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इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर बप्पा के घर में आगमन से होंगी ये राशियां धनवान
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शिमला के अयान को मिला यंग इको हीरो अवार्ड

मूलत: हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला के कोटखाई निवासी और मुंबई में पढ़ रहे 13 वर्षीय आठवीं के छात्र अयान शांकटा यंग इको हीरो अवार्ड-2021 के लिए नामित हुए...

10 सितंबर 2021

Digital Edition

शिमला: फेसबुक पर दोस्ती कर दो बच्चों की मां से किया दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार

राजधानी शिमला में दो बच्चों की मां से दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है। फेसबुक के जरिये दोस्ती कर उत्तर प्रदेश के एक युवक ने पीड़िता को दुष्कर्म का शिकार बनाया। शिमला पुलिस ने तुरंत कार्रवाई कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी उत्तर प्रदेश के शामली का मूल निवासी है और शिमला में कारपेंटर का काम करता है। 

सिरमौर जिले की रहने वाली पीड़ित महिला शिमला के उपनगर संजौली में रह रही है। पीड़ित महिला की उम्र 27 वर्ष है और वह दो बच्चों की मां है। मिली जानकारी के मुताबिक कुछ समय पहले पीड़ित महिला की फेसबुक के जरिये उत्तर प्रदेश के शामली निवासी मेहताब (24) से दोस्ती हुई थी। इस दोस्ती के बाद दोनों के बीच फोन पर भी बात होने लगी। आरोपी ने महिला को बताया कि वह शिमला में कारपेंटर का काम करता है और फिनगास्क इस्टेट में रह रहा है।

महिला के अनुसार तीन माह पहले शहर के कालीबाड़ी मंदिर में मेहताब उससे मिलने आया। इसके बाद मेहताब उसे आईजीएमसी की तरफ एक सुनसान जगह पर ले गया और उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया। उसके बाद वह दोनों कई बार मिले और मेहताब उसका शारीरिक शोषण करने लग गया।
 
पीड़ित महिला ने आरोप लगाया कि तीन माह से मेहताब उसके साथ जबरस्ती कर रहा है। एक सप्ताह में दो बार वह दुष्कर्म का शिकार हो रही है। मना करने पर आरोपी उसे पीटता है और उसे जान से मारने की धमकी दे रहा है। तंग आकर पीड़ित महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है।

डीएसपी हेडक्वार्टर कमल वर्मा ने बताया कि पीड़ित महिला की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए आरोपी को शिमला में गिरफ्तार कर लिया गया है। वह कारपेंटर का काम करता है। आरोपी के खिलाफ सदर थाना में आईपीसी की धारा 376, 506 व 323 में केस दर्ज किया गया है।
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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

हिमाचल: पुल के नीचे दो नवजात जुड़वा बच्चियों के शव मिले, क्षेत्र में सनसनी

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में रविवार सुबह सकोडी पुल के नीचे दो नवजात बच्चियों के शव मिले हैं। दोनों बच्चियां जुड़वा बताई जा रही हैं और इनकी उम्र तीन माह के आसपास बताई जा रही है।

मंडी शहर के बीचों बीच सुहड़ा मोहल्ला में शव बरामद होने से सनसनी फैल गई है। पुलिस ने दोनों शवों को खड्ड से निकाला और कार्रवाई शुरू कर दी है। नीलकंठ अस्पताल में कार्यरत सुहड़ा मोहल्ला निवासी पंकज कुमार सुबह अपनी ड्यूटी से छुट्टी कर घर जा रहे थे तो उनकी नजर पुल के पास फंसी इन बच्चियों पर पड़ी।

उन्होंने पहले दोनों को खिलौने समझा। लेकिन जब नजदीक जाकर देखा तो ये बच्चे थे। पुलिस अधीक्षक मंडी शालिनी अग्निहोत्री ने बताया कि सूचना मिलते ही बच्चियों के शवों को निकाल लिया गया है। कार्रवाई जारी है। आसपास के लोगों के भी बयान पुलिस ने कलमबद्ध किए हैं।
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सड़कों पर गुणवत्ता जांचने मौके पर नहीं गए अधिकारी, केंद्र ने लगाई फटकार

हिमाचल प्रदेश की 12 सड़कों की गुणवत्ता जांच को चिन्हित अधिकारियों के एक बार भी स्पॉट पर नहीं जाने पर केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के परियोजना-तीन के निदेशक डॉ. आईके पेरिया ने इस संबंध में हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता और मुख्य अभियंता को पत्र भेजा है।

इसमें एक बार भी गुणवत्ता नियंत्रण मानिटर के माध्यम से इन सड़कों में इस्तेमाल सामग्री और अन्य मानकों की जांच नहीं करने पर हैरानी जताई है। साथ ही निर्देश दिए हैं कि सितंबर महीने मेें इनकी जांच कर ली जाए।  यह मामला प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में राज्य सरकार की ओर से नियुक्त प्रदेश गुणवत्ता नियंत्रण निगरानी अधिकारियों के कामकाज से संबंधित है। इनकी कार्यशैली पर केंद्र सरकार ने सवाल खड़ा किया है।

इसमें कहा गया है कि राज्य में बड़ी संख्या में निर्माणाधीन और पूरी हो चुकी पीएमजीएसवाई परियोजनाएं हैं। इनमें काम शुरू किए जाने से आज तक एक बार भी राज्य गुणवत्ता निगरानी अधिकारियों ने जांच नहीं है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने इस चिट्टी में कहा है कि इन अधिकारियों को हिमाचल प्रदेश में हर महीने गुणवत्ता की जांच करने का काम नहीं दिया जा रहा है। न ही उन्हें दिशा-निर्देशों के अनुसार ही काम दिया जा रहा है। इन्हें एक महीने में एक जिला का काम दिया जा रहा है और पांच-छह काम दिए जा रहे हैं।


इनमेें से भी वे एक महीने में चार से कम कार्यों की जांच कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने कहा कि इन्हें एक महीने में दो जिलों का काम दिया जाए। इनमें से भी हर जिले में आठ से दस काम दिए जाने चाहिए। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता और मुख्य अभियंता को कहा गया है कि वे तीन महीने से पुराने कार्यों की सितंबर 2021 तक गुणवत्ता निगरानी जांच करवा लें। ऐसे तमाम कार्यों की जांच के लिए एक महीने में कम से कम दस दिन जांच करवाई जाएं। 
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कामयाबी: इंजीनियरिंग छोड़ उगाई मशरूम, कीमत एक लाख रुपये किलो

आईटी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद नौकरी छोड़ हिमाचल प्रदेश के सोलन के युवा निशांत गाजटा ने करीब एक लाख रुपये प्रति किलो बिकने वाली कीड़ा जड़ी यानी कोर्डिसेप नामक मशरूम लगाने में कामयाबी हासिल की है। अभी इस तरह की मशरूम सोलन में मशरूम अनुसंधान निदेशालय (डीएमआर) ही तैयार कर रहा है। केंद्र की ओर से उत्पादकों को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। निशांत ने कोर्डिसेप का अपने घर में व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है।

सोलन स्थित निशांत की लैब में करीब 12 किलो कोर्डिसेप की पहली खेप तैयार है, जिसकी कीमत लाखों में है। अभी तक प्रदेश में डीएमआर के अलावा व्यावसायिक तौर पर किसी ने भी कीड़ा जड़ी की खेती नहीं की है। कई कृषकों ने इसे लगाने का प्रयास किया, लेकिन कामयाब नहीं हो पाए। निशांत ने बताया कि कोरोना काल में जब सबके रोजगार पर तलवार लटक चुकी थी, तब उनके मन में इसकी खेती करने का विचार आया। इसके लिए आवश्यक रॉ मैटीरियल तथा केमिकल आदि की खरीद कर ली। 

मशरूम ब्वॉय के नाम से मशहूर हैं निशांत
यूं तो मशरूम सिटी ऑफ इंडिया सोलन में कई तरह की मशरूम उगाई जाती है, लेकिन कोर्डिसेप का उत्पादन कर निशांत मशरूम ब्वॉय के नाम से मशहूर हो चुके हैं। निशांत ने बताया कि उनके माता-पिता ने बहुत साथ दिया। घर पर ही लैब तैयार की, जिसमें कोर्डिसेप की सफलतापूर्वक खेती की है। उन्हें डीएमआर से इसमें कोई विशेष सहयोग नहीं मिला। 

डीएमआर में दिया जा रहा कोर्डिसेप पर प्रशिक्षण : डॉ वीपी शर्मा
मशरूम अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने बताया कि डीएमआर में समय-समय पर कोर्डिसेप सहित अन्य मशरूम के उत्पादन पर प्रशिक्षण दिया जाता है। केंद्र ने करीब तीन वर्ष पहले इसका उत्पादन शुरू किया है। 20 से 22 सितंबर तक विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाया जा रहा है। 

स्टेमिना बढ़ाती है कोर्डिसेप मशरूम 
कोर्डिसेप्स मिलिटेरिस एक प्राकृतिक तौर पर उगने वाली जंगली मशरूम है। इसे अब लैब में तैयार करने में सफलता मिल चुकी है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह मशरूम मनुष्य के शरीर में रोगों से लड़ने की ताकत बढ़ाती है। थकान मिटाने और स्टेमिना बढ़ाने में भी कारगर है। चीन के खिलाड़ी इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं। चीन और तिब्बत में इसे यारशागुंबा कहा जाता है। फेफड़ों और किडनी के इलाज में भी इसे जीवन रक्षक दवा माना जाता है। कैंसर की रोकथाम और यौन क्षमता बढ़ाने में भी यह लाभकारी है।
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हमीरपुर: एक व्यक्ति को दो नामों से जारी कर दी किसान सम्मान निधि

इंजीनियरिंग छोड़ निशांत गाजटा ने उगाई मशरूम
एक ही किसान को दो अलग-अलग बैंक खातों में पीएम सम्मान निधि बांटी गई है। यह मामला विकास खंड बमसन का है। एक खाते में उपनाम कुमार है तो दूसरे में शर्मा है। जबकि पिता का नाम और घर का पता दोनों खातों में एक ही दर्शाया है। मामला उजगार होते ही राजस्व विभाग ने जांच शुरू कर दी है।

विभाग का कहना है कि एक ही व्यक्ति दो अलग-अलग नाम से पीएम किसान सम्मान निधि हासिल करने का अनोखा मामला सामने आया है। जांच कर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। जिले में अपात्र परिवारों ने पीएम किसान सम्मान निधि के करीब 98.40 लाख रुपये डकारने का मामला भी सामने आ चुका है।

विभाग ने जांच के बाद करीब 42 लाख रुपये की रिकवरी कर ली है। जबकि राशि को वसूलने की प्रक्रिया जारी है। इस तरह के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश भू रिकॉर्ड और राजस्व विभाग के निदेशक ने प्रदेश की सभी पंचायतों में पीएम किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों की सूची चस्पां करने के आदेश जारी किए हैं।

इसके साथ ही पंचायत सचिव, पटवारी और नंबरदार तीन लोगों की कमेटी को पीएम किसान सम्मान निधि मामले की जांच के निर्देश भी दिए हैं। उधर, जिला राजस्व अधिकारी देवराज भाटिया ने कहा कि अपात्र लोगों से पीएम किसान सम्मान निधि को वसूलने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि एक ही व्यक्ति दो अलग-अलग नाम से सम्मान निधि हासिल करने के मामले की जांच की जाएगी।
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हिमाचल : ऑनलाइन शिक्षा देने वाले उत्कृष्ट शिक्षक पांच अक्तूबर को होंगे सम्मानित

कोरोना संकट के दौरान हर घर पाठशाला कार्यक्रम के तहत ऑनलाइन शिक्षा देने वाले उत्कृष्ट शिक्षकों को पांच अक्तूबर को सम्मानित किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षा विभाग समारोह आयोजित करेगा। सम्मानित किए जाने वाले शिक्षकों के चयन को विभागीय अधिकारियों ने प्रक्रिया शुरू कर दी है।

शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने बताया कि पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर अधिक शिक्षकों को सम्मानित नहीं किया जा सका। ऐसे में कोरोना संकट के दौरान बेहतर तरीके से ऑनलाइन पढ़ाई करवाने वाले शिक्षकों को अब अंतरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर सम्मानित करने का फैसला लिया है।
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शिमला: सेब के औसत दाम में 200 से 300 रुपये की तेजी

सेब के औसत रेट में बीते माह के मुकाबले 200 से 300 रुपये की तेजी आई है। 20 दिन पहले सेब के औसत रेट 800 से 1000 रुपये प्रति पेटी थे। यह अब 1200 से 1300 रुपये पहुंच गए हैं। हालांकि, बीते साल के मुकाबले अभी भी रेट कम हैं। पिछले साल सितंबर में बढ़िया क्वालिटी के सेब के औसत रेट 1400 से 1500 रुपये प्रति पेटी थे। सेब खरीद कर रही कॉरपोरेट कंपनियों ने भी कीमतों में 2 से 6 रुपये की बढ़ोतरी की है। सेब की कम कीमतों के मुद्दे पर संघर्ष कर रहा संयुक्त किसान मंच इसे अपने आंदोलन का प्रभाव बता रहा है।

इस साल बेमौसम बर्फबारी और ओलावृष्टि के कारण सेब की फसल प्रभावित हुई है। सेब का साइज नहीं बढ़ पाया और ओले के दाग भी हैं। बावजूद इसके मंडियों में छोटे आकार के सेब (पित्तू) की कीमतें भी सुधर रही हैं। 20 दिन पहले ऐसा सेब 800 से 1000 रुपये पेटी बिक रहा था। अब इसके दाम 1200 से 1400 रुपये पेटी हो गए हैं। ओले से क्षतिग्रस्त सेब के रेट अभी भी 300 से 600 रुपये चल रहे हैं। बीते साल सेब पर ओलों की मार कम थी, जिसके चलते सितंबर में औसत रेट 1500 रुपये तक थे। बीते साल के मुकाबले इस साल सेब की प्रति पेटी लागत में 20 से 30 फीसदी इजाफा हुआ है। लागत के अनुपात में कीमतें नहीं बढ़ी हैं।

सरकार गंभीर नहीं इसलिए नहीं मिल रही लागत : संजय
संयुक्त किसान मंच के सह संयोजक संजय चौहान ने बताया कि किसानों-बागवानों के आंदोलन का परिणाम है कि मंडियों में 7 लेयर पित्तु सेब के रेट 300 से 400 रुपये तक बढ़े हैं। कॉरपोरेट कंपनियां जो हमेशा रेट गिराती थीं इस बार रेट बढ़ा रही हैं। हालांकि, सरकार अभी भी अपनी जिम्मेवारी नहीं निभा रही। सरकार गंभीर होती तो एमआईएस के तहत ए, बी और सी ग्रेड के 60, 44 और 24 रुपये के रूप में लागत निकल जाती।

स्टोर क्वालिटी के सेब को सही दाम दे रहे खरीदार : हरीश
आढ़ती एसोसियेशन पराला के अध्यक्ष हरीश ठाकुर ने बताया कि सेब की कीमतों में सुधार आया है। छोटे आकार का सेब 1400 रुपये तक बिक रहा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों के सेब को बढ़िया क्वालिटी के चलते स्टोर किया जा सकता है इसलिए खरीदार सही रेट दे रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले रेट अभी भी कम है क्योंकि पिछले साल सेब की क्वालिटी बढ़िया थी, ओलों की मार नहीं थी।
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बागवानी: विदेश से मंगवाए पौधों से पुराने सेब बगीचों में वायरस फैलने का खतरा

हिमाचल प्रदेश में बिना क्वारंटीन किए आयातित सेब पौधों से वर्षों पुराने बगीचों में वायरस का खतरा है। सरकार ने बागवानी विभाग के अधिकारियों को निगरानी रखने के आदेश दिए हैं। प्रदेश में विदेशों से आयात कर बिना क्वारंटीन किए सेब पौधे बेचने पर पूरी तरह से रोक  है। सरकार ने विदेशों से आयात कर क्वारंटीन किए बिना सेब के पौधे बागवानों को बेचने के मामले में तीन नर्सरियों के सर्टिफिकेट रद्द कर दिए हैं।

ये नर्सरियां भी क्वारंटीन किए बिना सेब के पौधे गलत तरीके से बेच रही थीं। ऐसे मामले सामने आने के बाद सरकार ने बागवानी विभाग के अधिकारियों को लिखित आदेश जारी किए हैं कि जो लोग बागवानी विभाग से सर्टिफिकेट लेकर आयातित सेब पौधे बागवानों को बेच रहे हैं, वे नियमों का सख्ती से पालन कर रहे हैं या नहीं। अगर नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है तो ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। 

आयातित सेब पौधे एक साल रहते हैं क्वारंटीन 
केंद्र सरकार के कड़े निर्देश हैं कि अगर कोई विदेशों से सेब या अन्य फलदार पौधे आयात करता है तो उनको भी एक साल तक क्वारंटीन करना जरूरी है। इस दौरान वैज्ञानिक नजर रखते हैं कि विदेश से पौधों के साथ कोई वायरस या कोई बीमारी तो ही आई है। ये पौधे सही पाए जाते हैं तो इन्हें बागवानों को बेचा जा सकता है। विदेशों से फलदार पौधे आयात करने के लिए बागवानी विभाग से सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। 

क्या कहते हैं बागवानी निदेशक 
प्रदेश बागवानी निदेशक जेपी शर्मा ने कहा कि विदेशों से सेब के पौधे आयात करने से पहले सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। इसके बाद इन पौधों को एक साल तक क्वारंटीन कर वैज्ञानिकों की निगरानी में रखना पड़ता है। इसके बाद ही बागवानों को ये पौधे बेचे जा सकते हैं। बागवानी विभाग के अधिकारियों को ऐसे लोगों पर निगरानी रखने को अधिकारियों को लिखित आदेश जारी किए हैं। 
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हिमाचल के सरकारी स्कूलों में 28 सितंबर को शिक्षक-अभिभावक संवाद

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों के साथ 28 सितंबर को शिक्षक संवाद करेंगे। इस दौरान फर्स्ट टर्म परीक्षाओं के परिणामों को साझा किया जाएगा। समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना कार्यालय की ओर से इस बाबत सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। चार से 14 सितंबर तक सरकारी स्कूलों में नौवीं से 12वीं कक्षा की फर्स्ट टर्म परीक्षाएं ऑनलाइन ली गई हैं। प्रति विषय तीन घंटे की परीक्षा में विद्यार्थियों से 40 फीसदी ऑब्जेक्टिव और 60 फीसदी सब्जेक्टिव सवाल पूछे गए।

परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं की विद्यार्थियों ने मोबाइल फोन से फोटो खिंचकर वापस भेजी। उत्तर पुस्तिकाओं को अभिभावकों के माध्यम से संबंधित शिक्षकों के पास भी जमा कर लिया गया है। 26 सितंबर तक सभी शिक्षकों को परीक्षा परिणाम तैयार करने को कहा गया है। 28 सितंबर को आयोजित होने वाले संवाद में अभिभावकों को स्कूलों में बुलाकर या ऑनलाइन संवाद किया जाएगा। फर्स्ट टर्म परीक्षा के नतीजों को अभिभावकों से साझा करते हुए कमियों को दूर करने के लिए आगामी योजना बनाई जाएगी।
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