डेनिस रेडर
अपराध लोक

सुनिए उस पूर्व फौजी की कहानी, जो सनकी हत्यारा बन पहता था महिलाओं के अंडरगारमेंट्स

8 April 2022

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सुनिए एक ऐसे सीरियल किलर के बारे में, जिसने हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थीं। डेनिस रेडर नाम के इस कुख्यात सीरियल किलर  ने 10 लोगों को मौत के घाट उतारा था। इस सीरियल किलर के हैवानियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि इसने पड़ोसी शख्स, उसकी पत्नी के साथ-साथ दो छोटे बच्चों को भी मार दिया था जिनकी उम्र 9 और 11 वर्ष थी।  

सुनिए उस पूर्व फौजी की कहानी, जो सनकी हत्यारा बन पहता था महिलाओं के अंडरगारमेंट्स

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जापान का इसेई सवागा दुनिया का ऐसा आदमखोर होगा जो बाद में लोगों के बीच मशहूर हो गया। उसे कई आयोजन में सेलिब्रिटी की तरह बुलाया जाने लगा इसकी कहानी भी काफी डरावनी है, सुनिए कैसे और कब इसने पहली बार चखा था इंसानी गोश्त।

8 अगस्त 2016...तमिलनाडु के सेलम से चेन्नई जाने वाली 11064 सेलम-चेन्नई इग्मोर एक्सप्रेस ट्रेन रात के अंधेरे में धड़धड़ाती चली जा रही थी. इस ट्रेन में भारतीय रिजर्व बैंक के 342 करोड़ रुपये ले जाए जा रहे थे. इन पैसों की हिफाजत के लिहाज से ट्रेन में हथियारबंद सुरक्षाकर्मी भी मौजूद थे. लेकिन जब ट्रेन अपने गंतव्य तक पहुंचती है तो आरबीआई के अधिकारियों को बोगी की छत में एक बड़ा छेद दिखता है और चारों तरफ पैसे बिखरे पड़े थे. अधिकारियों को समझते देर नहीं लगती की ट्रेन में पड़ चुकी है डकैती...जुर्म की दुनिया में आज बात होगी आजाद भारत के इतिहास की सबसे बड़ी ट्रेन डकैती की जिसमें चलती ट्रेन से करोड़ों रुपये उड़ा लिए गए और सुरक्षाकर्मियों को भनक तक नहीं लगी.  पूरे 730 दिन लगे. 2 हजार लोगों से पूछताछ की गई. लाखों कॉल डिटेल खंगाली गई. और आखिर में नासा से मदद ली गई. तब जाकर पता चला कि हिंदुस्तान की अब तक की सबसे बड़ी ट्रेन रॉबरी किसने की थी? 

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जन्मे आफताब अंसारी जर्नलिज्म कर अच्छा पत्रकार बनना चाहता था। मगर बदकिस्मती से वो पहले अपहरणकर्ता और बाद में डॉन बन गया । सुनिए इसके इंटरनेशनल डॉन बनने की कहानी

ऐसी बहुत सारी बैंक डकैतियों के बारे में आपने सुना होगा, जिसमें लाखों या करोड़ों रुपये की लूट हुई हो। लेकिन आज हम आपको जिस बैंक डकैती के बारे में बताने जा रहे हैं, वो बैंक डकैती के इतिहास में सबसे अनोखा मामला है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर उस देश के राष्ट्रपति का बेटा शामिल था। जी हां, यह हैरान करने वाली बात तो है, लेकिन बिल्कुल सच है। इस बैंक डकैती में कुल एक बिलियन डॉलर यानी आज के हिसाब से करीब 7562 करोड़ रुपये की लूट हुई थी। 

1984 के दौरान पूर्वी यूक्रेन में युवा महिलाएं और बच्चियां गायब होनी शुरू हो जाती हैं। ज्यादातर लड़कियां 8 से 18 साल की थीं. इनमें कुछ लड़कियों की लाश पुलिस बरामद करती है और कईयों का कोई पता नहीं था. जांच में पता चलता है कि मरने वाली महिलाओ के साथ हैवानियत की सारी हदें पार की गई थीं. पहले उनका रेप किया जाता, फिर गला घोटा जाता और मौत के आगोश में समा जाने के बाद लाश से बलात्कार किया जाता... जुर्म की दुनिया में आज बात होगी यूक्रेन के एक ऐसे पुलिस अधिकारी की जिसने कानून को ताक पर रखकर अपराधों को अंजाम देना शुरू कर दिया. उसने दावा किया कि उसने 100 लोगों की हत्याएं कीं, जिसमें ज्यादातर बच्चियां और महिलाएं थीं. इस सिरफिरे कातिल का नाम था सीरेह एच. 

जुर्म की ये सच्ची घटना है हंगरी की। यहां एक गांव नागीरेव में पुरुषों के अचानक मरने का सिलसिला शुरू होता है और धीरे-धीरे मौत का ये सिलसिला बूढ़ी महिलाओं और बच्चों तक पहुंच जाता है। लगातार मौतें हो रहीं थीं लेकिन कोई ये पता नहीं कर पा रहा था कि ये मौतें क्यों हो रही हैं। मरने वालों के शरीर में किसी तरह की बीमारी के लक्षण भी नहीं मिल रहे थे और ना ही इनपर किसी तरह का हमला किया गया था. मामला पेंचीदा हो रहा था और लोगों में खौफ बढ़ता जा रहा था. जुर्म की दुनिया में आज बात होगी इतिहास के ऐसे कत्लेआम की जो बड़ी खामोशी से किया गया। कातिल भी कोई एक नहीं बल्कि 30 से ज्यादा महिलाएं थीं और इनकी सरगना थी ज़ुज़सन्ना फ़ज़ेकस नाम की एक दाई. कातिलों का ये दल एंजल मेकर्स ऑफ नागीरेव के नाम से कुख्यात हुआ और इसने लगभग 40 पुरुषों और बच्चों को मौत के घाट उतारा...माना तो ये भी जाता है कि इस कातिल दल ने करीब 300 लोगों की हत्या की. 

सन 1809 के आसपास इंग्लैंड से भारत आने वाले अंग्रेज अफसर कैप्टन विलियम स्लीमैन को ईस्ट इंडिया कंपनी ने लगातार गायब हो रहे मुसाफिरों के बारे में सूचना दी। कंपनी ने बताया कि पिछले कुछ सालों से राहगीरों के दल से कुछ लोग गायब हो जाते हैं और उनका कुछ पता नहीं चलता। यहां तक कि उनकी लाश भी नहीं मिलती। इनको मारा जा रहा है या ये खुद कहीं चले जाते हैं ये राज बना हुआ है. जुर्म की दुनिया में आज बात होगी दुनिया से सबसे शातिर हत्यारे की. वो जिस रास्ते से गुजरता वहां सन्नाटा पसर जाता। ये खूंखार लुटेरा अपने पास रखता था एक पीला रुमाल और सिक्का और इसी से इसने किए 931 कत्ल...इसका नाम था बेहराम...ये लोगों के काफिले को अपना निशान बनाता था। बेहराम ठग का दिल्ली से लेकर ग्वालियर और जबलपुर तक इस कदर खौफ था कि लोगों ने इस रास्ते से चलना और व्यापार करना बंद कर दिया था।

अमेरिका के बोस्टन स्थित इसाबेला स्टीवर्ट गार्डनर म्यूजियम में हुई चोरी की गुत्थी को 40 बाद भी अनसुलझी है। 18 मार्च 1990 को यहां रखे करोड़ों रुपए के कलाकृतियों की चोरी कर ली गई थी, जिसका आज तक कोई सुराग नहीं मिला है।

1980 और 90 के दशक के अंत में कनाडा के वैंकूवर में महिलाओं के लापता होने की संख्या बढ़ने लगती है। लापता महिलाओं में से ज्यादातर या तो यौनकर्मी थीं, घर से भागी हुई थीं या नशीली दवाओं की लत और मानसिक स्वास्थ्य से पीड़ित थीं। जबकि कुछ लोगों ने सोचा कि ये महिलाएं अपनी खतरनाक "जीवन शैली" के कारण गायब हो गईं, सेक्स वर्कर समुदाय को पता था कि ज्यादातर लापता महिलाएं, वास्तव में, एक सीरियल किलर की शिकार थीं। इस समुदाय ने विभिन्न स्वयंसेवी समूहों के साथ मिलकर और तख्तियों पर चेतावनी लिखकर स्थानीय निवासियों और साथी यौनकर्मियों की रक्षा करने की पूरी कोशिश की। फिर भी, कुछ भी काम नहीं आया और लापता महिलाओं की संख्या केवल बढ़ती गई। जुर्म की दुनिया में आज बात होगी उस सीरियल किलर की जिसने 48 वेश्याओं का बेरहमी से अपने पिग फॉर्म में कत्ल किया। उनके मांस को अपने सुअरों को खिला दिया और फिर इस मलाल के साथ जुर्म कबूल किया कि दो औरतों को वो और मार देता तो पूरी 50 हत्याएं हो जातीं। हत्यारे ने ये भी माना कि उसे गम है कि वो 'फिफ्टी' नहीं मार पाया। कहानी कनाडा के सबसे बड़े सनकी, खूंखार सीरियल किलर, रॉबर्ट पिकटन की, जो द पिग फारमर किलर के नाम से कुख्यात हुआ...

19वीं शताब्दी की शुरुआत में दुनिया भर के देशों में ऐसे कई ठगों के गिरोह हुए, जो अपनी साहसिक, रोमांचकारी और आश्चर्य से भर देने वाले कारनामों के कारण आज भी याद किए जाते हैं। इन्हीं में से एक ठग था ‘विक्टर लस्टिग’,जिसने तब ठगी के सारे रिकॉर्ड ही तोड़ डाले, जब उसने एफिल टॉवर ही बेच दिया।

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