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Rajasthan: 'नवाब' को ढूंढने में रोज खर्च हो रहे पांच हजार, बच्चों ने खाना छोड़ा, छह दिन से तलाश रहा पिता

न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर Published by: उदित दीक्षित Updated Tue, 20 Sep 2022 06:27 PM IST
सार

Rajasthan:  जोधपुर में रविंद्र सिंह शेखावत के पालतू कुत्ते का नाम नवाब है। 15 सितंबर से नवाब कहीं चला गया है, तब से वह वापस नहीं लौटा है। इसके बाद से घर में सभी का खाना पीना छूट गया है। रविंद्र उसकी तलाश के लिए रोजाना पांच हजार रुपये खर्च कर रहे हैं, लेकिन अब तक उसका कोई पता नहीं चल सका है। 

जिसने खोजा उसे मिलेगा पांच हजार का इनाम।
जिसने खोजा उसे मिलेगा पांच हजार का इनाम। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

Rajasthan: घर का लाडला नवाब खो गया है तो बच्चों ने खाना-पीना छोड़ दिया। उनकी अपने पापा से एक ही जिद है नावाब को वापस ला दो, जब तक वह वापस नहीं आएगा हम खाना नहीं खाएंगे। बच्चों की जिद पूरी करने के लिए पिता रोजाना पांच हजार रुपये खर्च कर रहा है। खुद छह दिन से इधर-उधर भटककर नवाब को तलाश कर रहा है, लेकिन उसका पता नहीं लग रहा है। अब तक आप यह नहीं समझ पाए होंगे कि यह नवाब है कौन, जिसके कारण घर के बच्चों ने खाना-पीना छोड़ दिया और उनका पिता यहां-वहां भटक रहा है। 



दरअसल, राजस्थान के जोधपुर में रहने वाले रविंद्र सिंह शेखावत के पालतू कुत्ते का नाम नवाब है। मई 2020 को रविंद्र लेब्राडॉर नस्ल के इस कुत्ते को अपने घर लाए थे। तभी से वह उनके पास है। इन दो साल से ज्यादा समय में वह परिवार का हिस्सा बन गया। उनके 9 साल के बेटे को नवाब से बहुत लगाव है, वह उसके साथ रोज खेलता था, लेकिन 15 सितंबर से नवाब कहीं चला गया है, तब से वापस नहीं लौटा है। इसके बाद से घर में सभी का खाना पीना छूट गया है। 

रियल एस्टेट व्यापारी रविंद्र बातते हैं कि नवाब को तलाशने के लिए उनहोंने पुलिस का भी सहयोग लिया। अभय कमांड रूम में कृष्णा नगर, बासनी, झालामंड, सहित कई जगहों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। शोरूम, दुकानों और होटलों में लगे सीसीटीवी भी देखे, लेकिन उसका पता नहीं चल सका है। उसे तलाशने के लिए अखबरों में विज्ञापन भी दिए और पांच हजार रुपये के इनाम की घोषणा की। दिन-रात नवाब को ढूंढने के बाद भी उसका पता नहीं चल रहा है।  

रविंद्र का कहना है कि नावाब को ढूंढने के लिए सात लोगों को लगाया है। उन्हें रोजाना 700-700 रुपये दे रहा हूं। आस-पास की दुकानों में पम्पलेट छपवाकर भी लगाए गए हैं। घर के सदस्य भी उसकी तलाश में जुटे हुए हैं, लेकिन अब तक सिर्फ मायूसी हाथ लगी है।  

देवव्रत नवाब के जाने से उदास है।
देवव्रत नवाब के जाने से उदास है। - फोटो : अमर उजाला
घर में ऐसे रहता था नवाब
छह दिन से लापता नवाब लग्जरी लाइफ जीता था। वह समझदार इतना था कि बाहर से आने पर पैर धुलकर ही अंदर आता था। उसके लिए घर में एक अलग से कमरा है। जिसमें एसी भी लगा हुआ है। 16-17 घंटे वह एसी में ही रहता था, अगर एसी बंद कर दिया जाए तो शोर मचाता था। खाने में उसे रोटी, सब्जी और मांस दिया जाता था। 

भाई और बहन को बहुत प्यारा था नवाब 
रविंद्र के दो बच्चे हैं, एक बेटी निहारिका और बेटा देवव्रत। दोनों को ही नवाब से बहुत लगाव था। उसका ज्यादातर समय दोनों के साथ ही बीतता था, लेकिन जब से नवाब लापता हुआ है, तब से दोनों बच्चे उदास है। जब भी रविंद्र बाहर से लौटते हैं, उनका एक ही सवाल होता है नवाब मिला क्या? वह बच्चों को उसके जल्द मिल जाने की बात कहकर दिलासा दे रहे हैं।  
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