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22 जून को शुक्र का कर्क राशि में परिवर्तन, जानें सभी राशियों पर प्रभाव
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राजस्थान: कुत्ते के काटने से गाय को हुआ रैबीज, दूध पीने के बाद परिवार को लगवाना पड़ा टीका

आपने आजतक कुत्ते के काटने बाद लोगों को रैबीज का टीका लगाते हुए देखा और सुना तो जरूर होगा। लेकिन क्या आपने कभी ये सुना है कि किसी गाय को कुत्ते ने काटा हो और फिर उसका दूध पीने वाले लोगों ने रैबीज का टीका लगवाया हो। आप कहेंगे नहीं। मगर असंभव सा लगने वाला यह मामला राजस्थान के उदयपुर में सामने आया है।

उदयपुर के हिरणमगरी के सेटेलाइट अस्पताल में एक ही परिवार के 13 सदस्य शुक्रवार को एक साथ रेबीज का टीका लगवाने के लिए पहुंचे। परिवार ने बताया कि उनकी पालतू गाय को एक कुत्ते ने काट लिया, जिससे उसे रेबीज हो गया और उसका दूध पीने से उन्हें भी रेबीज होने का खतरा है। इसके बाद सभी को एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाई गई।

दरअसल, परिवार की गाय को कुछ दिनों पहले एक कुत्ते ने काट लिया था। सभी सदस्य उसका दूध पी रहे थे। गुरुवार को उनकी गाय बीमार हो गई और पागल जैसी हरकतें करने लगी। उपचार के लिए उसी दिन शाम को पशु चिकित्सक को बुलाया गया। पशु चिकित्सक ने उसके रेबीज से ग्रस्त होने की आशंका जताई।

चिकित्सक ने बताया कि रोगी गाय का दूध पीने से परिवार के सदस्यों को रेबीज होने का खतरा है। इसके बाद सभी सदस्यों को सेटेलाइट अस्पताल में एंटी रेबीज और टिटनेस का टीका लगवाया गया। अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक डॉ. किशनलाल धानक ने बताया कि पहली बार ऐसा कोई मामला सामने आया है।

डॉ. किशनलाल ने बताया कि गाय को रेबीज होने पर उसका दूध पीने से रेबीज होने का खतरा बना रहता है। हालांकि दूध को उबालकर पीने से इसकी संभावना कम हो जाती है। फिर भी किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। इस घटना की जानकारी मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी के अलावा आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को भी दी गई है। 
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राजस्थान: पेट्रोल ने बनाया 'शतक', श्रीगंगानगर में 101 रुपये प्रति लीटर बिका तेल

नन्हे भाई-बहन का कमाल: टीवी पर रामायण देखकर पढ़ी रामचरितमानस, फिर 2100 पन्नों में लिखी

राजस्थान के जालौर में रहने वाले मासूम भाई-बहन ने ऐसा कारनामा कर दिया, जिससे हर कोई हैरान रह गया है। दरअसल, इन दोनों बच्चों ने लॉकडाउन के दौरान रामायण देखी थी, जो उन्हें काफी पसंद आई। इसके बाद उन्होंने तीन बार रामचरितमानस पढ़ी और उसे 2100 पन्नों में उतार दिया। 

लॉकडाउन में किया कमाल
गौरतलब है कि कोरोना की वजह से देश में 25 मार्च 2020 को लॉकडाउन लग गया था। उस दौरान अधिकतर लोगों को काफी परेशानी हुई, लेकिन कुछ लोगों ने उस दौरान अनोखे कारनामे कर दिखाए। दरअसल, राजस्थान के जालौर जिले में रहने वाले दो छोटे बच्चों ने 2100 पन्नों में पूरी रामायण लिख दी। ये दोनों बच्चे भाई-बहन हैं। 

20 कॉपियों में लिखी रामायण
जानकारी के मुताबिक, तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले माधव जोशी और चौथी कक्षा में पढ़ने वाली अर्चना ने यह कारनामा किया। उन्होंने रामायण के अलग-अलग खंडों को कुल 20 कॉपियों के करीब 2100 पन्नों में उतार दिया। 

इस वजह से लिखी रामायण
बताया जा रहा है कि लॉकडाउन के दौरान दूरदर्शन पर रामायण दिखाई गई थी। उसे काफी पसंद भी किया गया। उसी दौरान माधव और अर्चना ने भी रामायण देखी। इसके बाद उन्होंने को लोग खूब देख रहे थे और पसंद की जा रही थी, उसी दौरान इन बच्चों के मन में पूरी रामायण पेन से लिखने की बात आई और उसके बाद उन्होंने तीन बार रामचरितमानस भी पढ़ी। पापा ने उन्हें रामायण लिखने के लिए प्रोत्साहित किया तो दोनों भाई-बहन अनोखा कारनामा करने में जुट गए।

सात हिस्सों में लिखा पूरा किस्सा
जालौर के आदर्श विद्या मंदिर विद्यालय में पढ़ने वाले माधव और अर्चना ने पूरी रामायण को सात हिस्सों में लिखा। उन्होंने श्री रामचरितमानस  बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड, किष्किंधा कांड, सुंदर कांड, लंका कांड और उत्तर रामायण का संपूर्ण जिक्र किया। इनमें माधव ने 14 कॉपियों में बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड और उत्तर कांड लिखा, जबकि अर्चना ने छह कॉपियों में किष्किंधा कांड, सुंदर कांड और लंका कांड लिखा। बच्चों का कहना है कि उन्हें रामायण की पूरी जानकारी हो गई। साथ ही, रामचरितमानस में दोहे, छंद और चौपाइयों की संख्या भी याद हो गई।
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पलटवार: सीएम गहलोत ने पीएम मोदी पर साधा निशाना, कोरोना के कारण अनाथ हुए बच्चों के लिए केंद्र का पैकेज ‘आधा-अधूरा'

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अनाथ होने वाले बच्चों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से घोषित पैकेज पर निशाना साधा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पीएम मोदी के पैकेज को आधा-अधूरा बताया और कहा कि वह इस विषय को प्रधानमंत्री के समक्ष उठाएंगे। गहलोत ने कहा कि केंद्र सरकार के पैकेज में प्रभावित बच्चों के लिए तत्काल किसी तरह की राहत नहीं दी गई है। न ही कोरोना के कारण विधवा होने वाली महिलाओं के लिए किसी तरह की मदद की घोषणा की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अपने पैकेज में इस तरह के बच्चों व महिलाओं को मासिक राशि के अलावा एक लाख रुपये की तुरंत राहत की घोषणा की है।

गहलोत ने केंद्र सरकार द्वारा घोषित पैकेज का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘भारत सरकार का जो पैकेज है,  वह डिफेक्टिव (आधा-अधूरा) पैकेज है। किसी के घर में अगर कोई बच्चा अनाथ हो गया तो उसे 18 साल की उम्र के बाद तीन साल तक आर्थिक मदद दी जाएगी और अभी केवल पढ़ाई का इंतजाम किया जाएगा। 18 साल के बाद किसने क्या देखा। 23 साल की उम्र होने पर 10 लाख रुपये देंगे। इसमें भी संशय है। पैकेज का मतलब होता है कि आप तत्काल क्या मदद दे रहे हैं। मैं इस बारे में अलग से प्रधानमंत्री से बात करूंगा और कहूंगा कि आपका यह पैकेज डिफेक्टिव है।’’

पीएम मोदी से इस मुद्दे पर करूंगा बात- गहलोत
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 मई को घोषणा की थी कि कोविड-19 के कारण अनाथ हुए बच्चों को 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर मासिक वित्तीय सहायता और 23 वर्ष की आयु पूरी करने पर पीएम केयर्स फंड से 10 लाख रुपये की राशि मिलेगी। इसका जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा, ‘‘इसमें सुधार की आवश्यकता है और मैं समझता हूं कि भारत सरकार को सोचना चाहिए।’’

राज्य सरकार के पैकेज में तत्काल राहत का इंतजाम
गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार जो पैकेज लाई है उसके तहत कोरोना महामारी से माता-पिता दोनों की मृत्यु होने या एकल जीवित की मृत्यु होने पर अनाथ बच्चों को तत्काल एक लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। ऐसे बच्चों को 18 साल की उम्र तक प्रतिमाह 2,500 रुपये की सहायता दी जाएगी। 18 साल की उम्र होने पर उन्हें पांच लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। ऐसे बच्चों को 12वीं तक की शिक्षा आवासीय विद्यालय या छात्रावास के जरिए दी जाएगी।

राज्य सरकार के पैकेज में महिलाओं को भी मिलेगी आर्थिक मदद
अधिकारियों के अनुसार राज्य सरकार के इस पैकेज के तहत किसी व्यक्ति की कोरोना वायरस संक्रमण से मृत्यु होने पर उसकी पत्नी को एक लाख रुपये की एकमुश्त अनुग्रह राशि दी जाएगी। इसके अलावा 1,500 रुपये प्रतिमाह विधवा पेंशन सभी आयु व आय वर्ग की महिलाओं को मिलेगी। वहीं ऐसी महिला के बच्चों को 1,000 रुपये प्रति बच्चा प्रति माह तथा विद्यालय की पोशाक व पाठ्यपुस्तकों के लिए सालाना 2,000 रुपये का लाभ दिया जाएगा।
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अशोक गहलोत, मुख्यमंत्री, राजस्थान अशोक गहलोत, मुख्यमंत्री, राजस्थान

पहल: डोर-टू-डोर टीका देने वाला देश का पहला शहर बनेगा बीकानेर, सार्वजनिक स्थलों पर मोबाइल कैंप लगाकर दी जा रही वैक्सीन

कोविड महामारी के खिलाफ घर-घर जाकर टीका लगाने वाला देश का पहला शहर बीकानेर बनेगा। राजस्थान के बीकानेर में सोमवार से वैक्सीनेशन ड्राइव की शुरुआत होगी। इसके तहत 45 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों को वैक्सीन दी जाएगी। इससे पहले शहर में सर्वाजनिक स्थलों पर मोबाइल वैन के जरिए टीका लगाया जा रहा है। जिला प्रशासन की ओर से शुरू की गई इस पहल के तहत तीन दिन के भीतर 65000 हजार लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका है।  बीकानेर कलेक्टर ने बताया कि इसका अच्छा रिस्पांस मिल रहा है और जल्द ही शहर कोविड मुक्त हो जाएगा।


वहीं सोमवार से लोगों के घरों तक वैक्सीन पहुंचाने के लिए मोबाइल टीमों का भी गठन किया गया है। वहीं ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। इस हेल्पलाइन नंबर के जरिए वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। बिना रजिस्ट्रेशन वैक्सीन नहीं दी जाएगी। रजिस्ट्रेशन होने के बाद उस इलाके में वैन पहुंचेगी और लोगों को जांच कर उन्हें टीका लगाया जाएगा। 



 मेडिकल स्टाफ भी रहेंगे मौजूद
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दस लोगों के रजिस्ट्रेशन कराने के बाद ही वैक्सीन वैन लोगों के घरों के लिए जाएगी। दरअसल, वैक्सीन की एक शीशी में 10  को टीका लगाया जाता है। दस लोगों से कम होने पर बची हुई खुराक के खराब होने की आशंका रहती है। 4 घंटे से अधिक खुले रहने पर वैक्सीन खराब हो जाती है। इस को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाने का फैसला किया गया है। इस अभियान के लिए एक मेडिकल स्टाफ को भी नियुक्त किया गया है, जो वैक्सीन लेने वाले व्यक्ति के पास कुछ समय के लिए ऑब्जर्वेशन के लिए रहेगा।

60-65 फीसदी आबादी का हो चुका है वैक्सीनेशन
 बीकानेर में इस समय 16 शहरी स्वास्थ्य केंद्र हैं। इन स्वास्थ्य केंद्रों पर मौजूद डॉक्टरों से कहा गया है कि उनके क्षेत्र में जिन्हें भी वैक्सीन दी जाएगी, वे सभी उस व्यक्ति की मॉनिटरिंग करेंगे। बीकानेर जिला प्रशासन ने बताया कि अब तक लगभग 60-65 फीसदी आबादी का वैक्सीनेशन किया जा चुका है। जिले में अब तक लगभग 3 लाख 69 हजार लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है। पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस के 50 से भी कम नए मामले सामने आए हैं. जिले में अबतक कुल 40 हजार 118 मामले सामने आए हैं। 
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वायरल वीडियो: महिला भगाने के शक में नाबालिग को जंजीरों से बांधा, घाघरा-चुनरी पहनाकर गांव में घुमाया

राजस्थान के सीकर में नाबालिग को कथित तौर पर अपमानित करने का मामला सामने आया है। नाबालिग पर आरोप है कि उसने एक विवाहित महिला को भगाकर ले गया और उसे कई दिनों तक बाहर रखा और फिर चुपके से गांव में महिला को लेकर लौट गया। जिसके बाद ग्रामीणों ने सबक सिखाने के लिए उसे जबरन महिला का ड्रेस और जंजीर बांधकर गांव में घुमाया और उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। बता दें कि मामला इसी महीने के पहले सप्ताह का है। 

मामला सीकर जिले के पाटन थाना क्षेत्र का है। पीड़ित बच्चे के भाई की शिकायत पर पुलिस ने ग्रामीणों के कब्जे से नाबालिग को मुक्त कराया। पुलिस के मुताबिक पीड़ित के भाई ने शिकायत की, कि गांव के कुछ लोग उसके भाई को बंधक बनाकर रखे हैं और बदले में 90 हजार रुपए मांगे। पीड़ित के भाई के मुताबिक उसके नाबालिग भाई को कुछ लोगों ने बंधक बनाकर चूड़ियां और महिलाओं के कपड़े पहनाकर घुमाया। पीड़ित अपमानित महसूस कर रहा है।  जिसके बाद पुलिस हरकत में आई और आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की।

4 आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार
 एडिशनल एसपी रतन लाल ने बताया कि इस घटना में चार लोगों को पकड़ा गया है और बाकी लोगों की तलाश जारी है। लाल ने कहा कि महिला के परिवार ने लड़के के खिलाफ एक और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस जल्द ही बाकी आरोपियों की तलाश कर लेगी।  इस मामले में 15 से 20 लोगों के शामिल होने का आरोप है। बताया जा रहा है कि नाबालिग पर पहले भी मामले दर्ज हो चुके हैं।
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राजस्थान: टेनिस में आगे बढ़ाने का झांसा देकर कोच ने नाबालिग खिलाड़ी से किया रेप, पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी

जयपुर के सवाई मान सिंह स्टेडियम के लॉन टेनिस कोच के खिलाफ नाबालिग खिलाड़ी से कथित रेप का मामला दर्ज किया गया है। बदनामी के डर से चुप्पी साध रखी दुष्कर्म की शिकार पीड़िता ने परिजनों को जब आपबीती सुनाई तो उनके होश उड़ गए। आरोपी कोच के खिलाफ ज्योति नगर पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया गया है। नाबालिग खिलाड़ी पिछले एक साल से इस स्टेडियम में कोचिंग ले रही थी।

जयपुर में दुष्कर्म करने के बाद टूर्नामेंट में खिलाने के बहाने कोच उसे उदयपुर भी ले गया और दुष्कर्म किया। थाना प्रभारी सरोज धायल के अनुसार, ‘‘कोच के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोपी की तलाश की जा रही है।’’आरोपी कोच की पहचान गौरंग नलवाया के रूप में हुई है जो 2012 से इस स्टेडियम में सेवाएं दे रहा है। अपनी शिकायत में पीड़िता ने आरोप लगाया है कि कोच उसे स्टेडियम बुलाकर यौन उत्पीड़न करता था। आरोप हैं कि ताजा घटना में आरोपी ने उसे एक प्रतियोगिता में मौका दिलवाने के नाम पर उससे दुष्कर्म किया।

नेशनल खिलाने का झांसा देकर किया दुष्कर्म
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता जयपुर की रहने वाली है। वह टेनिस खिलाड़ी है और पिछले करीब एक साल से सवाई मान सिंह स्टेडियम में कोच गौरांग नलवाया के पास कोचिंग करने जा रही थी।  पिता का आरोप है कि उनकी बेटी पिछले एक साल से कोच के यहां पर कोच के अंडर में कोचिंग ले रही थी। कोच गौरांग ने टेनिस में नेशनल टूर्नामेंट खिलाने का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

कोच पर कई लड़कियों से संबंध बनाने का शक
ज्योति नगर थाना प्रभारी के मुताबिक गौरांग 9 साल से इस स्टेडियम में टेनिस कोच है। आशंका जताई जा रही है कि वह और भी लड़कियां को शिकार बनाया होगा। बदनामी के डर से अभी तक किसी ने शिकायत दर्ज नहीं कराई है, लेकिन जल्द ही आरोपी को पुलिस गिरफ्तार कर पूछताछ करेगी। 
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टोना-टोटका: एक महीने में 28 मौतें, घरों के बाहर टांगे जूते-चप्पल, बोले- इससे भागेगा कोरोना

रेप
देशभर में कोरोना की दूसरी लहर सितम ढा रही है। इससे बचने के लिए लोग कई हथकंडे अपना रहे हैं। कुछ लोग काला जादू का सहारा ले रहे हैं, तो कुछ अलग तरीके से बचने का प्रयास कर रहे हैं। राजस्थान के भीलवाड़ा में इस महामारी से बचने के लिए घरों के बाहर जूते-चप्पल लटका रखे हैं। भीलवाड़ा के दंतरा बांध गांव में लोगों ने कोरोना वायरस से बचने के लिए अपने घरों के बाहर जूते-चप्पल बांध रखे हैं साथ ही झोलाछाप डॉक्टरों के सहारे जी रहे हैं। 

गांव में बीते 25 दिन के अंदर इन्फ्लूएंजा के कारण 28 लोगों की मौत हो चुकी। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, गांव में एक झोलाछाप ने लोगों को चेतावनी दी कि कोरोनावायरस उनके पूर्वजों द्वारा की गई हत्याओं का बदला लेने के लिए आया है। 
  
लोगों ने उड़ाया मजाक- ग्रामीण
गांव के मोहन लाल खतीक का कहना है कि घर के बाहर जूते बांधने से वायरस घरों में घुसने से डरता है। जो लोग इसका मजाक उड़ा रहे थे, उनकी मौत हो गईं, लेकिन हम लोग इसके लगाने से बचे हुए हैं। पिछले एक महीने में खतीक के तीन रिश्तेदारों की मौत हो चुकी, हालांकि मौत के कारण का अभी तक पता नहीं चला है। खतीक का मानना है कि अगर ये लोग अपने घरों के बाहर इसे टांग देते तो यह दिन देखने को नहीं पड़ता। जब मैंने इसे टांगा तो इन्ही लोगों ने मजाक उड़ाना शुरू कर दिया पर हम इसे टांगे रखे । 
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राजस्थान: कोविड के कारण ट्रेनों में यात्रियों की संख्या कम, रेलवे ने कई ट्रेनों को किया कैंसिल

कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए देश के अधिकांश राज्यों में लॉकडाउन लागू है। इस दौरान निजी कंपनियां और फैक्ट्रियों में ताले लगे हुए हैं, लोग भी ट्रेनें से कम यात्रा कर रहे हैं। राजस्थान में लॉकडाउन के बीच रेलवे ने यात्री भार में कमी को देखते हुए कई और रेल सेवाओं को रद्द करने या उनके फेरों में कमी की घोषणा की है। खाली चल रही ट्रेनों से रेलवे को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

उत्तर पश्चिम रेलवे के प्रवक्ता के अनुसार कम यात्री भार के कारण दस और रेल सेवाओं को रद्द किया गया है। इनमें जोधपुर-दिल्ली सराय रोहिल्ला स्पेशल ट्रेन, जोधपुर-इंदौर स्पेशल ट्रेन, जोधपुर-बाड़मेर स्पेशल, जोधपुर-बिलाड़ा स्पेशल व श्रीगंगानगर-अंबाला स्पेशल ट्रेन शामिल हैं जो 19 मई से आगामी आदेश तक रद्द रहेंगी।

इसके अलावा चार ट्रेन के फेरों में कमी करने का फैसला लिया गया है। इसके तहत अजमेर-अमृतसर स्पेशल 19 मई से आगामी आदेश तक सप्ताह में 2 दिन के स्थान पर बुधवार को चलेगी। बता दें कि रेलवे पहले भी अनेक ट्रेन रद्द कर चुका है।
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बेकाबू कोरोना: राजस्थान में ऑक्सीजन की मांग पांच गुना तक बढ़ी, हर रोज 31,425 सिलेंडर की खपत

राजस्थान में कोरोना वायरस संक्रमितों की बढ़ती संख्या के बीच मेडिकल ऑक्सीजन की मांग बीते तीन महीने में लगभग पांच गुना बढ़कर 31,425 सिलेंडर प्रतिदिन हो गई है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने इस बारे में जानकारी दी। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार ऑक्सीजन की बढ़ती मांग को पूरा करने की भरसक कोशिश कर रही है। इसके तहत अलवर में 1,000 ऑक्सीजन सिलेंडर की क्षमता का नया संयंत्र लगाया गया है, जबकि राजसमंद में 1,200 सिलेंडर प्रतिदिन क्षमता का संयंत्र अगले सप्ताह शुरू होने की संभावना है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शर्मा ने बताया कि राज्य में तीन महीने पहले ऑक्सीजन की खपत लगभग 6,500 सिलेंडर प्रतिदिन थी, जो फिलहाल बढ़कर 31,425 सिलेंडर प्रतिदिन हो गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या में हो रही निरन्तर वृद्धि के कारण आपातकालीन चिकित्सकीय ऑक्सीजन सिलेंडर की मांग लगातार बढ़ रही है। बढ़ती मांग को पूरा करने का भरसक प्रयास किया जा रहा है। चिकित्सा सचिव सिद्धार्थ महाजन ने बताया कि ऑक्सीजन के प्रबन्ध के लिए राज्य सरकार ने युद्ध स्तर पर प्रयास किए हैं। आपात स्थिति को देखते हुए जामनगर (गुजरात) से ऑक्सीजन टैंकरों की वायु मार्ग से आपूर्ति की गई है। साथ ही अलवर जिले में 1,000 सिलेंडर प्रतिदिन उत्पादन क्षमता का नया संयंत्र लगाया गया है।

1,200 सिलेंडर प्रतिदिन क्षमता का प्लांट शुरू
महाजन ने बताया कि अगले सप्ताह तक 1,200 सिलेंडर प्रतिदिन क्षमता का संयंत्र दरीबा (राजसमंद) में हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड द्वारा प्रारम्भ किया जा रहा है। इसके अलावा 500 सिलेंडर का उत्पादन शीघ्र ही शुरू हो रहा है। उन्होंने कहा कि समय पर ऑक्सीजन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ऑक्सीजन टैंकर में जीपीएस सिस्टम लगाये गये हैं और वाहनों की निगरानी राज्य नियंत्रण कक्ष से की जा रही है।
महाजन ने बताया कि ऑक्सीजन की औद्योगिक प्रयोजन से आपूर्ति पूर्णतः बंद करते हुए समस्त आपूर्ति को चिकित्सा उद्देश्य से सुनिश्चित किया गया है।
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उदयपुर: पुलिस के पहरे में निकली कांस्टेबल की बारात, जानें किसके डर से दूल्हे ने मांगी थी सुरक्षा

आजादी के 74 साल भी बाद भी गांवों में जातिवाद और ऊंच-नीच वाली भावना लोगों पर हावी है। राजस्थान के उदयपुर के गांव से ऐसा ही एक मामला सामने आया है। यहां दलित दूल्हे को डर था कि गांव के दबंग लोग उसे घोड़ी से उतार देंगे। खुद कांस्टेबल होने के बावजूद उसने पुलिस से सुरक्षा मांगी। बाद पुलिस सुरक्षा में बारात निकाली गई और शादी की शादी की रस्मों को अदा किया। 

राजस्थान में उदयपुर के राव मादड़ा में मंगलवार को एक कांस्टेबल कमलेश मेघवाल की पुलिस बल की मौजूदगी में शादी हुई। कांस्टेबल कमलेश मेघवाल को घोड़ी पर जाने पर विवाद होने की आशंका थी। शादी से पहले ही दूल्हे कमलेश ने पुलिस से शादी में सुरक्षा की गुहार की थी। इस पर शादी के दौरान डिप्टी एसपी, नायब तहसीलदार सहित दो थानों की फोर्स को तैनात किया गया। पुलिस सुरक्षा में बारात निकाली गई और शादी की सारी रस्में की गईं।

भाई ने कहा- घोड़ी से उतारने का डर था इसलिए मांगी सुरक्षा
दूल्हे के भाई दुर्गेश ने बताया कि गांव में दलित समाज के लोगों को घोड़ी पर बैठ बिंदोली नहीं निकालने दी जाती है। इससे पहले भी गांव में कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जब दलित दूल्हे को बिंदौली के वक्त घोड़ी से उतार दिया गया। इसकी वजह से शादी से पहले ही पुलिस और प्रशासन से मदद मांगी गई थी। प्रशासन की देखरेख में शादी की रस्मों को पूरा कर लिया गया है। वहीं राव मादड़ा के उप सरपंच योगेंद्र सिंह राव ने कहा कि गांव में इससे पहले ऐसी कोई घटना नहीं हुई। उसने सिर्फ पुलिसिया रौब झाड़ने के लिए ऐसा किया।
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इंतजाम: ऑक्सीजन-बेड नहीं मिल रहे, लेकिन राजस्थान सरकार कराएगी मुफ्त अंतिम संस्कार

कोरोना काल में राज्य सरकार मरीजों को ऑक्सीजन, बेड या दवा तो मुहैया नहींं करा पा रही है, लेकिन शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए अलग से व्यवस्था जरूर बना दी है। राजस्थान सरकार ने पूरे प्रदेश में एक नया फरमान जारी किया है कि कोरोना संक्रमितों के अंतिम संस्कार का खर्च राज्य सरकार उठाएगी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार जो फंड अंतिम संस्कार के लिए जारी कर रही है, उससे तो मरीजों की जान बचाई जा सकती है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि अंतिम संस्कार के लिए सरकार पूरा खर्च उठाएगी। साथ ही शव को अस्पताल से श्मशान-कब्रिस्तान ले जाने के लिए मुफ्त एंबुलेंस या वाहन की सुविधा भी देगी। सीएम गहलोत ने व्यवस्था तुरंत प्रभाव से लागू करने के भी निर्देश दिए हैं। 

मुफ्त वाहन उपलब्ध कराने के निर्देश
दरअसल, जोधपुर उत्तर नगर निगम की ओर से यह व्यवस्था लागू की गई । जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सभी कलेक्टरों, शहरी निकायों और अस्पतालों को निर्देश जारी किए हैं। शवों का अस्पताल या घर से श्मशान, कब्रिस्तान तक सम्मानपूर्वक परिवहन सुनिश्चित किया जाए। अस्पताल से पार्थिव देह ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिले तो ऐसी हालत में जिला परिवहन अधिकारी वाहनों का अधिग्रहण करवाकर व्यवस्था करने में सहयोग करे।   मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि पूरे प्रदेश में इस व्यवस्था के बारे में प्रचार प्रसार करने के लिए शहरी निकायों के कंट्रोल रूम को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कंट्रोल रूम से मिलेगी एंबुलेंस
कंट्रोल रूम को इसके लिए टोल फ्री नंबर भी जारी करने को कहा गया है। पार्थिव देह को निशुल्क ले जाने के लिए वाहन या एंबुलेंस की व्यवस्था शहरी निकाय के कंट्रोल रूम के अधीन रहेगी। कंट्रोल रूम में एंबुलेंस के लिए कॉल आने पर उसका पूरा ब्योरा दर्ज कर किया जाएगा। बता दें कि राजस्थान में कोरोना की रफ्तार तेज है। शनिवार को यहां पर कोरोना से 70 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। जबकि करीब 6 हजार नए मामले सामने आए हैं। सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि जल्द ही इसे काबू कर लिया जाएगा। 
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इंसानियत: प्लाज्मा डोनेट करने के लिए मुस्लिम युवक ने तोड़ा रोजा, बोला- किसी की सेवा सबसे बड़ी इबादत

देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच कई हिस्सों से ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिन्होंने अंदर तक झकझोर कर रख दिया। कई ऐसी घटनाएं घटित हुईं जिन्होंने मानवता को शर्मसार कर दिया लेकिन राजस्थान के उदयपुर में एक शख्स ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने इंसानियत को फिर जगा दिया है। 

बुधवार को उदयपुर के रहने वाले एक शख्स ने अपना रोजा तोड़ दिया ताकि कोरोना से संक्रमित दो महिलाओं को प्लाज्मा डोनेट कर सके। इस शख्स का नाम अकील मंसूरी हैै, जो एक सिविल कॉन्ट्रैक्टर के तौर पर काम करता है। अकील ने बिना किसी हिचकिचाहट के एक नेक काम के लिए अपना रोजा तोड़ दिया। 

शख्स के इस कारनामे की हर जगह वाहवाही हो रही है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शख्स को सोशल मीडिया नेटवर्किंग और ब्लड डोनर ग्रुप के जरिए इस बात की जानकारी मिली कि दो कोविड संक्रमित महिलाओँ को प्लाज्मा की जरूरत है। इन दो महिलाओं को A+ ब्लड ग्रुप के प्लाज्मा की जरूरत थी। 

एक महिला का नाम निर्मला था, उनकी उम्र 36 साल थी, वहीं दूसरी महिला की उम्र 30 साल थी और उनका नाम अल्का था। मंसूरी ने कहा कि सोशल मीडिया पर पोस्ट को देखते ही वो अस्पताल की ओर भागे और प्लाज्मा डोनेट का फैसला किया। 

अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टर अकील मंसूरी को एंटीबॉडी टेस्ट के लिए ले गए, जहां डॉक्टरों ने पाया कि वो प्लाज्मा डोनेट करने के लिए एक दम फिट हैं। बकौल मंसूरी डॉक्टर ने उनसे कहा कि क्योंकि वो सुबह से रोजा रखे हुए हैं, इसलिए प्लाज्मा डोनेट करने से पहले वो कुछ खा लें। इसलिए मैंने अपना रोजा तोड़ा और खून डोनेट किया। 

मंसूरी ने कहा कि एक इंसान के तौर पर उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी की। मंसूरी ने कहा कि प्लाज्मा डोनेट करने के बाद उन्होंने दोनों महिलाओं के जल्द ठीक होने की भी प्रार्थना की। सितंबर 2020 में कोरोना से ठीक होने के बाद मंसूरी ने कम से कम 17 बार अपना खून डोनेट किया है। मंसूरी ने बताया कि उन्होंने पहले भी प्लाज्मा डोनेट किया है और ठीक हुए सभी लोगों से अपील की है कि वो जरूरतमंद लोगों को प्लाज्मा जरूर डोनेट करें।
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