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HP High Court: शिक्षक अपने हितों की देखभाल में लगे हैं, विद्यार्थी राम भरोसे, हाईकोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 29 Sep 2022 08:29 PM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने स्थानांतरण के संबंध में शिक्षकों पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा की शिक्षक अपने हितों की देखभाल में लगे हैं और उनके शिष्यों के हितों की जिम्मेदारी राम भरोसे है। 

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्थानांतरण के संबंध में शिक्षकों पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा की शिक्षक अपने हितों की देखभाल में लगे हैं और उनके शिष्यों के हितों की जिम्मेदारी राम भरोसे है। न्यायाधीश तरलोक सिंह और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हम विश्वास के साथ कह सकते हैं कि शिक्षा विभाग शायद सबसे बड़े वादियों में से एक है। विभाग के खिलाफ शिक्षकों का स्थानांतरण और समायोजन के संबंध में अधिकांश याचिकाएं दर्ज हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि हालांकि अकेले शिक्षक ही इसके लिए दोषी नहीं है। तबादलों पर रोक लगाने के बावजूद सरकार भी अपनी ही अधिसूचना का खुले तौर पर उल्लंघन करती है। 



अदालत ने कहा कि शिक्षक बनना एक पवित्र मिशन है। शिक्षा के लिए अपना समर्पण ही एक शिक्षक की पहचान है। आम धारणा में शिक्षक चरित्रवान, ईमानदारी, सरलता और निष्ठा जैसे गुणों से परिपूर्ण होता है। वह अपने शिष्यों को ज्ञान, शिक्षा, अनुशासन और बौद्धिकता को सक्षम करने और जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है। जाहिर है इसलिए शिक्षक को माता-पिता और भगवान से ऊंचा माना गया है।  एक समर्पित और अनुशासित शिक्षक के बिना सबसे अच्छी शिक्षा प्रणाली भी विफल होने के लिए बाध्य है। यह बहुत ही दयनीय स्थिति होगी जब भगवान के समान माने जाने वाले शिक्षक सिर्फ स्वयं के हितों की देखभाल में व्यस्त होंगे और अपने शिष्यों के हितों की जिम्मेदारी राम भरोसे छोड़ेंगे। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कोटखाई में टीजीटी के पद पर कार्यरत अनीता कुमारी की याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने यह टिप्पणी की है। याचिकाकर्ता ने अपनी बीमारी के कारण स्थानांतरण के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी। 


चरागाह भूमि को पौधरोपण के लिए परिवर्तित करने पर उपायुक्त शिमला तलब 
शिमला जिले के जुब्बल में वन भूमि पर किए गए कब्जों के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने उपायुक्त शिमला को तलब किया है। अवैध कब्जों से पर्यावरण पर पड़ रहे असर को बताने के लिए एनजीटी ने उपायुक्त को 10 नवंबर को पूरे रिकॉर्ड के साथ पेश होने के आदेश दिए हैं। चरागाह की 45 बीघा भूमि को पौधरोपण के लिए परिवर्तित करने पर ट्रिब्यूनल ने असंतोष जताया है। ट्रिब्यूनल ने हैरानी जताई है कि यदि चरागाह भूमि पर पौधरोपण किया जाता है तो मवेशियों को चरने के लिए जगह कहां रहेगी। जुब्बल निवासी कुलतार सिंह के लिखे पत्र पर एनजीटी ने संज्ञान लिया है। याची ने पत्र में आरोप लगाया गया है कि जुब्बल क्षेत्र में वन भूमि पर कब्जे किए गए हैं। हाईकोर्ट के आदेशों पर इन कब्जों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन बाद में इस मुहिम को बंद कर दिया गया। एनजीटी ने इस मामले की जांच और रोकथाम के लिए कानूनी तौर पर आवश्यक कदम उठाने के आदेश दिए थे।

बता दें कि एनजीटी के आदेशों की अनुपालना करते हुए वन विभान ने एनजीटी को रिपोर्ट सौंपी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को बताया गया कि रोहड़ू वन मंडल मेें 444 हेक्टेयर अवैध कब्जे करने पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। 30 जून 2022 तक 421 ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने दस-दस बीघा से अधिक वन भूमि पर कब्जा किया है। 452 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ बेदखली के आदेश पारित किए गए हैं। इसमें से 441 हेक्टेयर वन भूमि को छुड़ा लिया गया है। दस-दस बीघा से कम अवैध कब्जाधारियों ने भी 465 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जा किया हुआ था। इसमें से 453 हेक्टेयर वन भूमि पर से अवैध कब्जे हटा दिए गए हैं। इसके अलावा 1,650 अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ अदालत में मामला लंबित है। इनमें 203 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है। 1,075 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जों के नियमितीकरण के लिए 3,082 आवेदन प्राप्त हुए हैं। याचिकाकर्ता को सदाबहार पेड़ लगाने के लिए खड़ापत्थर में 45 बीघा वन भूमि चिन्हित की गई है। 

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