लोकप्रिय और ट्रेंडिंग टॉपिक्स

Param Vir

परमवीर

Specials

अमर उजाला आवाज में सुनिए परमवीर. इस शो में बात होगी देश के वीर सपूतों की जिन्होंने अपने अदम्य साहस से दुश्मन के छक्के छुड़ा दिए.

परमवीर: 19 साल में परमवीर चक्र पाने वाला वो फौजी

1.0x
  • 1.5x
  • 1.25x
  • 1.0x
10
10
X

सभी 21 एपिसोड

कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना किसी भी कीमत पर सेक्टर द्रास की टाइगर हिल पर अपना कब्ज़ा चाहती थी. इसी के तहत 4 जुलाई ,1999 को 18 ग्रेनेडियर्स के एक प्लाटून को टाइगर हिल के बेहद अहम तीन दुश्मन बंकरों पर कब्ज़ा करने का दायित्व सौंपा गया था

13 अक्टूबर, 1948. ये वो तारीख़ है, जब पाकिस्तान ने टिथवाल की रीछमार गली से हमला कर भारतीय सेना को पीछे धकेलने की कोशिश की. मगर मौके पर मौजूद सिख रेजिमेंट के एक जवान ने उनकी इस कोशिश को सफल नहीं होने दिया...

20 साल की उम्र में अब्दुल हमीद ने भारतीय सेना की वर्दी पहनी, 1965 की जंग में अदम्य वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र दिया गया

आजादी के बाद जब पाकिस्तान ने अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देना शुरू किया, तो भारतीय सैनिकों ने उसका न केवल डटकर मुकाबला किया, बल्कि उसे शिकस्त का एक ऐसा जख्म दिया, जो आज तक नहीं भर पाया है...

1948 की गर्मियों में जम्मू-कश्मीर ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तानी सेना और कबाइलियों ने संयुक्त रूप से टीथवाल सेक्टर में भीषण आक्रमण किया. इस हमले में दुशमन ने भारतीय सेना को किशनगंगा नदी पर बने अग्रिम मोर्चे छोड़ने पर मजबूर कर दिया...

जम्मू-कश्मीर के काद्याल गांव की एक पहचान यह भी है कि वहां 6 जनवरी 1949 को बाना सिंह का जन्म हुआ था. आम बच्चों की तरह छोटी उम्र से ही उनकी नन्हीं आंखों में कुछ सपने थे. भारतीय सैनिक बनना इन्हीं में से एक था

हार से बौखलाए विरोधी ने 6 फरवरी को टैनधार पर हमला कर दिया. जहां पाकिस्तान का मुकाबला जदुनाथ सिंह से हुआ, वही जदुनाथ सिंह, जिन्होंने मुठ्ठीभर साथियों के साथ विरोधियों पर जमकर गोलियां बरसाई और अंतत: भारत की जीत सुनिश्चित करते हुए शहीद हो गए

चीन के 200 सैनिकों ने दो बार हमला किया। सूबेदार जोगिंदर सिंह और उनके केवल 20 साथी सैनिकों ने दोनों बार खदेड़ा। तीसरी बार भी आ गए चीनी। इधर गोली खत्म थी। बिना हथियार के ही भिड़ गए। बलिदान ऐसे हुए कि चीनियों को भी सम्मान देना पड़ा।

कौन थे वो कबाइली जिन्होंने स्वतंत्र भारत पर पहला हमला किया, और कैसे मिला हमें हमारा पहला परमवीर... इस खास श्रृंखला में हम जानेंगे कहानी उन शहीदों की जो कहलाए परमवीर...

पॉइंट 4875 और फ्लैट टॉप, इन दोनों चौकियों को शत्रु से मुक्त कराने का 17 जाट रेजीमेंट का एक प्रयास असफल रहा था, अब भारतीय सेना के सामने बड़ी चुनौती थी। तब जैक राइफल को इन दोनों चौकियों को जीतने का दायित्व सौंपा गया।

आवाज

Election
एप में पढ़ें
जानिए अपना दैनिक राशिफल बेहतर अनुभव के साथ सिर्फ अमर उजाला एप पर
अभी नहीं

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00