। कमाल उन दिनों इंडस्ट्री में लेखक के तौर पर स्थापित थे और निर्देशक के रूप में अपनी पहली फिल्म 'महल' (1949) बनाने की तैयारी कर रहे थे।

 इंडस्ट्री में आने से पहले मैक मोहन अपने स्टाइल और कपड़ों को लेकर खूब मशहूर थे। लोग अक्सर उन्हें 'कड़क राम' कहते थे क्योंकि उनके कपड़ों की क्रीज कभी नहीं टूटती थी...उन्हें अच्छी तरह से इस्त्री किया जाता था और पूरी तरह से फिट होते थे। उनका स्टाइल सेंस स्क्रीन पर भी झलकता था और उनकी फिल्मों में उनके लुक्स में उनका बहुत बड़ा योगदान था।

फिल्म नाम से पहले संजय दत्त ने अपने पांच साल के करियर में अधिकांश फ्लॉप फिल्में की थीं, उनके हिस्से में सिर्फ रॉकी और विधाता हिट फिल्में थीं, नाम ने उन्हें एक नायक के तौर पर फिर बॉलीवुड में खड़ा कर दिया...
 

दोस्तों आज हम बात करेंगे बॉलीवुड के मशहूर विलेन रहे केएन सिंह के बारे में...जी हां..वही केएन सिंह जिनके बदन पर ओवर कोट,मुंह में पाइप और सिर पर हैट लगी होती थी...

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