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जब सलमान को छाती पर बाल उगाने की सलाह देने पर अनुराग कश्यप से छिन गई फिल्म

3 October 2022

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दरअसल 'तेरे नाम' तमिल की एक फिल्म सेतु का रीमेक थी। इसके राइट्स रामगोपाल वर्मा ने खरीदे थे और अनुराग इसे लिख रहे थे। फिल्म कोई मेरे दिल से पूछे देखने के बाद राम गोपाल वर्मा ने संजय कपूर को साइन कर लिया। दक्षिण के मशहूर निर्देश ई निवास फिल्म का निर्देशन करने वाले थे। लेकिन ई.निवास के दूसरी फिल्मों में व्यस्त रहने के कारण फिल्म में महीनों की देरी हो गई। इसके बाद रामू मूल फिल्म सेतु के लेखक और निर्देशक बाला को फिल्म का निर्देशन करने के लिए ले आए। 

जब सलमान को छाती पर बाल उगाने की सलाह देने पर अनुराग कश्यप से छिन गई फिल्म

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दोस्तों जिस तरह से हिंदी सिनेमा में नायकों ने नाम कमाया है उसी तरह एक से बढ़कर एक दिग्गज खलनायकों ने भी दर्शकों के बीच पहचान बनाई है...प्रेम चोपड़ा उन्हीं में से एक हैं...वह भी बॉलीवुड के उन टॉप के कलाकारों में से एक हैं जिन्होंने विलेन के किरदार से खूब सुर्खियां बटोरीं...फिल्मों में उनके डायलॉग्स भी काफी मशहूर रहे हैं...दिग्गज अभिनेता प्रेम चोपड़ा का जन्म 23 सितंबर 1935 को लाहौर में हुआ था...ये तो आप सब जानते हैं कि उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में बंगाल-उड़ीसा में अखबार भी बेचा है...एक्टिंग का शौक था तो बंबई आ गए और फिल्मों में संघर्ष के साथ-साथ एक नामी अखबार में काम करने लगे...प्रेम चोपड़ा को पहला मौका 1960 में आई फिल्म मुड़-मुड़के ना देख में मिला...इसमें हीरो भारत भूषण थे...इसी साल उन्होंने एक पंजाबी फिल्म चौधरी करनैल सिंह भी की जिसे राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था...लेकिन उनकी नजर हिंदी फिल्मों पर ही टिकी थी...उनके खलनायक बनने का किस्सा भी दिलचस्प है....

दोस्तों अगर हम आज की बॉलीवुड फिल्मों की बात करें तो कहानी में मुख्यता दो किरदार ही केंद्र में नजर आते हैं और पूरी फिल्म उन्हीं के इर्द-गिर्द चक्कर खाती दिखाई पड़ती है। बाकी सारे किरदार साइड कैरेक्टर मालूम पड़ते हैं। लेकिन हम फिल्मों की किताब के थोड़े पन्ने उलटते हैं और आज से कुछ साल पीछे नजर दौड़ाएं तो कई ऐसी कहानियां मिलेंगी जहां लीड कैरेक्टर के अलावा अन्य किरदार भी अहम हुआ करते थे।

सुरैया...जिनकी अदाकारी में नज़ाकत और गायिकी में नफ़ासत को दुनिया आज भी नहीं भूली है। सुरैया को मलिका-ए-तरन्नुम, मलिका-ए-हुस्न, और मलिका-ए-अदाकारी के खिताबों से नवाजा गया। वो एक ऐसी गायिका थीं, जिनको सुनकर लाखों दिलों की धड़कनें थम जाया करती थीं....

अभिनेताओं और अभिनेत्रियों के अलावा चरित्र अभिनेताओं ने भी सिने जगत में खूब पहचान बनाई है। ऐसे ही एक कलाकार थे ओम प्रकाश। एक दौर वो भी था जब हर दूसरी फिल्म में ओम प्रकाश नज़र आते थे। उन्होंने कई हिट फिल्मों में अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने हर तरह के किरदार निभाए। कभी बेहद संजीदा रोल किए तो कभी दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोट-पोट कर दिया। वैसे उनको फिल्मों में काम उनके मसखरेपन की वजह से मिला था।

आपने उनके बारे में काफी सुना होगा लेकिन आज मैं आपको उनकी अधूरी प्रेम कहानी और राह चलते शादी हो जाने का वाकया बताउंगा। ओम प्रकाश का जन्म 19 दिसंबर, 1919 को विभाजन से पहले भारत के लाहौर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उनका पूरा नाम ओम प्रकाश छिब्बर था। ओम प्रकाश के पिता एक अमीर किसान हुआ करते थे।उनके पास काफी जमीन थी जिसकी देखरेख वो खुद किया करते थे। लाहौर और जम्मू जैसे क्षेत्र में उस दौर में उनके कई बड़े बंगले भी थे, लेकिन ओम को दौलत का मोह कभी नहीं रहा। उनका मन हमेशा से अभिनय के लिए धड़कता था। 

दोस्तों आज बात होगी अपने जमाने के दिग्गज अभिनेता बलराज साहनी की...बलराज साहनी सिर्फ एक्टर ही नहीं थे बल्कि बेहद जहीन इंसान भी थे...भाषाओं और शब्दों पर उनकी पकड़ कमाल थी...उन्होंने एक आम इंसान के दर्द और परेशानी को कई दफा फिल्मी पर्दे पर जुबान दी। वो दुनिया के किसी भी किरदार को पर्दे पर उतारने का माद्दा रखते थे। बलराज ने सीमा, काबुलीवाला, हकीकत, दो बीघा जमीन में अदाकारी से साबित कर दिया था कि वो आम इंसान के नायक और हिमायती हैं... उन पर फिल्माया गया गाना ऐ मेरी जोहरा जबीं आज भी गुनगुनाया जाता है...

आज हम बात करेंगे एक ऐसी फिल्म के बारे में जो शुरुआत में तो दर्शकों को बिल्कुल नहीं भायी लेकिन जब चली तो ऐसी चली की छप्पर फाड़ कमाई के साथ-साथ कई रिकॉर्ड्स तोड़ दिए...जी हां...हम बात कर रहे हैं 1978 में रिलीज हुई फिल्म डॉन की...डॉन में अमिताभ बच्चन, जीनत अमान और प्राण मुख्य भूमिकाओं में थे...आज डॉन हिंदी सिनेमा की क्लासिक और कल्ट फिल्मों में भले ही शुमार हो लेकिन इसे एक प्रोड्यूसर की मदद के लिए बनाया गया था। चलिए शुरुआत करते हैं कि कैसे ये फिल्म वजूद में आई...

फिल्मों में आपने ये डायलॉग तो जरूर सुना होगा...भागने की कोशिश मत करना...हमने तुम्हें चारों तरफ से घेर लिया है...भलाई इसी में है कि तुम अपने आप को कानून के हवाले कर दो...कुछ याद आया...जी हां..हिंदी फिल्मों में लगभग हर पुलिसवाले की जुबान से ये सुनने को मिल ही जाता था...इस डायलॉग को सुनकर एक जो तस्वीर सामने उभरकर आती है वो हैं इफ्तिखार...सिने प्रेमी अभिनेता इफ्तिखार को पुराने जमाने की फिल्मों में पुलिसवाले की अनगिनत भूमिकाओं के लिए बखूबी जानते हैं...लेकिन क्या आप जानते हैं कि इफ्तिखार एक अच्छे कलाकार के साथ-साथ अच्छे गायक और पेंटर भी थे...हम आज इन्हीं की जिंदगी के बारे में बात करेंगे कि कैसे वो एक अच्छी खासी नौकरी छोड़कर मनोरंजन की दुनिया में आगे बढ़े...

दोस्तों आज हम जिनकी बात करने जा रहे हैं वो कपूर खानदान से ताल्लुक रखते हैं और अपने जमाने के मशहूर ओ मारूफ कलाकार रहे हैं...आज बात होगी शशि कपूर साहब की जिंदगी से जुड़े कुछ किस्सों की...शशि कपूर का जन्म 18 मार्च 1938 को कलकत्ता में हुआ था...पिता पृथ्वीराज कपूर थियेटर के मालिक थे तो अदाकारी विरासत में मिली थी...जब फिल्मों का दौर शुरू हुआ तो थियेटर में ताले पड़ने लगे..जिसकी वजह से शशि कपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर को बंबई का रुख करना पड़ा...पिता और भाई मूक फिल्मों के जमाने से काम करने लगे...शशि कपूर थोड़े बड़े हुए तो उन्होंने भी बतौर बाल कलाकार फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया...और शुरू हो गया फिल्मों में अदाकारी का सफर...

दोस्तों आज बात होगी 1997 में आई एक्शन ड्रामा फिल्म विरासत की जिसे निर्देशित किया था प्रियदर्शन ने और मुख्य भूमिकाओं में थे अनिल कपूर, तब्बू, अमरीश पुरी, पूजा बत्रा, मिलिंद गुनाजी और गोविंद नामदेव हैं। फिल्म की कहानी मशहूर अभिनेता कमल हासन ने लिखी गई थी और तमिल फिल्म थेवर मगन की सफलता के बाद इसे हिंदी में विरासत के नाम से दोबारा बनाया गया। मुशीर-रियाज की जोड़ी ने फिल्म को प्रोड्यूस किया था और संगीत अनु मलिक और एस पी वेंकटेश ने तैयार किया गया था....फिल्म विरासत से हिंदी सिनेमा में निर्देशक प्रियदर्शन ने वापसी की थी...इस फिल्म को तब्बू की बेहतरीन अदाकारी के लिए भी जाना जाता है...तो चलिए सुनाते हैं फिल्म विरासत से जुड़ीं कुछ दिलचस्प बातें....
 

आज हम बात करेंगे फिल्म गाइड की...गाइड हिंदी फिल्मों की मास्टरपीस तो मानी ही जाती है साथ ही इसके अंग्रेजी संस्करण ने कान्स में भी जलवा बिखेरा वो भी अपनी रिलीज के 42 साल बाद 2007 में... हालांकि इसका अंग्रेजी संस्करण अपने रिलीज के वक्त फ्लॉप रहा था जबकि डायरेक्टर टैड डेनियलवस्की ने इस फिल्म में वहीदा रहमान का एक न्यूड सीन भी रखा था जिसे बॉडी डबल पर फिल्माया गया था...देव आनंद और वहीदा रहमान की जोड़ी से सजी इस फिल्म ने गीत-संगीत, डायलॉग, एक्टिंग हर तरह से इतिहास रच दिया....

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