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Pretlok : काले जादू का कमरा

25 November 2022

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अयान अपने कदमों को रोक न पाया और धीरे-धीरे उसी तरफ बढ़ने लगा. कुछ ही कदमों का फसला तय कर वो अपनी मरहूम दादी के कमरे के दरवाज़े पर जा पहुंचा. हो न हो, मगर उस कमरे की दहलीज़ किसी अजीब सी सर्द घेरे में थी, आखिर क्या था अंदर?... 

Pretlok : काले जादू का कमरा

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सभी 38 एपिसोड

रात के 12 बजकर 54 मिनट हुए थे. नवंबर की ठंड...घने कोहरे और अंधेरे के बीच सड़क किनारे कब्रिस्तान के अंदर से अचानक जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज आती है...सड़क के उस पार बनी एक छोटी सी चाय की दुकान पर रात की बस का इंतजार कर रहे मुसाफिर इस आवाज को सुनते हैं, पहली बार में तो यह आवाज किसी जानवर की लगती है, लेकिन धीरे-धीरे इस चीख में किसी का नाम सुनाई देता है, ऐसा लगता है कि जैसे कोई जोर-जोर से चिल्ला कर मदद मांग रहा हो. सड़क पार खड़े कुछ मुसाफिर डर और बेचैनी के साथ एक-एक कर कब्रिस्तान की तरफ बढ़ने लगते हैं...लेकिन तभी ये आवाज बंद हो जाती है. 

आफिया

4 December 20228 mins 41 secs

Pretlok: एक आखिरी कॉल

आफिया आज भी ऑफिस में देर तक रुकने वाली थी, ताकि कल की प्रेजेंटेशन के लिए सारी तैयारियां वक्त पर मुकम्मल हो सकें. अभी रात ने अपना आधा ही फासला तय किया होगा, कि बीच में अचानक पूरे ऑफिस की लाइट गुल हो गई. आफिया यह देख ज़रा चौंक सी गई, लेकिन गनीमत थी कि कम्प्यूटर की स्क्रीन अब भी चालू थी. कीबोर्ड पर हाथ चलाते हुए आफिया एकाएक पसरे इस आसपास के अंधेरे को घूर के देखने लगी, तभी उसके मोबाइल की घंटी बजी. यह उसके शौहर ज़ुहान का कॉल था. लेकिन नामालूम क्यों आफिया इस कॅाल को बजता देख बुरी तरह डर चुकी थी... आखिर इतनी रात, उसके शौहर ने उसे खैरियत पूछने को फोन किया होगा, इसमें डरने की क्या बात...

कानपुर के रहने वाले राजीव की सह अध्यापक के तौर पर पास के एक गांव रामनगर में तैनाती हुई थी...काफी मशक्कत के बाद उसे रहने के लिए एक मकान मिला था...गांव के आखिर में...पुराना मकान...लगता था जैसे कई सालों से यहां कोई रहने नहीं आया...जर्जर दरवाजे...पूरे घर में मकड़ी के जाले...उसे काफी सस्ते दामों में यह घर भी मिल गया था, इसलिए राजीव ने ज्यादा देरी भी नहीं की और उसे किराए पर ले लिया...

अबतक जो चीज़ उन्हें

2 December 20229 mins 12 secs

Pretlok: लाशों की सड़क

अबतक जो चीज़ उन्हें परेशान कर रही थी, अब वो उन्हें डराने लगी थी. रात के 2 बजने को हैं और न जाने क्यों इस सुनसान दहशतनाक सड़क के बीच उनके साथ यह खौफनाक वाक्या हो रहा था. अभी वो कुछ समझ पाते कि तभी अचानक उनके सामने का मंजर देख, उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं.

जब प्रदीप नदी के किनारे उस मशाल के पास पहुंचता है, तो देखता है कि वहां कोई मशाल नहीं बल्कि एक जिंदा युवक की चिता जलाई जा रही थी. इस मंजर से ज्यादा खौफनाक था उस चिता के आस-पास तालियां पीटते और जोर-जोर चीखते 10-20 किन्नर. ये एक-एक करके प्रकट होते जा रहे थे...

न जाने क्यों, लेकिन प्रिया उस जगह की खौफनाक फ़िज़ाओं को अपने बदन पर महसूस कर रही थी... उसकी शक्ल पर बेचैनी और हाथों की कपकपाहट यह साफ ज़ाहिर कर रही थी, कि शायद यहां सब कुछ ठीक नहीं हैं, यह जगह प्रिया को मानों काटने दौड़ रही थी, लेकिन विनय और अजय की जिद के आगे वो बेबस थी...
अजय ने थोड़ी ही देर में टेंट गाड़कर आग जला दी... तीनों उस तपिश को चारों तरफ से घेरे अपनी-अपनी बातों में मशरूफ थे... प्रिया भी अपने अंजान से डर को नज़रअंदाज करने की नाकाम कोशिशें कर रही थी..उसका जिस्म अजीब सी ठंडक का शिकार हो रहा था...कि तभी एकाएक जंगल से एक अजीब आवाज़ गूंज उठी...रात के काले सन्नाटे में शोर मचाती यह आवाज़ जितनी भयानक थी, उतनी ही चुभन भरी भी...

स्मिता और राकेश का अपने नए फ्लैट में पहला दिन था. दोनों खुश थे कि आखिरकार उन्होंने अपने सपनों का घर खरीद लिया. दिनभर की साफ-सफाई और सामान लगाने के बाद दोनों थककर चूर हो चुके थे और कब उनकी आंख लग गई पता ही नहीं चला..दोनों फर्श पर ही एक चटाई पर सो गए...तभी रात 10 बजे उनके फ्लैट की बेल बजती है. बेल की आवाज सुनकर स्मिता राकेश को जगाती है और कहती है- इतनी रात को कौन हो सकता है...हम तो यहां किसी को जानते भी नहीं...ठहरो मैं देखता हूं...

हकीकत तो यह थी कि इंतज़ार तो मिस्टर आशीष राणे भी कर रहे थे, लेकिन अपनी रिहाई का. पंकज की नज़रें अब भी जवाब तलाश रही थी, लेकिन स्कूल में अचानक पसरा सन्नाटा अशांत कर रहा था, यह वो मंज़र था जब नौ साल का पंकज, बेचैनी, खौफ, दहशत या फिर किसी भी तरह के डर से सही मायने में वाकिफ नहीं था...

अयान अपने कदमों को रोक न पाया और धीरे-धीरे उसी तरफ बढ़ने लगा. कुछ ही कदमों का फसला तय कर वो अपनी मरहूम दादी के कमरे के दरवाज़े पर जा पहुंचा. हो न हो, मगर उस कमरे की दहलीज़ किसी अजीब सी सर्द घेरे में थी, आखिर क्या था अंदर?... 

प्रियंका

24 November 202210 mins 19 secs

Pret lok: भूतिया मकान

प्रियंका आज काफी थकी हुई थी, एक तो पूरे दिन शिफ्टिंग का काम ऊपर से किराये को लेकर नए मकान मालिक से बहस. भला अंतिम समय में कोई मकान मालिक किराया बढ़ाने की बात करता है क्या? चलो फिर भी इतना ढूंढने के बाद शहर में एक अच्छा और किफायती मकान तो मिला... यही सोचते हुए प्रियंका बाथरूम में नहाने चली जाती है. शॉवर चालू कर ठंडे पानी में पूरे दिन की थकान उतारती प्रियंका न जाने क्यों धीरे धीरे 80 के दशक के गानों को गुनगुने लगती है... वैसे तो प्रियंका काफी मॉडर्न, एडवांस और एनरजेटिक लड़की है, लेकिन आज उसका मन एक दम शांत और थोड़ा उदासी भरा था. शायद घर से अभी अभी लौटने का गम उसके दिल के किसी छोर में दबा बैठा था...

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