आनंद गिरि: गुरु की मौत का आरोपी बना शिष्य, बचपन से था आध्यात्म की ओर रुख, जानिए क्या कहते हैं उसके बचपन के दोस्त

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 23 Sep 2021 09:41 PM IST

सार

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थित बाघंबरी गद्दी मठ के महंत और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की मौत की जांच अब सीबीआई करेगी। राज्य सरकार समेत साधु-संतों ने भी केंद्र से मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में अपनी मौत के लिए अपने शिष्ट आनंद गिरि को जिम्मेदार ठहराया है। मामले में आनंद गिरि और लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी को जेल भेजा गया है। इस रिपोर्ट में जानिए आनंद गिरि के बचपन के बारे में...
आनंद गिरि
आनंद गिरि - फोटो : अमर उजाला (फाइल)
विज्ञापन
ख़बर सुनें

विस्तार

आनंद गिरि मूल रूप से राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के सरेरी गांव का रहने वाला है। उसका असली नाम अशोक चोटिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अशोक सातवीं कक्षा में था तब बिना किसी को बताए घर से चला गया था। इसके 12 साल बाद वह आनंद गिरि बनकर घर लौटा था। नरेंद्र गिरि की हत्या में आनंद का नाम आने के बाद उसके परिजन और बचपन के दोस्त हैरत में हैं।
विज्ञापन


मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आनंद गिरि के बचपन के दोस्तों का कहना है कि वह बचपन से ही उसका झुकाव आध्यात्म की ओर था। वह न तो किसी से ज्यादा बात करता था और न ही उसका व्यवहार सामान्य बच्चों के जैसा था। उसके दोस्तों के अनुसार 12 साल बाद मिलने के बाद उसके स्वरूप और हाव-भाव में तो बदलाव आया था लेकिन उसका स्वभाव अभी भी पहले जैसा ही था।


योग में पीएचडी, 15 से अधिक भाषाओं का ज्ञान
गिरि पर लगे आरोपों को लेकर उसके बचपन के दोस्तों का कहना है कि वह ऐसा कर ही नहीं सकता। उनका कहना है कि आनंद अपने गुरु को सबकुछ मानता था। वह उन्हीं की हत्या नहीं कर सकता है। उल्लेखनीय है कि आनंद गिरि के पास योग शिक्षा में पीएचडी भी है, जिसके चलते उसे योग गुरु के तौर पर भी जाना जाता है। इसके साथ ही उसे उसे 15 से अधिक भाषाओं का ज्ञान है।

कई देशों में योग प्रशिक्षण दे चुका है आनंद गिरि
इसके अलावा आनंद गिरि कई देशों की यात्रा कर चुका है और वहां जाकर योग का प्रशिक्षण दे चुका है। उसने अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, तुर्की, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों की यात्रा कर चुका है। इसके अलावा साल 2013 में उसके एक किताब भी लिखी थी। इस किताब का नाम स्वर्ण भूमि प्रयाग था। वह कई विश्वविद्यालयों में अतिथि फैकल्टी के तौर पर योग का प्रशिक्षण भी दिया करता था।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads

Follow Us

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00