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Amritsar: अमृतसर में विश्व प्रसिद्ध लंगूर मेला शुरू, अपने बच्चों के साथ माथा टेकने पहुंचेंगे हजारों श्रद्धालु

संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: पंजाब ब्‍यूरो Updated Sun, 25 Sep 2022 10:48 PM IST
सार

जो लोग यहां संतान प्राप्ति के लिए मन्नत मांगते हैं, उनकी मुराद अवश्य पूरी होती है। संतान होने के बाद वह अपने बच्चों को लंगूर बनाकर माथा टिकवाते हैं। श्री बड़ा हनुमान मंदिर श्री रामायण कालीन युग का है। इस मंदिर में श्री हनुमान जी की बैठी अवस्था में मूर्ति है।

अमृतसर का श्री बड़ा हनुमान मंदिर।
अमृतसर का श्री बड़ा हनुमान मंदिर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार

अमृतसर में श्री दुर्ग्याणा तीर्थ के साथ ही स्थित है श्री बड़ा हनुमान मंदिर। 26 सितंबर से यहां पर विश्व प्रसिद्ध लंगूर मेला शुरू हो रहा है। इसके लिए श्री दुर्ग्याणा मंदिर प्रबंधक कमेटी ने तैयारियां मुकम्मल कर ली हैं। दस दिन तक चलने वाले इस मेले में शहरवासियों को ट्रैफिक समस्या से परेशानी न हो इसके लिए इस बार विशेष व्यवस्था की जा रही है। 



हजारों की संख्या में बच्चे लंगूर की वेशभूषा में अलग-अलग राज्यों के अलावा देश और विदेश से भी इस मंदिर में हर रोज दस दिनों तक नतमस्तक होने के लिए आते हैं। इस मेले की खासियत यह है कि यह नवरात्र के पहले दिन से दशहरे तक चलता है। इस मेले में बच्चों के पहनने के लिए लंगूर की ड्रेस लेने के लिए लोग बड़ी संख्या में आ रहे हैं।

क्या है मान्यता 

मान्यता है कि जो लोग यहां संतान प्राप्ति के लिए मन्नत मांगते हैं, उनकी मुराद अवश्य पूरी होती है। संतान होने के बाद वह अपने बच्चों को लंगूर बनाकर माथा टिकवाते हैं। श्री बड़ा हनुमान मंदिर श्री रामायण कालीन युग का है। इस मंदिर में श्री हनुमान जी की बैठी अवस्था में मूर्ति है। यही एक मंदिर है जहां पर हनुमान जी की बैठी अवस्था की मूर्ति है। कहा जाता है कि यह मूर्ति श्री हनुमान जी ने स्वयं बनाई थी। इसी मंदिर में हनुमान ने लव कुश की ओर से छोड़े गए शाही घोड़ों को प्राप्त किया था। लवकुश ने जब भगवान श्री राम जी की सेना के साथ युद्ध किया था, तब लवकुश ने इसी मंदिर में श्री हनुमान को वट वृक्ष से बांध दिया था। यह वट वृक्ष आज भी मंदिर परिसर में मौजूद है। 

जब हनुमान बंधन मुक्त हुए तो श्री राम ने उनको आशीर्वाद दिया कि जहां उनकी संतान का मिलन हुआ है वहां जो भी प्राणी संतान प्राप्ति की मनोकामना करेगा, पूरी होगी। इसलिए यहां परिवार संतान प्राप्ति की मनोकामना करते हैं। संतान होने के बाद बच्चे को लंगूर बनाकर यहां माथा टेकने के लिए लाते हैं।


यह बच्चे अपने माता-पिता के साथ लगातार दस दिन तक मंदिर में आकर माथा टेकते हैं। 10 दिन तक चलने वाले इस मेले का समापन दशहरे के अगले दिन होता है, जब ये लंगूर अपनी विशेष पोशाक को बड़ा हनुमान मंदिर में सौंप देते हैं। लड़के भगवान हनुमान को प्रसन्न करने के लिए 10 दिवसीय उपवास रखते हैं और ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। ये 10 दिवसीय उपवास दशहरा के बाद समाप्त होता है। दस दिन तक अलग अलग इलाकों से युवाओ की मंडलियां लंगूर की वेशभूषा धारण कर नगर कीर्तन के रूप में मंदिर में आती हैं और नतमस्तक होकर लौटती है। यह प्रक्रिया हर रोज दस दिन तक चलती है। 

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