लोकप्रिय और ट्रेंडिंग टॉपिक्स

Manto ki Kahaniyan

मंटो के अफसाने

Specials

अमर उजाला आवाज में सुनिए मशहूर लेखक सआदत हसन मंटो की हरदिल अजीज कहानियां

सुनिए मंटो का अफसाना : शरीफ़न

1.0x
  • 1.5x
  • 1.25x
  • 1.0x
10
10
X

सभी 55 एपिसोड

ये कहानी एक ऐसे पिता की है जो दंगों में अपनी बेटी की नंगी लाश देख लेता है और उसके सिर पर खून सवार हो जाता है. वो बदले की आग में गैर मजहब के लोगों को निशाना बनाने लगता है...

ये कहानी एक ऐसी महिला की है जिसके चेहरे पर मर्दों की तरह दाढ़ी आती है। एक लड़का उसे बस स्टैंड पर देखकर इतना हैरान होता है कि उसके होश-ओ-हवास ही गुम हो जाते हैं.... 

कुछ दिनों से मोमिन बहुत बेक़रार था। उसको ऐसा महसूस होता था कि उसका वजूद कच्चा फोड़ा सा बन गया था। काम करते वक़्त, बातें करते हुए हत्ता कि सोचने पर भी उसे एक अजीब क़िस्म का दर्द महसूस होता था। ऐसा दर्द जिसको वो बयान भी करना चाहता तो न कर सकता...

फ़र्ख़ंदा बहुत ख़ुश हुई। देर तक दोनों घुल मिल के बातें करती रहीं। नसीमा अब उसे और ज़्यादा ख़ूबसूरत दिखाई दी। उसकी हर अदा जो मर्दाना तर्ज़ की थी इसे बेहद पसंद आई और वहीं फ़ैसला हो गया कि वो ता-दम-ए-आख़िर सहेलियां बनी रहेंगी...

सुरेंद्र ने उन अधेड़ उम्र की नौकरानियों से अपनी तरफ़ से कोई कोशिश नहीं की थी। वो ख़ुद उसको खींच कर अपनी कोठरियों में ले जाती थीं। मगर सुरेंद्र अब महसूस करता था कि ये सिलसिला उस को अब ख़ुद करना पड़ेगा, हालाँकि उसकी तकनीक से क़तअ’न नावाक़िफ़ था...
 

ये आंखें बिल्कुल ऐसी ही थीं जैसे अंधेरी रात में मोटर कार की हेडलाइट्स जिनको आदमी सब से पहले देखता है। आप ये न समझिएगा कि वो बहुत ख़ूबसूरत आंखें थीं, हरगिज़ नहीं। मैं ख़ूबसूरती और बदसूरती में तमीज़ कर सकता हूँ। लेकिन माफ़ कीजिएगा, इन आंखों के मुआमले में सिर्फ़ इतना ही कह सकता हूं कि वो ख़ूबसूरत नहीं थीं। लेकिन इसके बावजूद उनमें बेपनाह कशिश थी... 

बरसात

1 December 202215 mins 41 secs

मंटो का अफसाना : बू

बरसात के यही दिन थे। खिड़की के बाहर पीपल के पत्ते इसी तरह नहा रहे थे। सागवान के इस स्प्रिंगदार पलंग पर जो अब खिड़की के पास से थोड़ा इधर सरका दिया गया था एक घाटन लौंडिया रणधीर के साथ चिपटी हुई थी...

ईशर सिंह जूही होटल के कमरे में दाख़िल हुआ, कुलवंत कौर पलंग पर से उठी। अपनी तेज़ तेज़ आंखों से उसकी तरफ़ घूर के देखा और दरवाज़े की चटखनी बंद कर दी। रात के बारह बज चुके थे, शहर का मुज़ाफ़ात एक अजीब पुर-असरार ख़ामोशी में ग़र्क़ था...

इस कहानी में कलाकारों के दर्द को बयान किया गया है। महमूद और जमीला अपनी कला को एक मुकाम देने के लिए जतन करते हैं लेकिन हालात से परेशान हो कर आर्थिक निश्चिंतता के लिए वे एक फैक्ट्री में काम करने लगते हैं, लेकिन दोनों को यह काम कलाकार के प्रतिष्ठा के अनुकूल महसूस नहीं होता इसीलिए दोनों एक दूसरे से अपनी इस मजबूरी और काम को छुपाते हैं।

बारिश एक नौजवान के अधूरे इश्क़ की कहानी है। तनवीर अपनी कोठी से बारिश में नहाती हुईं दो लड़कियों को देखता है। उनमें से एक लड़की पर फिदा हो जाता है। एक दिन वो लड़की उससे कार में लिफ़्ट मांगती है और तनवीर को ऐसा महसूस होता है कि उसे अपनी मंज़िल मिल गई है लेकिन बहुत जल्द उसे मालूम हो जाता है कि वो वेश्या है...

आवाज

एप में पढ़ें
जानिए अपना दैनिक राशिफल बेहतर अनुभव के साथ सिर्फ अमर उजाला एप पर
अभी नहीं

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00