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प्रसाद खिलाकर कत्ल करने वाला सायनाइड शिवा, भाग्यशाली सिक्कों से फंसाता था शिकार

9 August 2022

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4:42
सन 2018. आंध्र प्रदेश के तीन जिलों में हत्याओं का सिलसिला शुरू होता है। इनमें से सिर्फ़ चार मौतों को ही संदिग्ध माना गया और बाकी को सामान्य मौत मानकर पुलिस ने केस बंद कर दिया. लेकिन पुलिस मामले को जितना आसान समझ रही थी असल में वो बेहद पेंचीदा था.जुर्म की दुनिया में आज बात होगी एक ऐसे कातिल की जो चावल को अपनी ओर आकर्षित करने वाले भाग्यशाली सिक्के बेचने का लालच देकर लोगों को किसी सुनसान जगह पर बुलाता और इसके बाद वह प्रसाद में सायनाइड मिलाकर खिला देता था. प्रसाद खाने वाले की मौके पर मौत हो जाती और ये कातिल उन्हें लूटकर फरार हो जाता....इस कातिल का नाम है सिमहाद्री उर्फ़ शिवा. ये जरायम की दुनिया में सायनाइड शिवा के नाम से भी कुख्यात है...

प्रसाद खिलाकर कत्ल करने वाला सायनाइड शिवा, भाग्यशाली सिक्कों से फंसाता था शिकार

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14 मई 2021...जगह मैक्सिकों का अतिजापन डी जाराजोगा इलाका...यहां के एक पुलिस अधिकारी ब्रूनो पोर्टिलो का पत्नी और दो बच्चों की मां रायना गोंजालेज लापता हो जाती हैं। रायना मोबाइल फोन के पुर्जे खरीदने के लिए दोपहर घर से निकली थीं, लेकिन जब शाम तक वो घर नहीं लौटीं तो उनके पति ने उनकी तलाश शुरू की. रायना के पति ब्रूनो उसकी दोस्त के घर पहुंचते हैं और अपनी पत्नी के बारे में पूछताछ करते हैं। वहां उन्हें पता चलता है कि रायना अपना फोन ठीक कराने  मेंडोज़ा नाम के शख्स के घर गई थी. इसके बाद ब्रूनो पोर्टिलो मेंडोज़ा के घर पहुंचते हैं लेकिन मेंडोज़ा उन्हें घर के अंदर आने से मना कर देता है और दरवाजा नहीं खोलता. ब्रुनो अपने आला अधिकारियों को सूचना देते हैं और अपनी पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराते हैं...

6 मार्च 2002.जगह जापान का छठा सबसे बड़ा शहर फुकुओका.आधी रात इलाके की पुलिस चौकी पर एक कमउम्र लड़की पहुंचती है. हाथ-पैर में बंधी बेड़ियां, बिखरे बाल, फटे कपड़े और शरीर पर जगह-जगह चोटों के गहरे निशान... लड़की को इतनी रात इस हालत में देख पुलिस चौकी पर तैनात पुलिसकर्मी हैरत में पड़ जाते हैं... लड़की का यह सूरतेहाल किसी बड़ी आफत की तरफ इशारा कर रहा था, लेकिन यह मुसीबत आखिर थी क्या?..बस इसी एक सवाल ने खुलासा किया जपान की अबतक की सबसे खौफनाक और दर्दनाक वारदातों के सिलसिले का, जिसमें एक आदमी की सनक नामालूम कितनी मौतों की वजह बनी...

30 नवंबर 1989...जगह अमेरिका के फ्लोरिडा का क्लियरवॉटर शहर.. यहां के एक इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर के मालिक रिचर्ड चार्ल्स मैलोरी अचानक लापता हो जाते हैं। 51 साल के रिचर्ड को आखिरी बार एक लड़की के साथ कार में जाते देखा गया था. दो दिन बाद, वोलुसिया काउंटी के एक पुलिस अधिकारी को मैलोरी की कार एक खाई में मिलती है, लेकिन रिचर्ड का अब भी पता नहीं चलता...इसके बाद 13 दिसंबर को उसका शव शहर से कई मील दूर एक जंगली इलाके में मिलता है. उन्हें कई बार गोली मारी गई थी और बाएं फेफड़े में दो गोलियां लगने से उनकी मौत हो गई थी.जुर्म की दुनिया में आज बात होगी अमेरिका की कातिल हसीना ऐलीन कैरल वुर्नोस की. महज एक साल में इस महिला सीरियल किलर ने सात लोगों को मौत के घाट उतार दिया. पेशे से यौनकर्मी इस कातिल ने ज्यादातर उम्रदराज पुरुषों को अपना निशाना बनाया...वूर्नोस को छह हत्याओं के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी...2003 में इस कैरल के जीवन पर फिल्म मॉन्सटर बनी और इस फिल्म में चार्लीज़ थेरॉन ने कैरल का किरदार निभाया जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का अकादमी पुरस्कार मिला....

जुर्म की दुनिया में आज बात होगी एक ऐसे कातिल की दहशतनाक कहानी, जिसने महज़ 11 साल की छोटी सी उम्र में, न सिर्फ दो हत्याओं को अंजाम दिया, बल्कि दरिंदगी की हदें पार कर दीं. पुलिस के पास सबूत थे, गवाह थे और वारदात से जुड़े एक-एक सुराग भी, लेकिन अदालत के एक फैसले ने पूरी कहानी बदल दी... 

सन 1985...इंग्लैंड के पश्चिमी यॉर्कशायर से 16 साल की फ्लोरेंस नाम की लड़की गायब हो जाती है। उसके माता पिता ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी शाम को अपने दोस्तों के घर पार्टी करने गई थी. जब देर रात वो घर नहीं लौटी तो उन्होंने उसके दोस्तों से संपर्क किया लेकिन दोस्तों ने बताया कि वो पार्टी में पहुंची ही नहीं...पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर छानबीन में जुट जाती है...दिन बीतते हैं...महीने बीतते हैं और बीत जाता है साल लेकिन फ्लोरेंस की कुछ पता नहीं था... 
जुर्म की दुनिया में आज बात होगी इंग्लैंड की सीरियल किलर रोज़ मेरी पॉलीन वेस्ट की जिसने 1973 और 1987 के बीच कम से कम नौ लड़कियों की हत्या की. उसके गुनाहों में उसके पति, फ्रेड वेस्ट ने भी साथ दिया. रोज़मेरी वेस्ट एक निडर माँ की तरह लगती थी, लेकिन जब पुलिस उसके घर में दाखिल हुई तो कई युवतियों के शरीर के अवशेष मिले जिसमें उसकी 8 साल की अपनी बेटी भी शामिल थी। ये दंपत्ति घर में वेश्यावृत्ति कराता और अगर इनके बच्चे विरोध करते तो उन्हें यातना दी जाती..यहां तक कि कुछ बच्चों को मौत के घाट भी उतार दिया गया...1995 में दस हत्याओं के लिए दोषी ठहराए जाने के बाद से रोज़ यॉर्कशायर के एचएम जेल में बंद है। 

जुर्म की दुनिया का एक ऐसा अपराधी, जिसके खौफ ने 1967 और 1980 के बीच न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी जैसे बड़े इलाकों को दहशत से भर दिया, जिसकी हवस और कमउम्र लड़कियों को मौत देने की सनक इस हद तक गुजर गई कि उसे नाम दिया गया द टाइम्स स्क्वायर किलर...

8 जुलाई 1962 को बोस्टन हेराल्ड अखबार के रविवार संस्करण में एक चौंकाने वाली खबर छपी "मैड स्ट्रैंगलर ने की बोस्टन में चार महिलाओं की हत्या। अखबार ने चेतावनी भी दी कि "बोस्टन शहर में एक पागल अजनबी खुला घूम रहा है" जिसने "पिछले महीने के दौरान चार महिलाओं को मार डाला है।जुर्म की दुनिया में आज बात होगी अमेरिकी सीरियल किलर एल्बर्ट डी साल्वो की जिसने बोस्टन शहर की महिलाओं में खौफ पैदा कर दिया था.

उसने 19 साल से लेकर 85 साल तक की महिलाओं को अपनी हैवानियत का शिकार बनाया. इस सिरफिरे ने महज दो साल में 13 महिलाओं को मौत के घाट उतार दिया. लोग उसे "फैंटम फ़िएंड" और "फैंटम स्ट्रैंगलर" पुकारने लगे थे.14 जून, 1962 और 4 जनवरी 1964 के बीच, अमेरिका के बोस्टन शहर में 19 से 85 साल की उम्र की 13 महिलाओं की हत्या कर दी जाती है। ज्यादातर महिलाओं की उनके अपार्टमेंट में बलात्कार करने के बाद कपड़े से गला घोंटकर हत्या की गई थी।

सबसे बुजुर्ग पीड़ित का दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई थी। दो अन्य महिलाओं की चाकू मारकर हत्या कर दी गई, जिनमें से एक को बुरी तरह पीटा गया था। सभी की लाशें उनके बेड पर नग्न अवस्था में पड़ी मिली थीं. पुलिस को उनके घर में जबरन घुसने का कोई सबूत नहीं मिलता है और वो ये जान चुकी थी कि महिलाएं या तो अपने हत्यारे को जानती थीं या मर्जी से उसे अपने घरों में आने की अनुमति दी गई थी। सभी महिलाएं घर में अकेली रहती थीं. वो या तो छात्रा थीं या विधवा या फिर तलाकशुदा...कातिल ने सभी का शिकार दिन में किया था. शुरुआती जांच में पुलिस समझ चुकी थी कि ये काम किसी एक शख्स का है.  हो सकता है कि कातिल ने मरम्मत करने वाले या डिलीवरी करने वाले व्यक्ति के रूप में कपड़े पहन रखे हों...
 

अपराध लोक में सुनिए ऐसी फैमिली के बारे में जिसे  दुनिया की पहली ‘सीरियल किलर फैमिली’ कहा गया। 18वीं सदी में उनके ऊपर लगभग 45 लाख रूपए का इनाम रखे जाने के बावजूद इस शातिर परिवार को कोई नहीं पकड़ पाया।

जुर्म की दुनिया में आज बात होगी रूस के सीरियल किलर अलेक्जेंडर निकोलायेविच स्पीसिवत्सेव की, जिसने महज 6 साल में 80 से ज्यादा महिलाओं और बच्चों की बेदर्दी से हत्या की. अफसोस की बात ये थी कि इस गुनाह में उसकी मां ल्यूडमिला ने भी उसका साथ दिया. कहा तो ये भी जाता है कि ये हैवान अपने शिकार का मांस भी चबा जाता था. अलेक्जेंडर को द नोवोकुज़नेत्स्क मॉन्स्टर और द साइबेरियन रिपर के नाम से भी जाना जाता है...

21 दिसंबर 1924...पोलैंड के शहर मुस्टरबर्ग की सड़क पर विन्सेंज ओलिवियर नाम का एक बेघर आदमी डरा-सहमा से सड़क पर दौड़ता दिखाई देता है। ओलिवर के सिर पर किसी ने कुल्हाड़ी से वार किया था। उसका पूरा शरीर खून से लथपथ था और वो मदद की गुहार लगा रहा था. स्थानीय पुलिस के एक सिपाही ने ओलिवर को रोका और तुरंत अस्पताल पहुंचाया.  अस्पताल में ओलिवर ने बताया कि कार्ल डेन्के नाम के शख्स ने उस पर हमला किया है। पुलिस डेन्के की तलाश में निकलती है और उसके घर पहुंचती है। 54 साल का कार्ल डेन्के पुलिस को देखकर एक कमरे में खुद को बंद कर लेता है...पुलिस दरवाजा खटखटाती है लेकिन डेन्के दरवाजा नहीं खोलता. जब काफी देर दरवाजा नहीं खुलता है तो पुलिस दरवाजे को तोड़कर कमरे में दाखिल होती है लेकिन इससे पहले ही डेन्के पंखे से लटकर खुदखुशी कर लेता है...

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