अमृतसर: राजकीय सम्मान के साथ लेफ्टिनेंट कर्नल बाठ का अंतिम संस्कार, हेलीकॉप्टर हादसे के 13 दिन बाद मिला था पार्थिव शरीर

संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Tue, 17 Aug 2021 10:17 PM IST

सार

तीन अगस्त को पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा के पास सेना का एक ध्रुव हेलीकॉप्टर दुर्घटना का शिकार हो गया था। हादसा पंजाब और जम्मू-कश्मीर सीमा पर रणजीत सागर झील में हुआ था। तीन अगस्त की सुबह सेना का यह हेलीकॉप्टर गश्त कर रहा था तभी दुर्घटना का शिकार हो गया था। हादसे के 13 दिन बाद झील की तलहटी से लेफ्टिनेंट कर्नल अभयजीत सिंह बाठ का शव मिला। मंगलवार को राजकीय सम्मान के साथ पंजाब के अमृतसर में उनका अंतिम संस्कार किया गया। 
सलामी देते जवान।
सलामी देते जवान। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल अभयजीत सिंह बाठ का मंगलवार दोपहर अमृतसर के शहीदां साहिब के निकट श्मशान घाट में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। कर्नल के 13 वर्षीय बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। सेना की टुकड़ी ने अपने जांबाज अधिकारी को हथियार उलटे कर सलामी दी। इससे पहले सेना के अधिकारियों और लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। 
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पठानकोट के मामून कैंट से तिरंगे में लपेटकर लेफ्टिनेंट कर्नल का शव मंगलवार सुबह उनके पैतृक घर लाभ नगर लाया गया। सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल कुलदीप सिंह संधू, जो आदर्श नगर और लाभ नगर सोसायटी के अध्यक्ष हैं, ने बताया कि लेफ्टिनेंट कर्नल अभयजीत सिंह बाठ के पिता भी सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल थे, जिनका देहांत हो चुका है। 


लाभनगर के बाठ 2002 में सेना में भर्ती हुए और बाद में वे सेना के एविएशन विभाग में चले गए जो आजकल पठानकोट के मामून कैंट में तैनात थे। उन्होंने बताया कि तीन अगस्त को सुबह लेफ्टिनेंट कर्नल बाठ ने एक अन्य सैन्य अधिकारी के साथ मामून कैंट से टेस्ट फ्लाइट के लिए सेना के हेलीकॉप्टर से उड़ान भरी थी। 

उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद सुबह करीब 10:50 बजे उनका हेलीकॉप्टर रंजीत सागर झील में दुर्घटनाग्रस्त हो गया और 13 दिन बाद नौसेना के गोताखोरों ने अधिकारी का पार्थिव शरीर झील से 76 मीटर नीचे से निकाला था। लेफ्टिनेंट कर्नल कुलदीप संधू ने बताया कि लेफ्टिनेंट अभयजीत सिंह बाठ को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेडेशन अवार्ड और बहादुरी के लिए जीओसी नॉर्दर्न कमेडेशन अवार्ड मिला था। 

उन्होंने बताया कि इस हादसे के बाद आदर्श नगर और लाभ नगर के लोगों को बहुत दुख हुआ कि उनके इलाके का एक बहादुर अधिकारी नहीं रहा। उन्होंने बताया कि तीन अगस्त को दुर्घटनाग्रस्त हुए हेलीकॉप्टर में सवार अभी तक सेना के दूसरे अधिकारी का शव नहीं मिला और गोताखोर हेलीकॉप्टर के ब्लैक बाक्स को भी ढूंढने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि हादसे के कारणों का पता चल सके।

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