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प्रलय: जब भारत में पहली बार हुआ आपदा प्रबंधन

9 December 2022

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ये बात है 142 साल पुरानी है... नैनीताल का मल्लीताल आज जैसा दिखता है, शायद वो कभी वैसा था नहीं. 18 सितंबर,1880 का वो दिन नैनीताल के इतिहास में सबसे दर्दनाक दिनों में से एक था, जिसके बारे में लोग आज भी सोचते हैं तो कांप उठते हैं।  

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सभी 55 एपिसोड

तुर्की और पड़ोसी देशों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं। नूर्दगी से 23 किलोमीटर पूर्व की ओर यह झटके महसूस किए गए।

26 जुलाई को बांद्रा तलाब में पानी भर गया था। तालाब के पास सड़कों पर मछलियां तैर रही थीं। इस बारिश ने कभी न रुकने वाले इस शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया था।

हादसे के वक्त विमान में कुल 97 लोग सवार थे, जिनमें से 35 लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। कुछ लोगों ने हादसे के वक्त एयरशिप के कूदकर अपनी जान बचाई थी।
 

उपहार सिनेमा भीषण अग्निकांड में 27 साल पहले किसी ने अपना जवान लड़का खोया तो किसी ने अपनी जवान लड़की। इस आग में न केवल 59 लोगों की जान गई थी, बल्कि उनके परिजन आज भी तिल-तिलकर मरने को मजबूर हैं
 

हिटलर, ना ये नाम नया है ना ही इस नाम के साथ जुड़ी भयावह और दिल दहला देने वाली कहानियां....यहूदियों के लिए हिटलर की नफरत होलोकॉस्ट के रूप में सामने आई।
 

शुरुआती सालों में इस महामारी को ग्रेट मोर्टेलिटी के नाम से जाना जाता था. ब्यूबॉनिक प्लेग से पीड़ित व्यक्ति के कांख और जांघों पर काले रंग के बड़े-बड़े फोड़े बन जाते थे।

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की एक रिपोर्ट के हिसाब से जम्मू-कश्मीर में आई ये बाढ़ यहां बीते 60 सालों में आई सबसे बड़ी मौसमी आपदा है। 
 

ये दुर्घटना शायद इतनी बड़ी नहीं होती इसलिए इनकी तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता। लेकिन सन् 1975 में एक ऐसा खदान हादसा हुआ जिसने पूरे भारत को हिला कर रख दिया। इस हादसे में कुछ मिनटो में 300 से ज्यादा लोगों ने जल समाधि ले ली।
 

26 दिसंबर 2004 को हिंद महासागर में आई सूनामी लहर ने भारत समेत दुनिया के कई देशों में भारी तबाही मचाई थी. इस त्रासदी ने इतिहास के पन्नों पर ऐसा खौफ पैदा किया कि सूनामी का नाम सुनते ही लोगों में दहशत फैल जाती है।
 

ये हादसा इसलिए भी आज तक याद किया जाता है क्योंकि अंतरिक्षयान के बेस से उड़ान भरने के समय वहां टेलीविजन स्टेशंस के कई दल मौजूद थे. इस घटना और इससे जुड़े सभी दृश्यों का सीधा प्रसारण टेलीविजन पर हो रहा था।

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