अमृतसर: मंडियों में सरकारी खरीद की व्यवस्था नहीं, शैलर मालिकों की हड़ताल, बारिश में धान भीगने से किसानों को नुकसान

संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर(पंजाब) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 24 Oct 2021 08:20 PM IST

सार

पश्चिमी विक्षोभ के कारण पंजाब के कई इलाकों बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी। बेमौसम बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचा है।
बारिश में भीगे धान को सुखवाते किसान
बारिश में भीगे धान को सुखवाते किसान - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन
ख़बर सुनें

विस्तार

बेमौसम बरसात से किसान दहशत में हैं। किसान कोशिशों के बावजूद मंडियों में बेचने के लिए लाई गई धान को भीगने से बचाने में असमर्थ रहे। एक तरफ मंडियों में सरकारी खरीददार का अता पता नहीं है तो दूसरी ओर शैलर मालिकों की हड़ताल से किसानों को अपनी धान तय कीमत से कम रेटों पर बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि हल्की बरसात भी किसानों को प्रति एकड़ 10 फीसदी नुकसान की चपत लगा जाती है।
विज्ञापन


मीरां चक्क गांव के किसान डॉ. सुखविंदरपाल सिंह ने बताया कि वह शनिवार को अपनी धान बेचने के लिए भगतां वाला दाना मंडी लाए थे। न तो सरकारी खरीद हुई और न ही प्राइवेट खरीद हुई। शनिवार को बारिश हो गई और उनकी धान भीग गई। अब वे 600 रुपये तक कम कीमत पर धान बेचने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि एसी हालत में किसानों को दस फीसदी तक नुकसान हो जाता है।


खियाला गांव के किसान लवप्रीत सिंह ने बताया कि बारिश से धान भीग गई। अब उन्हें इसे हवा लगवाने के लिए अलग से मजदूरी देनी पड़ी। धान के सूखने पर भी उन्हें पूरी कीमत मिलने की उम्मीद नहीं। तिरपाल की व्यवस्था नहीं है और इसका खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। लवप्रीत ने कहा कि वे सही दाम मिलने तक मंडी में इंतजार करेंगे पर इस पर भी उनका अलग से खर्च आएगा, जो उनका नुकसान है।

यह भी पढ़ें : पंजाब: बेमौसम बारिश से किसानों को हुए नुकसान का मुआवजा देगी सरकार, उप मुख्यमंत्री ओपी सोनी ने किया ऐलान

गहरी मंडी के सरपंच कुलदीप सिंह काला ने कहा कि 70 फीसदी तक धान मंडियों से उठाई जा चुकी है। बची धान पर बारिश से किसानों को 20 फीसदी से ज्यादा का नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि सरकार को सर्वे करवाकर पता लगाना चाहिए कि किसानों का कितना नुकसान हुआ और प्रभावित किसानों को मुआवजा देना चाहिए।

बरनाला से शैलर के लिए धान लेने पहुंचे ट्रांसपोर्टर नायब सिंह ने बताया उन्हें कहा गया है कि जल्दी से जल्दी धान को ट्रकों में लोड कर लें। धान भीगने पर शैलर मालिकों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00