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Kabir Vani

कबीर वाणी

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कबीर दास बेहद ज्ञानी थे और स्कूली शिक्षा ना प्राप्त करते हुए भी उनके पास भोजपुरी, हिंदी, अवधी जैसी अलग-अलग भाषाओं में उनकी अच्छी पकड़ थी। उन्होंने सामाज में फैली कुरीतियों, कर्मकांड, अंधविश्वास की निंदा की और सामाजिक बुराइयों की कड़ी आलोचना भी की... साथ ही उन्होंने जो अपने आगे पीछे चलता देखा वहीं लिख दिया. इस शो में हम आपको सुनाएंगे कबीर के दोहे और उनके अर्थ...

कबीर वाणीः साईं इतना दीजिए, जामे कुटुंब समाए...

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सभी 42 एपिसोड

साईं इतना दीजिए, जामे कुटुंब समाए
मैं भी भूखा न रहूं, साधु न भूखा जाए।

कबीर दस जी कहते हैं कि परमात्मा तुम मुझे इतना दो कि जिसमें बस मेरा गुजरा चल जाए,मैं खुद भी अपना पेट पाल सकूं और आने वाले मेहमानों को भी भोजन करा सकूं... 

गारी ही सों ऊपजे, कलह कष्ट और मींच ।
हारि चले सो साधु है, लागि चले सो नींच ॥

गाली से मरने मारने तक की बात आ जाती है, इससे अपनी हार मानकर जो विरक्त हो चलता है, वो सन्त है, और गाली गलौज एवं झगड़े में जो व्यक्ति मरता है, वो नीच है।
 

अवगुण कहूं शराब का, आपा अहमक़ साथ ।
मानुष से पशुआ करे, दाय गाँठ से खात ॥

मैं तुमसे शराब की बुराई करता हूं कि शराब पीकर आदमी आप पागल होता है, मूर्ख और जानवर बनता है और जेब से रकम भी लगती है सो अलग ।

शब्द दुरिया न दुरै, कहूं जो ढोल बजाय |
जो जन होवै जौहोरी, लेहैं सीस चढ़ाय ||

कबीर की वाणी है की शबद (ईश्वर की महिमा) किसी के दूर करने से नहीं छिप सकती है। जो शबद के पारखी होते हैं वो गुरु के वचनों को अपने सर माथे पर धर लेते हैं, उसका मोल समझ कर उसे उचित महत्त्व देते हैं
 

नींद निशानी मौत की, उठ कबीरा जाग ।
और रसायन छांड़ि के, नाम रसायन लाग ॥

कबीरदास जी कहते हैं की हे प्राणी ! उठ जाग, नींद मौत की निशानी है । दूसरे रसायनों को छोड़कर तू भगवान के नाम रूपी रसायनों मे मन लगा 

पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,

ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।

बड़ी-बड़ी पुस्तकें पढ़ कर संसार में कितने ही लोग मृत्यु के द्वार पहुंच गए, पर सभी विद्वान न हो सके। कबीर मानते हैं कि यदि कोई प्रेम या प्यार के केवल ढाई अक्षर ही अच्छी तरह पढ़ ले, तो वही सच्चा ज्ञानी होगा।

ते दिन गए अकारथ ही, संगत भई न संग ।
प्रेम बिना पशु जीवन, भक्ति बिना भगवंत ।

अब तक जो समय गुजारा है वो व्यर्थ गया, ना कभी सज्जनों की संगति की और ना ही कोई अच्छा काम किया। प्रेम और भक्ति के बिना इंसान पशु के समान है और भक्ति करने वाला इंसान के ह्रदय में भगवान का वास होता है।
 

लाडू लावन लापसी ,पूजा चढ़े अपार पूजी पुजारी ले गया,मूरत के मुह छार 

कबीर साहेब ने सदियों पहले दुनिया के इस सबसे बड़े घोटाले के बारे में बताया था कि आपका यह सारा माल ब्राह्मण-पुजारी ले जाता है और भगवान को कुछ नहीं मिलता, इसलिए *मंदिरों में ब्राह्मणों को दान करना बंद करो ।

बाजीगर का बांदरा, ऐसा जीव मन के साथ ।
नाना नाच दिखाय कर, राखे अपने साथ ॥

जिस तरह बाजीगर अपने बन्दर से तरह-तरह के नाच दिखाकर अपने साथ रखता है उसी तरह मन भी जीव के साथ है वह भी जीव को अपने इशारे पर चलाता है ।

कबीर सुता क्या करे, जागी न जपे मुरारी ।
एक दिन तू भी सोवेगा, लम्बे पांव पसारी ।

कबीर दास जी हमें कहते हैं, कि, तू हमेशा सोया क्यों रहता है, उठकर भगवान को याद कर,उनकी आराधना कर, एक दिन ऐसा आएगा जब तू लंबे समय तक सोया ही रह जाएगा

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