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Rajasthan Politics: क्या पायलट से किया वादा नहीं निभा पाएंगे राहुल गांधी? सीएम बदला तो सरकार गिरनी तय

Udit Dixit उदित दीक्षित
Updated Sun, 02 Oct 2022 10:21 PM IST
सार

Rajasthan Politics: अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच की अदावत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। गहलोत और उनके गुट के विधायक पायलट का खुलकर विरोध कर रहे हैं। जिससे पायलट के मुख्यमंत्री बनने की संभावना लगभग खत्म हो गई है।

सचिन पायलट, राहुल गांधी और अशोक गहलोत।
सचिन पायलट, राहुल गांधी और अशोक गहलोत। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

Rajasthan Politics: कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव की चर्चा के बाद राजस्थान में शुरू हुआ सियासी घमासान अब भी जारी है। सीएम अशोक गहलोत और उनके गुट के विधायक सचिन पायलट के खिलाफ लगातार बयान दे रहे हैं। आज यानी रविवार को भी गहलोत ने पायलट और उनके गुट के विधायकों पर निशाना साधा। गहलोत ने कहा- दूसरों को नेता स्वीकार करने से अच्छा विधायकों ने बगावत करना उचित समझा। 



सभी जानते हैं कि कुछ नेता भाजपा विधायक के साथ बैठे थे। उस दौरान भाजपा सरकार गिराने की कोशिश कर रही थी। हमें भाजपा नेताओं के साथ बैठने वाले स्वीकार नहीं हैं। विधायकों की बगावत पर सोनिया गांधी की नाराजगी और फिर माफी मांगे के बाद भी गहलोत का यह कहना साफ संकेत दे रहा है कि आलाकमान के लिए सीएम बदलना आसान नहीं हैं। इससे एक बार फिर राहुल गांधी सचिन पायलट से किया वादा नहीं निभापाएंगे।  


राहुल ने पायलट से क्या वादा किया था? 
2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान सचिन पायलट राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे। 2013 के विस चुनाव में मिली करारी के हार के बाद पायलट ने पार्टी को आगे लाने में कड़ी मेहनत की। सियासी हलकों में भी कहा जाता है कि पायलट की दम पर ही कांग्रेस 2018 में राजस्थान में सरकार बना पाई। चुनाव से पहले राहुल गांधी ने सचिन पायलट से उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का वादा किया था, लेकिन कुर्सी गहलोत के हाथ लगी। यानी अशोक गहलोत को सीएम और सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बना दिया गया। 

अशोक गहलोत और सचिन पायलट
अशोक गहलोत और सचिन पायलट - फोटो : Social Media
2020 में सब्र खो बैठे पायलट
पार्टी में मांगें पूरी नहीं होने पर सचिन पायलट सब्र खो बैठे और अपने गुट के 18 विधायकों के साथ मानेसर चले गए। हालांकि, बाद में उनकी वापसी हो गई, लेकिन उन्हें उप मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। तब से पायलट सिर्फ विधायक ही हैं। अब गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष बनने की चर्चा शुरू हुई तो राहुल गांधी ने एक बार फिर पायलट को सीएम बनाने के संकेत दिए, लेकिन गहलोत गुट के विधायकों की खिलाफत से एक बार फिर सचिन पायलट सीएम की कुर्सी पर बैठते-बैठते रह गए। यानी राहुल गांधी इस बार भी अपना वादा नहीं निभा पाए। 

सीएम बदला को सरकार गिरना तय
बीते दिनों राजस्थान की घटना पर सोनिया गांधी से माफी मांगे अशोक गहलोत माफीनामें के साथ सचिन पायलट की शिकायतों का पुलिंदा भी लेकर गए थे। ऐसे में साफ है कि सचिन पायलट और सीएम की कुर्सी के बीच अशोक गहलोत और उनके गुट के विधायक खड़े हैं। रविवार को भी गहलोत ने कहा कि दूसरों को नेता स्वीकार करने से अच्छा विधायकों ने बगावत करना उचित समझा। हमें भाजपा नेताओं के साथ बैठने वाले स्वीकार नहीं हैं। इससे साफ है कि गहलोत पायलट को सीएम बनाने की बात पर किसी भी तरह राजी नहीं होंगे और न ही उनके विधायक इसके लिए तैयार हैं। इसके बाद भी अगर कांग्रेस आलाकमान ने सीएम बदलने का फैसला किया तो सरकार भी खतरे में आ सकती है। कई बार गहलोत गुट के विधायक इसकी चेतावनी भी दे चुके हैं। 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत - फोटो : सोशल मीडिया
चेतावनी के बाद भी बयानबाजी कर रहे नेता
राजस्थान में हुए सियासी घमासान के बाद कांग्रेस आलाकमान ने पार्टी नेताओं के लिए एक नोटिस जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि पार्टी का कोई भी नेता एक दूसरे के खिलाफ बयान नहीं देगा। इसके बाद भी नेताओं के बयान सामने आ रहे हैं। जयपुर के गांधी सर्किल पर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने के बाद सीएम अशोक गहलोत ने ही पायलट के खिलाफ बयान दे दिया। इससे गहलोत और पायलट की अदावत का अंत होता नहीं दिख रहा हैं।

जानिए अजय माकन की पांच गलतियां।
जानिए अजय माकन की पांच गलतियां। - फोटो : अमर उजाला
अजय माकन की पद से हो सकती है छुट्टी
राजस्थान के सियासी घमासान में प्रदेश प्रभारी अजय माकन बुरी तरह फंस गए हैं। कभी भी उनसे इस्तीफा लिया जा सकता है। उनका प्रभारी पद से हटना तय माना जा रहा है। इससे पहले सचिन पायलट की बगावत के बाद राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडे को भी पद से हटा दिया गया था। इस बार अजय माकन के साथ ऐसा हो सकता है। जानें माकन से इस्तीफा लेने के पांच कारण?

सचिन पायलट का हो रहा विरोध।
सचिन पायलट का हो रहा विरोध। - फोटो : सोशल मीडिया
राहुल पायलट के सब्र के मुरीद, क्या 26 महीने बाद अब मिलेगी जिम्मेदारी?
22 जून को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी दिल्ली में एआईसीसी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने 2004 से पार्टी में काम कर रहा हूं। सब्र नहीं आएगा तो क्या आएगा? इस बात को पार्टी का हर नेता समझता है। देखो सचिन पायलट जी सब्र से बैठे हैं। राहुल गांधी को यह बात कहे हुए तीन महीने से ज्यादा का समय हो गया है और पायलट भी लगातार सब्र रखे हुए हैं। अब एक बार फिर उनके सीएम बनने की बारी आई तो गहलोत गुट उनके विरोध में खड़ा हो गया है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर...
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