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हिमाचल में बर्ड फ्लू की दस्तक, पठानकोट में 10 टीमें प्रवासी पक्षियों की करेंगी निगरानी

संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट (पंजाब) Published by: पंजाब ब्‍यूरो Updated Wed, 06 Jan 2021 05:35 PM IST
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पठानकोट में बढ़ी पक्षियों की निगरानी।
पठानकोट में बढ़ी पक्षियों की निगरानी। - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल के पौंग बांध वेटलैंड में बर्ड फ्लू से 2500 से ज्यादा विदेशी पक्षियों की मौत के बाद पंजाब के पठानकोट में वन्य जीव विभाग ने 10 टीमों का गठन कर दिया है। विभाग की टीमों को छाला पत्तन, रणजीत सागर बांध झील, गांव डल्ला, केशोपुर, मगरमुंदिया तथा मटम में तैनात किया गया है।
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इन टीमों को 12-12 घंटे ड्यूटी देने के आदेश हैं, जो इन इलाकों के आसपास रहकर परिंदों पर नजर रखेंगी। वहीं, संदिग्ध रूप से मृत पक्षी मिलने पर इसकी जानकारी तुरंत अधिकारियों को देने के लिए कहा गया है।


वन्य जीव विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन इलाकों में दिन-रात पेट्रोलिंग करके निगरानी की जा रही है। पठानकोट के अधिकारी भोपाल लैब से संपर्क में हैं और हर निर्देशों के तहत नजर बनाए हैं।

पिछले साल की अपेक्षा बढ़े माइग्रेटरी बर्ड
वन्य जीव विभाग के डिवीजनल फारेस्ट अफसर राजेश महाजन ने बताया कि केशोपुर छंब में विदेशी परिंदों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि हुई है। 2019 में इनकी संख्या 21985 के करीब थी, जबकि इस साल इनका आंकड़ा 23015 को पार कर चुका है। 16 जनवरी को आरएसडी और 17 को केशोपुर छंब में होने वाली इनकी वार्षिक गणना से पहले ही विभागीय आंकड़ों के मुताबिक इनकी संख्या काफी बढ़ी है। अगले सप्ताह इन परिंदों की संख्या में और इजाफा होने की संभावना है। यही कारण है कि वन्य जीव विभाग इनकी सुरक्षा के लिए कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं है।



सभी विभागों से संपर्क में वन्य जीव विभाग
डीएफओ वन्य जीव विभाग राजेश महाजन ने कहा कि 10 टीमें केशोपुर छंब समेत अन्य इलाकों में पूरी तरह से ध्यान रख रही हैं। पौंग बांध वेटलैंड के अधिकारियों के वेटरनरी और एनिमल हसबेंडरी विभाग से लगातार संपर्क साधा जा रहा है। बावजूद इसके तैनात टीमों को आगाह किया गया है कि अगर कोई घटना सामने आती है तो तुरंत इसकी सूचना दी जाए।

डरने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत
डीएफओ राजेश महाजन ने कहा कि बर्ड फ्लू से लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। इसके लिए लोगों को सतर्क रहना होगा। उन्होंने कहा कि 90 फीसदी केस मुर्गे या अन्य पक्षियों में होते हैं। माइग्रेटरी बर्ड की इम्यूनिटी मजबूत होने के कारण इसका उन पर असर कम होता है। लोगों को मुर्गियों समेत अन्य घरेलू पक्षियों के घाव, बीट, डेड पार्ट को नहीं छूना चाहिए।

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