रक्षाबंधन 2018 : जानें एक बहन अपने भाई से ही क्यों करती है रक्षा की अपेक्षा

— राजयोगिनी दादी जानकी जी , मुख्य प्रशासिका, ब्रह्माकुमारीज Updated Sun, 26 Aug 2018 09:07 AM IST
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भारत एक बहुआयामी सांस्कृतिक विरासत का संवाहक अद्वितीय देश है। प्रत्येक धर्मों में मनाये जाने वाले त्योहार, धार्मिक परम्पराएं, रीति-रिवाज एवं जयन्तियां, मनुष्य को किसी न किसी रूप से आध्यात्मिक सत्ता से जोड़ती हैं। शायद इसी कारण से इस अति भौतिकतावादी संस्कृति और भाग्यविधाता विज्ञान के युग में भी ईश्वर की सत्ता विविध रूपों में स्वीकार्य है। परन्तु कालान्तर में जब लोगों में श्रद्धा एवं स्नेह का क्षरण होने लगता है तो इनमें निहित आध्यात्मिक सत्य का स्थान कर्मकाण्ड एवं अनौपचारिकता ले लेती है। यह कहना अतिशयोक्ति न होगी कि आज पर्व औपचारिकता को निभाने के लिए मनाए जाते हैं। परन्तु आज के वैज्ञानिक युग में इन त्योहारों के पीछे छिपे आध्यात्मिक सत्य का उद्घाटन करने की आवश्यकता है जिससे इस संसार में व्याप्त अज्ञानता और तमोप्रधानता को दूर करके मनुष्य-सभ्यता को यथार्थ मार्ग दिखाया जा सके।

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रक्षाबन्धन का अर्थ

रक्षाबन्धन के बारे में अधिकतर लोगों की यह मान्यता चली आती है कि यह त्यौहार भाई द्वारा बहन की रक्षा का संकल्प लेने का प्रतीक है। साथ-साथ यह भी कहा जाता है कि यह त्योहार हमारे देश में चिरकाल से मनाया जाता रहा है। यदि ये दोनों बातें है तो ये कई प्रश्नों को जन्म देती हैं। क्योंकि चिरकाल की गाथायें तो आज भी प्रचलित हैं कि उस समय जो भी राजा हुआ करते थे वो अपनी प्रजा अथवा अपनी जनता का हर सम्भव ख्याल रखते थे। यहां तक कि प्रजा की देखभाल के लिए गुप्तचर भी राज्य में गुप्त वेश में ऐसी वारदातों के बारे में जानकारी रखने के लिए नजर रखते थे। राजा खुद भी अपना वेश बदल कर राज्य में भ्रष्टाचार करने वाले लोगों पर नजर रखते थे। तो क्या उस समय की माताएं बहने इतनी असुरक्षित थी जो रक्षाबन्धन के जरिये अपने भाईयों के हाथ में राखी बांध सुरक्षा की गुहार करती थी! उस समय भ्रष्टाचार भी इतना अधिक नहीं था जितना कि आज के दौर में है।

भाई से ही रक्षा की क्यों अपेक्षा

इसके बावजूद जहाँ तक रक्षा का सवाल उठता है तो यह गहराई से सोचने का विषय है कि हर एक बहन अपने भाई से ही रक्षा की अपेक्षा क्यों करती है? उसके घर में तो उसके बड़े बुजुर्ग तथा नाते रिश्तेदार भी तो होते हैं जो उसकी रक्षा कर सकते हैं। यदि भाई से बहन की अपेक्षा है तो यह विचारणीय तथ्य है कि दो साल उम्र वाला भाई पांच साल की बहन की रक्षा कैसे कर सकता है? इसके अलावा जब बहनें विवाहोपरान्त अपने-अपने घर चली जाती हैं तो उस समय दोनों एक जगह तो होते नहीं कि एक दूसरे की तात्कालिक रक्षा कर सकें। दूसरा भाई का फर्ज वैसे भी तो रक्षा करने का होता है और करता भी है।

पांच विकारों से आत्मा की रक्षा

रोचक बात तो यह है कि बहनों के अलावा ब्राह्मण अपने यजमान को राखी बाँधते हैं और यह कहते हैं कि- इन्द्राणी ने इन्द्र को राखी बाँधी थी और उससे इन्द्र को विजय प्राप्त हुई थी। यद्यपि कुछ लोग इस पर्व को विषतोड़क पर्व भी कहते है। अत यदि यह त्योहार भाई द्वारा बहन की रक्षा के संकल्प का ही प्रतीक होता, तो आज ब्राह्मणों द्वारा राखी बाँधने का रिवाज क्यों चला आता ? इससे विदित होता है कि यह त्योहार बहनों को भी ब्राह्मणों का दर्जा देकर और भाई को यजमान की तरह से राखी बाँधने का प्रतीक है क्योंकि दोनों द्वारा राखी बाँधने की रीति समान है। रक्षाबन्धन का अर्थ केवल शारीरिक रक्षा से ही नहीं बल्कि आत्मा की रक्षा पांच विकारों से करने से है। हर एक को इनसे रक्षा करनी ही चाहिए।

रक्षाबन्धन का वास्तविक महत्व

उपरोक्त लिखित तथ्यों से यह पूर्णत स्पष्ट हो चुका है कि रक्षा बन्धन का त्योहार एक धार्मिक त्योहार है। इसका तात्पर्य केवल भाई-बहन की रक्षा से ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की रक्षा से है। रक्षाबन्धन का पर्व इन्द्रियों पर विजय प्राप्त करने का सूचक है अर्थात् भाई और बहन के नाते जो मन, वचन और कर्म की पवित्रता समाई हुई है, उसका बोधक है। आज हर बहन जब अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधे तो वह राखी इस बात का प्रतीक हो कि -भैया, जैसे तुम अपनी इस बहन को एक निर्मल स्नेह की दृष्टि से देखते हो और अपनी इस बहन की रक्षा का संकल्प लेते हो, वैसे ही इस को बाँधकर अपने में यह प्रतिज्ञा करो कि तुम भारत की ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की हर नारी को बहन की दृष्टि से देखोगे। तुम हर माता-बहन की लाज का ख्याल रखोगे। दूसरे रूप में यह त्योहार ऐसे समय की याद दिलाता है जब परमपिता परमात्मा ने प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा कन्याओं-माताओं को ब्राह्मण पद पर आसीन किया, उन्हें ज्ञान का कलश दिया और उन द्वारा भाई-बहन के सम्बन्ध की पवित्रता की स्थापना का कार्य किया, जिसके फलस्वरूप सतयुगी पवित्र सृष्टि की स्थापना हुई। उसी पुनीत कार्य की आज पुनरावृत्ति हो रही है। ब्रह्माकुमारी बहनें ईश्वरीय ज्ञान और सहज राजयोग द्वारा ब्राह्मण पद पर पर आसीन होकर, बहन-भाई के शुद्ध स्नेह और पवित्रता के शुद्ध संकल्प की राखी बाँधती है।

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