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किसान आंदोलन स्थगित: पंजाब के संगठन 11 दिसंबर को करेंगे वापसी, 15 जनवरी को समीक्षा बैठक करेगा संयुक्त किसान मोर्चा

सोनीपत में पिछले एक साल से चल रहा किसान आंदोलन स्थगित कर दिया गया है। गुरुवार को आधिकारिक पत्र मिलने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक हुई। इसके बाद गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि 11 दिसंबर को किसानों की वापसी हो जाएगी। 11 को ही विजय दिवस मनाया जाएगा। 13 दिसंबर को किसान श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेकने जाएंगे। 15 जनवरी को दिल्ली में संयुक्त किसान मोर्चा की समीक्षा बैठक होगी। चढ़ूनी ने एलान किया कि अब किसी भी पार्टी या उद्योग का बहिष्कार नहीं किया जाएगा। किसान आंदोलन में बंद पड़े टोल भी खोल दिए जाएंगे।



वहीं इससे पहले पंजाब की 32 जत्थेबंदियों ने बैठक कर कहा है कि 11 तारीख को उनकी आंदोलन से वापसी हो जाएगी। 15 तक सभी टोल से धरना हटा लिया जाएगा। लगातार खींचतान, मैराथान बैठकों की दौर के बाद आखिर किसानों के चेहरे पर खुशी दिखाई दी। लंबित मांगों को माने जाने के प्रस्ताव को सुधार के साथ सरकार ने बुधवार को मोर्चा की कमेटी के पास भेजा था। कमेटी ने प्रस्ताव के सभी बिंदुओं पर मोर्चा की कुंडली बॉर्डर पर चली बैठक में रखा, जिस पर सभी किसान नेताओं ने हामी भर दी। एसकेएम की 5 सदस्यीय कमेटी के सदस्यों गुरनाम सिंह चढूनी, शिवकुमार कक्का, युद्धवीर सिंह, बलबीर सिंह राजेवाल व अशोक धवले ने पत्रकारवार्ता कर इसकी जानकारी दी थी। 

मोर्चा की अहम बैठक के बीच किसानों ने सामान समेटना किया शुरू

किसानों व सरकार के बीच सहमति बनने के बाद कुंडली बॉर्डर पर आज संयुक्त किसान मोर्चा की अहम बैठक चल रही है, जिसमें आंदोलन वापसी का निर्णय लिया जा सकता है। वहीं, बॉर्डर पर सालभर से धरनारत किसानों ने अपना सामान, तंबू व झोंपड़ियां समेटने शुरू कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि वे मोर्चा के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। आदेश मिलते ही यहां से खुशी-खुशी अपने घरों को रवाना होंगे। इससे पहले कुंडली बॉर्डर पर सबसे पहले मोर्चा द्वारा गठित 5 सदस्यीय कमेटी की बैठक हुई। फिर मोर्चा की 9 सदस्यीय कमेटी ने बैठक की और अब संयुक्त किसान मोर्चा के सभी सदस्यों की बैठक शुरू हो चुकी है। उम्मीद की जा रही है कि आज मोर्चा आंदोलन वापसी या स्थगित किए जाने का निर्णय ले सकता है। 

वापसी की प्रक्रिया में लगेगा समय

किसान मोर्चों से किसानों की वापसी की प्रक्रिया दो-तीन दिन चलने की उम्मीद है। सामान पूरी तरह से समेटने में 24 से 36 घंटे का समय लग सकता है। कई जगह पर पक्के निर्माण भी किसानों ने बना लिए थे, जिन्हें खुद ही गिरा कर जाने का वायदा किसानों ने किया था।

सरकार व किसानों के बीच सकारात्मक दिख रहा माहौल

आखिरकार सरकार के साथ सभी मांगों पर किसानों की सहमति बन ही गई। 5 सदस्यीय कमेटी के गठन के बाद इसका रास्ता बन गया था। सरकार ने लगातार कमेटी से संपर्क बनाए रखा और सभी मांगों के हर बिंदु पर मंथन हुआ। सरकार ने सकारात्मक रवैया दिखाया तो किसानों के तेवर भी नरम पड़ गए। एमएसपी पर कमेटी को लेकर मोर्चा की शर्त को मान लिया गया तो वहीं हरियाणा, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश सरकार ने केस वापस लेने पर सहमति जता दी है। वहीं, सरकार की मांग पर किसानों ने लखीमपुर मामले में केंद्रीय मंत्री की बर्खास्तगी से संबंधित मांग को प्रस्ताव से हटा लिया था।

 सरकार का आधिकारिक पत्र, जिसपर बनी सहमति  

  • 1. एमएसपी पर प्रधानमंत्री ने स्वयं और बाद में कृषि मंत्री ने एक कमेटी बनाने की घोषणा की है। जिस कमेटी में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और किसान संगठनों के प्रतिनिधि और कृषि वैज्ञानिक शामिल होंगे। यह स्पष्ट किया जाता है कि किसान प्रतिनिधियों में एसकेएम के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे और इसमें जरूरी होगा कि सभी किसानों को एमएसपी मिलना किस तरह सुनिश्चित किया जाए। सरकार वार्ता के दौरान पहले भी आश्वासन दे चुकी है कि वर्तमान में जिस राज्य में जिस फसल की एमएसपी पर जितनी सरकारी खरीद हो रही है, उसे घटाया नहीं जाएगा।
  • 2. किसान आंदोलन के समय के केसों पर यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा सरकार ने तत्काल केस वापस लेने के लिये पूर्णतया सहमति दी है।
  • 2-ए. किसान आंदोलन के दौरान भारत सरकार के संबंधित विभाग और एजेंसियों तथा दिल्ली सहित सभी संघ शासित क्षेत्र में आंदोलनकारियों और समर्थकों पर बनाए गए सभी केस भी तत्काल प्रभाव से वापस लेने की सहमति है। भारत सरकार अन्य राज्यों से अपील करेगी कि इस किसान आंदोलन से संबंधित केसों को अन्य राज्य भी वापस लेने की कार्रवाई करें।
  • 3. मुआवजे पर हरियाणा और यूपी सरकार ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है।
  • उपरोक्त दोनों विषयों के संबंध में पंजाब सरकार ने भी सार्वजनिक घोषणा की है।
  • 4. बिजली बिल में किसान पर असर डालने वाले प्रावधानों पर पहले सभी स्टेकहोल्डर्स/संयुक्त किसान मोर्चा से चर्चा होगी। उससे पहले इसे संसद में पेश नहीं किया जाएगा।
  • 5. पराली के मुद्दे पर भारत सरकार ने जो कानून पारित किया है उसकी धारा में क्रिमिनल लाइबिलिटी से किसानों को मुक्ति दी है।

बोले किसान : किसानों की पांच सदस्यीय कमेटी ने संशोधित प्रस्ताव पर कहा कि इसे लेकर सहमति बन गई है। हालांकि इसके लिए गुरुवार को अधिकृत पत्र देने की मांग की है। समिति सदस्य अशोक धवले ने कहा कि नया प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हो गया है। हालांकि उन्होंने कहा कि हम चेतावनी देते हैं कि यह अब तक केवल प्रस्ताव है। यह गुरुवार तक सरकारी पत्र के रूप में मिलना चाहिए। 
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किसान आंदोलन के बारे में जानकारी देते गुरनाम चढ़ूनी। किसान आंदोलन के बारे में जानकारी देते गुरनाम चढ़ूनी।

किसान आंदोलन: पंजाब की राजनीति में हमेशा के लिए आया बदलाव, विधानसभा चुनाव में दिखेगा असर

किसान आंदोलन अब समाप्त हो गया है। सरकार से सभी मांगों पर लिखित सहमति मिलने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने इसकी औपचारिक घोषणा कर दी। सबसे लंबे आंदोलनों में शामिल इस प्रदर्शन से सबसे ज्यादा असर पंजाब की राजनीति पर पड़ेगा। पंजाब में कुछ ही समय बाद विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में किसान आंदोलन से पंजाब को कुछ ऐसे चेहरे मिले हैं जो प्रदेश की राजनीति पर असर डालेंगे। ये वो किसान हैं, जिन्होंने महीनों बिना मौसम की परवाह किए अपने हक की लड़ाई लड़ी। इस आंदोलन से पंजाब के ग्रामीण इलाकों से एक नई तरफ की जागरूकता आई। एक तरह से सोनीपत में बॉर्डर पर चल रहे मोर्चे राजनीति की पाठशाला बने।  

राजनीति को लेकर बढ़ी समझ

किसान आंदोलन से लोगों में अपने अधिकारों व देश की राजनीति को लेकर समझ बढ़ी है। पंजाब के लोगों के असली हीरो के रूप में भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के प्रदेश प्रधान जोगिंदर सिंह उगराहां, डॉ. दर्शन पाल मिले। इन सभी ने दिल्ली के बॉर्डरों पर करीब एक साल से शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन चलाकर केंद्र सरकार को झुका दिया। इससे साबित हुआ है कि शांतिपूर्ण आंदोलन से चमत्कार किए जा सकते हैं।

इन नेताओं को दिल्ली के मोर्चों में सुन-सुन कर, वहां राशन सामग्री जुटाने से लेकर कई व्यवस्थाओं को संभालते-संभालते गांवों के नौजवान यहां तक की महिलाओं के रूप में पंजाब में नई लीडरशिप पैदा हुई है। राजनीतिक माहिरों का मानना है कि इससे जहां देश का लोकतंत्र मजबूत होगा। वहीं राजनीति में परिवारवाद पर रोक लगने के साथ-साथ लोगों के असली हीरो अब आगे आएंगे। इस किसान आंदोलन में लोगों में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता तो बढ़ाई ही है, वहीं अब वह राजनीति में भी दिलचस्पी लेने लगे हैं। उन्हें पता लग गया है कि अगर बदलाव लाना है, तो वोट एक बड़ी ताकत बन सकता है।

अन्य राज्यों के किसानों को पता चला एमएसपी का महत्व 

पंजाबी यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर जसविंदर सिंह बराड़ के मुताबिक इस आंदोलन के बाद अब पंजाब व हरियाणा के अलावा देश के अन्य राज्यों के किसानों में भी एमएसपी के महत्व के बारे में जागरूकता आ गई है। इसलिए अब अन्य राज्यों से भी एमएसपी देने की मांग उठ रही है। साथ ही अब पूरी उम्मीद है कि पंजाब व हरियाणा के अलावा अन्य राज्यों की क्षेत्रीय पार्टियां गेहूं व धान के अलावा फल व सब्जियों पर भी एमएसपी देने के वादे को अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करें। क्योंकि एमएसपी मिलने से किसान गेहूं व धान की परंपरागत खेती चक्र से बाहर निकल सकेंगे। साथ ही इससे खेती व्यवसाय को भी फायदा होगा।
 
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पंजाब विधानसभा चुनाव: अकाली दल में शामिल हुए सुच्चा सिंह छोटेपुर, सुखबीर बादल ने बटाला से बनाया प्रत्याशी

आम आदमी पार्टी से निष्कासित सुच्चा सिंह छोटेपुर गुरुवार को शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए। सुखबीर बादल ने चंडीगढ़ में पार्टी मुख्यालय में छोटेपुर को पार्टी की सदस्यता दिलाई। पार्टी में शामिल होते ही सुखबीर ने उन्हे बटाला से पार्टी प्रत्याशी घोषित कर दिया है।

इससे पहले सुच्चा सिंह आम आदमी पार्टी के संयोजक रहे हैं। आप ने 2014 का लोकसभा चुनाव उन्हीं की अगुवाई में लड़ा था। 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले आप के प्रदेश संयोजक रहे सुच्चा सिंह छोटेपुर पर टिकट के बदले पैसे लेने के आरोप लगे थे। उस समय उनका एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें संयोजक पद से हटाकर पार्टी से निष्कासित कर दिया था। जिसके बाद उनकी शिअद में शामिल होने की चर्चाएं होती रहीं।

गुरुवार को इन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए सुच्चा सिंह शिअद में शामिल हो गए। पार्टी की सदस्यता दिलाते समय सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि वह अच्छे इंसान के साथ ही पंजाब हितैषी हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी को उन्हीं ने स्थापित किया, लेकिन आप ने उन्हें धोखा दे दिया। सुखबीर सिंह बादल ने उन्हें बटाला से उम्मीदवार बनाने की घोषणा कर दी है।
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कैटरीना-विक्की की शादी आज: मुंबई नहीं, पंजाब के होशियारपुर के इस गांव की बहू बनेंगी अभिनेत्री

फरीदकोट: महिला शूटिंग खिलाड़ी ने खुद को गोली से उड़ाया, नेशनल चैंपियनशिप में मेडल न मिलने से थी निराश

विक्की कौशल के पिता शाम कौशल मूल रूप से पंजाब के हैं।
फरीदकोट के हरिन्दा नगर में बुधवार रात नौजवान अंतरराष्ट्रीय शूटिंग खिलाड़ी ने अपनी शूटिंग गन से ही गोली मारकर आत्महत्या कर ली। मृतका की पहचान 19 वर्षीय खुशकीरत कौर के रूप में हुई। वह हाल ही में पटियाला में आयोजित नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में भाग लेकर लौटी थी और कोई भी मेडल न मिलने के कारण मानसिक तौर से परेशान हो गई थी। 

बताया जा रहा है कि बुधवार रात वह अपने घर में दादी के साथ सो रही थी लेकिन उसके इस कदम का दादी को कुछ पता नहीं चल पाया। गुरुवार सुबह परिवार ने जब देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। खुशकीरत ने शूटिंग गन से अपनी कनपटी पर गोली मारी हुई थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद थाना कोतवाली पुलिस ने मृतका के शव को कब्जे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। 

परिवार से जुड़े हॉकी कोच हरबंस सिंह ने बताया कि खुशकीरत कौर ने पिछले साल हुई नेशनल चैंपियनशिप में कुल 11 मेडल जीते थे जिसके बाद उसका विश्व कप के लिए भी चयन हुआ था लेकिन विश्व कप में वह कोई भी मेडल नहीं जीत पाई थी। पिछले सप्ताह पटियाला में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप में भी कोई मेडल जीत ना पाने से हताश होकर उसने यह कदम उठाया।
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कुन्नूर हेलीकॉप्टर हादसा: तरनतारन के नायक गुरसेवक सिंह ने भी गंवाई जान, आज पार्थिव शरीर पहुंचेगा गांव

विधानसभा हलका खेमकरण के गांव दोदे सोढियां में बुधवार की शाम को जलते चूल्हों की आग उस समय ठंडी पड़ गई जब रात 7.53 मिनट पर आर्मी हेडक्वार्टर से सूचना मिली कि तमिलनाडू में हेलिकाप्टर हादसे के दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत सहित 13 सैनिकों की जान चली गई है। इनमें गांव दोदे सोढियां निवासी भारतीय सेना के 31 साल के नायक गुरसेवक सिंह भी शामिल हैं।

यह खबर सुनते ही गुरसेवक सिंह के पिता काबल सिंह सुध बुध खो बैठे। वे बेटे को याद कर बार-बार कह रहे थे कि ओए सेवका हुण सुणदा क्यों नई, आह वेख तेरी वोहटी जसप्रीत किवें गुम्म पई आ। तू तां कंहदा सी मैं अगले हफ्ते घर आवांगा, पर आह की माड़ी खबर सुण लई। वे गुरसेवका तू इक वार आखदे कि ऐह सब झूठ है। 

इस दौरान काबल सिंह को उनके चार बेटे और दो बेटियां चुप कराने का प्रयास करते रहे। गांव के सरपंच गुरबाज सिंह, ग्रामीण मंदीप सिंह और अंग्रेज सिंह ने बताया कि नायक गुरसेवक सिंह सीडीएस जनरल बिपिन रावत के साथ बतौर पर्सनल सिक्योरिटी आफिसर (पीएसओ) तैनात थे। सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान भी वे जनरल रावत के साथ थे। 

सुबह कॉल करके कहा था, मैं तैन्नू नाल लै जावांगा 

नायक की पत्नी जसप्रीत कौर को पति की मौत के बारे में कुछ नहीं बताया गया है। काबल सिंह ने बताया कि करीब दो माह से बीमार चल रही जसप्रीत कौर से मोबाइल पर बातचीत में गुरसेवक ने कहा था कि जसप्रीत फिक्र न कर तूं ठीक हो जांवेगी, सिमरत, गुरलीन और फतेह नू चंगी तरां पड़ावी, ऐवें फिक्र न करिया कर तू ठीक हो जावेंगी, मैं अगले हफ्ते छुट्टी ले के आवांगा अते तैनूं नाल लेके जावांगा। आर्मी अस्पताल विच्च वदिया इलाज हुंदा ए।

घर में लगी भीड़ से हैरान है पत्नी 

गुरसेवक सिंह की पत्नी जसप्रीत कौर बार-बार अपने ससुर काबल सिंह से पूछ रही थी कि आखिर घर में इतनी भीड़ क्यों हो रही है। जसप्रीत कौर अपनी नौ वर्षीय बच्ची सिमरत, सात वर्षीय बेटी गुरलीन और साढ़े चार साल के बेटे गुरफतेह सिंह के साथ हैरानी से सब को देख रही थी। जसप्रीत कौर का ये व्यवहार देखकर काबल सिंह फफक रो पड़े।

आज गांव पहुंचेगा पार्थिव शरीर 

नायक गुरसेवक सिंह की शहादत पर खडूर साहिब के सांसद जसबीर सिंह गिल, खेमकरण के विधायक सुखपाल सिंह भुल्लर, तरनतारन के विधायक डा. धर्मबीर अग्निहोत्री ने परिवार से हमदर्दी जताई है। डीसी कुलवंत सिंह, एसएसपी हरविंदर सिंह विर्क ने बताया कि गुरसेवक सिंह की शहादत के बारे में उसकी पत्नी जसप्रीत कौर को अवगत नहीं करवाया गया। हालांकि आर्मी हेडक्वार्टर से जानकारी मिली है कि आज गुरुवार शाम तक गुरसेवक सिंह का पार्थिव शरीर गांव में पहुंच जाएगा।
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बटाला में वारदात: आईलेट्स सेंटर के बाहर छात्र गुटों में फायरिंग, कंधे पर गोली लगने से युवक घायल

पंजाब के बटाला में जालंधर रोड पर स्थित एक आइलेट्स सेंटर के बाहर बुधवार दोपहर डेढ़ बजे दो छात्र पक्षों के बीच फायरिंग हो गई। इस फायरिंग में एक युवक को कंधे पर गोली लगी है। घायल युवक को एक निजी अस्पताल ले जाया गया जहां उसका उपचार चल रहा है। पुलिस के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच किसी लड़की को लेकर तकरार हुई थी। वहीं फायरिंग की सूचना मिलते ही थाना सिविल लाइन की पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।

गांव सरवाली के रहने वाले रणजीत सिंह ने बताया कि उसका भांजा लवप्रीत सिंह काफी समय से उसके पास रहता है। उसके भांजे का झगड़ा सेंटर में पढ़ते एक अन्य छात्र से हो गया था। वह अपने बेटे लवनीत सिंह के साथ बटाला पहुंचा और उसने अपने भांजे और दूसरे लड़के के बीच समझौता करवा दिया। इसके बाद वह अपने भांजे के साथ घर जा रहा था। इसी दौरान फोन आया कि उसके बेटे लवनीत सिंह पर दूसरे पक्ष के युवकों ने गोली चला दी है और गोली लवनीत सिंह के कंधे पर लगी है।  

थाना सिविल लाइन के एसएचओ अमोलक सिंह ने बताया कि आइलेंट्स सेंटर के बाहर दो पक्षों के बीच लड़की को लेकर कहासुनी हो गई थी। इसी तकरार में एक पक्ष ने दूसरे पक्ष के एक युवक पर गोली चला दी। गोली लवनीत सिंह के कंधे पर लगी है। घायल का उपचार चल रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल कर आरोपियों की पहचान करने में लगी है। बयान दर्ज करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। 
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पंजाब में चुनाव, मंदिर में नेताजी: राजनीतिक दलों में लगी 38 फीसदी हिंदू मतदाता को अपनी तरफ खींचने की होड़

पंजाब की सियासत पर बारीकी से नजर रखने वालों को भी यह याद नहीं कि इससे पहले कभी राज्य में चुनाव के मौके पर मंदिरों को इतनी अहमियत मिली थी या नहीं, जितनी इन दिनों मिल रही है। सुखबीर हो या केजरीवाल, नवजोत सिंह सिद्धू या सीएम चन्नी, सभी नेतागण मंदिरों में घंटियां बजाने और आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं। पंजाब के चुनाव में इस बार नेताओं के बीच मंदिरों में घंटियां बजाने की जो होड़ दिख रही है, उसकी वजह यह है पंजाब में 38 फीसदी हिंदू मतदाता।

भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रधान मनोरंजन कालिया का कहना है कि अकाली दल, आप व कांग्रेसी नेताओं के मंदिरों में नतमस्तक होने का कारण 38 फीसदी हिंदू मतदाता है। यह राजनीति से प्रेरित है क्योंकि चुनाव सिर पर आ चुके हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी का समर्थन कट्टरपंथियों ने किया था, अब अपनी छवि सुधारने के लिए हिंदू मतदाता याद आ रहे हैं। 

केदारनाथ धाम भी पहुंचे चन्नी

पंजाब का चुनाव मुख्य रूप से सिखों को केंद्रित कर लड़ा जाता रहा है लेकिन इस बार हिंदू और एससी मतदाता भी केंद्र में हैं। खासकर नेताओं द्वारा मंदिर में माथा टेकने की होड़ मची हुई है। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पिछले दिनों केदारनाथ धाम के दर्शन कर लौटे हैं। वह जालंधर स्थित प्रतिष्ठित शक्तिपीठ श्री देवी तालाब मंदिर में भी माथा टेकने जा चुके हैं। 

भगवान परशुराम तपोस्थली को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए दस करोड़ रुपये भी जारी कर उन्होंने हिंदू मतदाताओं का दिल जीतने की कोशिश की है। भगवान परशुराम की माता रेणुका से जुड़े स्थल के विकास के लिए उन्होंने 75 लाख रुपये देने की बात कही। यह घोषणा भी की कि महाभारत, रामायण, गीता पर शोध कार्य के लिए पंजाबी यूनिवर्सिटी में एक पीठ का गठन किया जाएगा। यह कहना भी नहीं भूले कि वह संस्कृत भाषा सीखेंगे और फिर महाभारत पर पीएचडी करेंगे। चन्नी चार दिन पहले श्री बगलामुखी माता के दर्शन कर लौटे हैं।

माता चिंतपूर्णी के दर्शन कर आए सुखबीर 

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ चिंतपूर्णी मंदिर गए। उन्होंने वादा भी किया कि सरकार बनने पर वह दोबारा दर्शन के लिए आएंगे। वह राजस्थान के सालासर में बालाजी मंदिर भी जा चुके हैं। वह अपने तमाम साथियों को बस में साथ लेकर सालासर बाला जी मंदिर गए और वह माता अंजनी मंदिर भी गए। जालंधर में श्री देवी तालाब मंदिर भी उन्होंने हाजिरी लगाई और फिर पंजाब के ही राजपुरा में भगवान शिव के मंदिर में दर्शन किए। इन सारे मंदिरों में दर्शन करते हुए अपने फोटो उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर शेयर भी किए। उनकी पार्टी की तरफ से यह बताया भी गया कि एक दर्जन और मंदिरों में दर्शन करने के कार्यक्रम बन रहा है।
 

देवी तालाब मंदिर पहुंचे केजरीवाल

पंजाब के चुनाव में हिस्सा ले रही आम आदमी पार्टी के दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी अक्तूबर में जालंधर स्थित देवी तालाब मंदिर गए थे। उन्होंने माता के जागरण में भी हिस्सा लिया था। पीपीसीसी प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू पिछले दिनों परिवार के साथ माता वैष्णो देवी के दरबार में गए और वहां से आशीर्वाद लिया। सिद्धू की लगातार फोटो मंदिरों में माथा टेकने की सोशल मीडिया पर अपलोड हो रही हैं। 

अब बदल रही है पंजाब में सियासत 

पंजाब में 25 साल पुराना अकाली-भाजपा गठबंधन टूट चुका है और अकाली दल बसपा के हाथी पर सवार है। कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस से अलग हो गए हैं। सिद्धू प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हो चुके हैं। एससी चेहरा चन्नी सीएम हो गए हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह के नई पार्टी बनाकर बीजेपी के साथ चुनाव लड़ने का फाइनल कर चुके हैं। तमाम नेता हिंदुओं के विश्वास को बनाए रखने को मंदिरों का सहारा लेने को मजबूर हो गए हैं। इन सबके बीच अकाली दल के लिए चुनौती खड़ी हो सकती है। बीजेपी से अलग हो जाने के बाद अकाली दल के लिए हिंदू मतदाताओं का भरोसा जीतना सबसे बड़ी चुनौती है। हिंदू वोटों के नुकसान को रोकने के लिए ही अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल मंदिर-मंदिर माथा टेक रहे हैं। 

आम आदमी पार्टी भी 2017 की पुनरावृत्ति नहीं चाहती है। 2017 में आप से हिंदू मतदाता दूर हो गया था क्योंकि आप पर आरोप लगा था कि पार्टी के नेता कट्टरपंथियों के हिमायती हैं और चुनाव में विदेशों में बैठे कट्टरपंथी नेता ही उनको फंडिंग कर रहे हैं। यही वजह है कि हिंदुओं की बहुसंख्यक सीटों से आप का बुरा हाल हुआ। पठानकोट से लेकर होशियारपुर, जालंधर सिटी, अमृतसर शहरी और लुधियाना शहरी से आप का एक भी उम्मीदवार जीत नहीं पाया। 
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पंजाब विधानसभा चुनाव: कृषि कानून वापसी के बाद पुराना जनाधार ढूंढ रही भाजपा, कैप्टन से होगा बराबरी का गठजोड़  

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के साल भर चले आंदोलन के कारण पंजाब में अब भाजपा अपनी पुरानी साख तलाशने को मजबूर है। साल भर पार्टी के नेताओं को जहां राज्य में लोगों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा वहीं किसान आंदोलन के चलते पार्टी को अपना 24 साल पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) का साथ भी गंवाना पड़ा। अब पंजाब भाजपा ने सूबे की सभी 117 सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ने का एलान तो कर दिया है लेकिन बीते एक साल के दौरान खिसके जनाधार को फिर से उभारने में पार्टी को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

पंजाब में भाजपा को शहरी वोटरों की पार्टी ही माना जाता रहा है जबकि शिअद के साथ गठबंधन में पार्टी को ग्रामीण वोटरों का साथ भी मिल जाता था। दोनों दलों ने मिलकर तीन बार पंजाब में सरकार बनाई और हर बार पांच-पांच साल के कार्यकाल पूरे किए। अकाली दल और भाजपा के बीच रिश्तों को राजनीतिक से ज्यादा सामाजिक सौहार्द के रूप में देखा जाता रहा था। लेकिन 2022 के चुनाव को लेकर स्थिति बदल चुकी है। आंदोलन की अवधि के दौरान भाजपा नेताओं का गांवों में प्रवेश करना कठिन हो गया था और नौ शहरों के नगर निगमों और 167 शहरों के म्युनिसिपल कमेटी चुनाव में तो पार्टी को उम्मीदवार तक नहीं मिल सके थे। यानी किसान आंदोलन ने प्रदेश में भाजपा का कॉडर भी तहस-नहस कर दिया है, जो शहरों में था और चुनाव प्रचार में अहम भूमिका निभाता रहा है।

भाजपा के लिए कैप्टन से ज्यादा अकाली नेता महत्वपूर्ण

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की नई पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस और शिअद से अलग हुए सीनियर टकसाली नेताओं के संयुक्त अकाली दल के साथ चुनावी गठबंधन की कवायद भी शुरू कर दी है। कैप्टन से भाजपा नेताओं की कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है और कैप्टन खुद भी इस गठबंधन के लिए उत्साहित हैं। दूसरी ओर, संयुक्त अकाली दल की कमान संभाल रहे सीनियर अकाली नेता सुखदेव सिंह ढींढसा ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

उन्होंने भाजपा नेता व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ इस संबंध में बैठक होने की बात तो कही है लेकिन कोई अंतिम फैसला होने के बारे में चुप्पी साधे हुए हैं। भाजपा कैप्टन से ज्यादा अकाली नेताओं को महत्व दे रही है। पार्टी शिअद के बागी अकालियों को साथ लेकर एक बार फिर जाट सिख वोटरों तक पहुंच बनाना चाह रही है जबकि कैप्टन के साथ गठबंधन में उसे फिलहाल कोई बड़ा लाभ होता दिखाई नहीं दे रहा। प्रदेश में जट सिख वोटरों की तादाद 18 फीसदी से ज्यादा है और अगर बेअदबी व कोटकपूरा का मामला गरमाया रहा तो अकाली दल बादल के लिए मुश्किलें खड़ी होना तय है।

किसान आंदोलन के लिए भाजपा पर गुस्सा बरकरार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों विवादित कानून वापस लिए जाने के बाद भले ही भाजपा पंजाब चुनाव में इसका लाभ मिलने की उम्मीद लगा रही है लेकिन जमीनी हालात अभी तक पार्टी के खिलाफ ही दिखाई दे रहे हैं। किसान नेता जगमोहन सिंह ने कहा कि एक साल तक किसानों के साथ उनके परिवारों ने भी बहुत तकलीफें झेली हैं। किसान अपने परिवारों सहित क्रमवार दिल्ली बार्डर पर आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए डटे रहे। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों में पंजाब के किसानों की संख्या सबसे ज्यादा है। सूबे से ग्रामीण ही नहीं, शहरी भी यह बात भूले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि किसान किसी भी कीमत पर भाजपा के साथ नहीं जुड़ेगा और भाजपा के साथ देने वालों को भी सबक सिखाया जाएगा।

पुराने टकसाली नेता नहीं आ रहे भाजपा के हाथ

भाजपा की गठबंधन की पेशकश को लेकर शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के प्रमुख नेताओं जत्थेदार रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा और प्रधान सुखदेव सिंह ढींढसा ने अब तक पत्ते नहीं खोले हैं। हालांकि बीते सोमवार को ही उनकी पार्टी ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करके आगामी विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तय करने की जिम्मेदारी सुखदेव सिंह ढींढसा को सौंप दी है। इससे पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ढींढसा से मिलकर गठबंधन के बारे में विचार विमर्श किया था। तब ढींढसा भी कैप्टन की पार्टी से जुड़ने को तैयार थे लेकिन जैसे ही कैप्टन ने भाजपा से गठबंधन करने का एलान किया, ढींढसा ने कैप्टन के साथ गठजोड़ से इनकार कर दिया था। देखना यह होगा कि ढींढसा के नेतृत्व में पुराने टकसाली नेता भाजपा का साथ देने को तैयार होंगे या नहीं। फिलहाल वे अकाली दल बादल से अलग होकर खुद को बेअदबी के आरोपों से निकालने की कोशिशों में जुटे हैं।

कैप्टन से दूर-दूर रह रही पंजाब भाजपा
अमित शाह के कैप्टन की पार्टी से गठबंधन संबंधी बयान आने तक पंजाब में भाजपा जहां अकेले सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटी थी, वहीं उसने कैप्टन के भाजपा के गठजोड़ संबंधी बयानों को भी अनसूना कर दिया था। कैप्टन बार-बार दिल्ली जाकर भाजपा नेताओं से मिलते रहे लेकिन प्रदेश भाजपा के किसी नेता ने न तो कैप्टन से मिलने का प्रयास किया और न ही कैप्टन के गठबंधन संबंधी बयानों पर कोई प्रतिक्रिया ही दी। अमित शाह के बयान के बाद अब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी ने शिअद के बजाय कैप्टन से हाथ मिलाना पसंद किया है। उन्होंने कहा कि शिअद ने गठबंधन में कभी भी भाजपा को बराबर का हिस्सेदार नहीं माना। भाजपा को हमेशा 23 सीटें दी जाती रहीं जबकि 94 सीटें शिअद अपने पास रखती रही। उन्होंने कहा कि कैप्टन के साथ गठबंधन में ऐसा नहीं होगा और भाजपा बराबरी की साझेदार पार्टी रहेगी।
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संबंधों का खून: पति को उकसाकर करवाया देवर का कत्ल, दोस्तों के आने से नाराज चाचा ने ली भतीजे की जान

पंजाब में कत्ल के दो मामले सामने आए हैं। बरनाला में मंगलवार रात पत्ती मोहर सिंह कस्बा भदौड़ में एक व्यक्ति ने अपने ही सगे भाई का कत्ल कर दिया। पुलिस को बयान में मेजर सिंह पुत्र हरनेक सिंह निवासी भदौड़ ने बताया कि उसके बडे़ लड़के हरपाल सिंह की शादी 2019 में गुरमीत कौर पुत्री सुखदेव सिंह निवासी गांव मलक चीमा जिला जगरांव से हुई थी। उसकी बहू गुरमीत कौर ने शादी के बाद उसके छोटे लड़के सुखजिंदर सिंह के साथ संबंध स्थापित कर लिए और फिर उसके साथ ही सहमति संबंध में रहने लगी। हरपाल सिंह इस पर एतराज करता था। इस करके उनके घर में अकसर झगड़ा रहने लगा। 

कुछ दिनों से उसकी बहू गुरमीत कौर फिर से अपने पति हरपाल सिंह के साथ रहने लग गई थी और सुखजिंदर सिंह के खिलाफ उसे भड़का रही थी। मंगलवार रात करीब 11 बजे उसकी बहू ने सुखजिंदर सिंह, जो चौबारे में ही रहता था, को नीचे अपने कमरे में बुला लिया। जहां उसका पति हरपाल सिंह मौजूद था। वहां दोनों भाइयों में झगड़ा हो गया और वे कमरे से बाहर आ गए। 

गुरमीत कौर ने हरपाल सिंह को कहा कि सुखजिंदर उसे रोज तंग करता है, इसको सबक सिखा दो। बहू ने बाहर से लोहे का सुआ हरपाल सिंह को देकर कहा कि यह इसे मार दो। हरपाल सिंह ने वह सुआ सुखजिंदर सिंह के सिर में मारा। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सुखजिंदर सिंह को कत्ल कर दोनों पति पत्नी घर से फरार हो गए। भदौड़ थाना प्रभारी रमनदीप सिंह ने बताया कि पति-पत्नी के खिलाफ इरादा कत्ल का मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है।
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