पंजाब में 'कैप्टन' की विदाई: साढ़े चार साल में केवल 12 फीसदी लोगों को खुश कर सके अमरिंदर सिंह, सर्वे में खुली पोल

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 23 Sep 2021 02:54 PM IST

सार

सर्वे में कहा गया है कि पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए पिछला डेढ़ साल काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। इसी अवधि में कोरोना संक्रमण के अलावा किसान आंदोलन चलता रहा। कैप्टन अमरिंदर सरकार ने कई सख्त एवं बड़े कदम उठाए, जिससे उन्हें विपक्षी दलों की आलोचना झेलनी पड़ी। सर्वे में लोगों से 12 विषयों पर बातचीत की गई...
कैप्टन अमरिंदर सिंह पर लोकल सर्कल सर्वे
कैप्टन अमरिंदर सिंह पर लोकल सर्कल सर्वे - फोटो : for reference only
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विस्तार

पंजाब में कांग्रेस के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के साढ़े चार साल का लेखा जोखा बताता है कि वहां केवल 12 फीसदी लोग पूरी तरह से खुश हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्म, लोकल सर्किल द्वारा किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है। 30 फीसदी लोगों ने माना है कि पंजाब में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हुई हैं। 'भ्रष्टाचार' के मुद्दे पर केवल सात फीसदी लोग मानते हैं कि वह कम हुआ है। दूसरी तरफ 22 फीसदी लोगों का कहना है, कानून व्यवस्था में सुधार हुआ है। लोकल सर्कल्स द्वारा पिछले दिनों यह सर्वे किया गया है। सर्वे में 15 हजार से अधिक जवाब प्राप्त हुए थे। पंजाब के 18 जिलों के 4000 लोगों ने सर्वे में भाग लिया है। प्रतिभागियों में 69 फीसदी पुरुष और 31 फीसदी महिलाएं शामिल हैं। जिन लोगों ने इस सर्वे में भाग लिया है, वे सभी लोकल सर्कल्स प्लेटफार्म पर पंजीकृत हैं।  
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सर्वे में कहा गया है कि पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए पिछला डेढ़ साल काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। इसी अवधि में कोरोना संक्रमण के अलावा किसान आंदोलन चलता रहा। कैप्टन अमरिंदर सरकार ने कई सख्त एवं बड़े कदम उठाए, जिससे उन्हें विपक्षी दलों की आलोचना झेलनी पड़ी। सर्वे में लोगों से 12 विषयों पर बातचीत की गई। 33 फीसदी लोगों का कहना था कि साढ़े चार के कार्यकाल में उनके जिले की साफ सफाई व्यवस्था दुरुस्त हुई है। पंजाब सरकार ने 'तंदुरूस्त पंजाब' मिशन लांच किया था। इस पर 114 करोड़ रुपये खर्च हुए। कैप्टन सरकार में मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। सरकार ने भ्रष्टाचार के मामले जांचने के लिए सितंबर 2020 में विजिलेंस कमीशन गठित किया था। उसके बावजूद केवल सात फीसदी लोग मानते हैं कि भ्रष्टाचार में कमी आई है। 11 फीसदी लोगों ने कहा, कानून व्यवस्था में कुछ सुधार है। 22 फीसदी बोले, कोई सुधार नहीं हुआ। 44 फीसदी ने कहा, यह बिल्कुल खराब हो गई है। 12 फीसदी बोले, ये बहुत ज्यादा खराब होने की तरफ अग्रसर है।

पंजाब में कारोबार करना कितना आसान है, सर्वे में इस बाबत सवाल पूछे गए थे। केवल 9 फीसदी लोगों ने कहा, कांग्रेस पार्टी की सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में कारोबार करना आसान हुआ है। 28 फीसदी बोले, ईज ऑफ डुईंग बिजनेस, में सुधार नहीं है। 27 फीसदी ने कहा, ये पहले से भी खराब हो गया है। 36 फीसदी ने कहा, यह बुरी हालत में पहुंच गया है। स्वास्थ्य सेवाओं को 30 प्रतिशत लोगों ने अच्छा बताया है। 34 फीसदी लोगों ने कहा, कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल में सांप्रदायिक सौहार्द्र की भावना बढ़ी है, उसमें सुधार हुआ है। 32 फीसदी लोगों ने कहा, कोई सुधार नहीं हुआ। पंजाब में बिजली को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में 27 फीसदी लोग बोले, उनके जिले में पावर सप्लाई व्यवस्था में सुधार हुआ है। कैप्टन सरकार के दौरान ग्रामीण इलाकों में लंबे पावर कट के खिलाफ किसानों के अनेक विरोध प्रदर्शन हुए थे।

पेयजल सप्लाई बाबत पूछे गए सवाल पर 16 फीसदी लोगों ने कहा, साढ़े चार साल के दौरान इसमें कुछ सुधार आया है। कुछ समय पहले ही पंजाब कैबिनेट ने एक योजना लागू की थी। इसमें अवैध कनेक्शन को नियमित किया गया। इसके बदले बकाया बिलों के एरियर की वसूली की गई। नाबार्ड और आरआईडीएफ द्वारा 445.89 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। 58 प्रतिशत लोगों ने कहा, पेयजल सप्लाई में कोई सुधार नहीं हुआ। नौ फीसदी लोगों ने इसे खराब बताया तो 17 फीसदी लोगों का मानना था कि यह सिस्टम बहुत ही ज्यादा खराब हो चुका है। 27 प्रतिशत लोग ऐसे थे, जिन्होंने माना है कि पंजाब में इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में सुधार आया है।

शिक्षा को लेकर पूछे गए सवाल पर 31 फीसदी लोगों का कहना था कि स्कूली शिक्षा में सुधार हुआ है। एनएसओ सर्वे के मुताबिक, पंजाब में साक्षरता दर 83.7 फीसदी है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नवंबर 2020 में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 'मिशन शत प्रतिशत' शुरु किया था। प्राइमरी स्कूलों में 8393 शिक्षकों के पद स्वीकृत किए गए थे। राज्य में 19107 स्कूलों में से 6832 स्मार्ट स्कूल हैं। डिजिटल प्लेटफार्म पर सौ करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। वायु गुणवत्ता के मामले में साढ़े चार साल के दौरान पंजाब को केवल चार फीसदी लोगों ने एक्सीलेंट बताया है। अक्तूबर 2020 में पराली जलाने के 25976 मामले सामने आए थे। 31 फीसदी लोगों ने कहा, काम तो हुआ, मगर उसका रिजल्ट नहीं निकला। 46 फीसदी लोगों का कहना था कि सरकार ने इस दिशा में कुछ किया ही नहीं। 15 प्रतिशत का कहना था, हालात पहले से भी ज्यादा खराब हो गए हैं।
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