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उम्मीद: रोनाल्डो के पुर्तगाल में रहकर फुटबॉल सीखेंगी अफगान लड़कियां, महिला टीम की कप्तान ने दिलाई नई जिंदगी

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लिस्बन Published by: शक्तिराज सिंह Updated Thu, 30 Sep 2021 09:08 PM IST

सार

अफगानिस्तान जूनियर फुटबॉल टीम की लड़कियां तालिबान के शासन में लगभग एक महीना बिताने के बाद पुर्तगाल पहुंची हैं। अब ये सभी खिलाड़ी यहीं रहकर फुटबॉल सीखेंगी और अपना सपना पूरा करेंगी। 
पुर्तगाल पहुंचने के बाद फरखुंदा मुहताज से मिलती महिला खिलाड़ी।
पुर्तगाल पहुंचने के बाद फरखुंदा मुहताज से मिलती महिला खिलाड़ी। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

अफगानिस्तान में तालिबान का राज होने के लगभग एक महीने बाद वहां की जूनियर टीम की खिलाड़ियों को नई जिंदगी मिली है। देश की महिला फुटबॉल टीम की कप्तान फरखुंदा मुहताज की बदौलत ये लड़कियां 19 सितंबर को पुर्तगाल पहुंच चुकी हैं। यहां रहकर ये लड़कियां फुटबॉल सीखेंगी और पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ी बनने का सपना पूरा कर सकेंगी। अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा होने के बाद यहां के हालात बहुत तेजी से बदले हैं। खासकर 31 अगस्त को अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद लड़कियों के ऊपर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए हैं और उन्हें कोई भी बाहरी खेल खेलने की अनुमति मिलना बहुत मुश्किल है।
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अफगानिस्तान की महिला फुटबॉल टीम की कप्तान फरखुंदा मुहताज को अफगानिस्तान के हालातों का अंदाजा था। वो देश की जूनियर फुटबॉल खिलाड़ियों के संपर्क में थी और मौका मिलते ही उन्होंने सभी खिलाड़ियों को अफगानिस्तान से रेस्क्यू करवाकर पुर्तगाल पहुंचा दिया। पुर्तगाल ने इन सभी लड़कियों को आश्रय देने का फैसला किया है। 

रोनाल्डो की तरह महान बनना चाहती है 15 साल की सारा 

लिस्बन पहुंचने के बाद 15 साल की सारा ने बताया कि अब उसे लगता है कि फुटबॉल खिलाड़ी बनने का उसका सपना पूरा होगा और वह अपने चेहते खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो से भी मिल सकेंगी। अब वह आजाद है और लिस्बन के बेलेम टावर में अपनी मां और साथी खिलाड़ियों के साथ घूम रही हैं। उसने बताया कि वह रोनाल्डो की तरह महान खिलाड़ी बनना चाहती हैं और पुर्तगाल में अच्छा बिजनेस भी करना चाहती हैं। 

सारा की मां बोली शायद ही घर लौट पाएं

सारा ने यह भी बताया कि अगर उसे अपने घर में आजादी मिलती है तो वह निश्चित ही वापस लौटना चाहेगी। हालांकि, उसकी मां का कहना है कि इसकी संभावना न के बराबर है। सारा की मां ने साल 1996 से 2001 के बीच तालिबान के शासनकाल में अफगानिस्तान के हालात देखे हैं। उन्होंने बताया कि पहली बार सत्ता में आने पर भी तालिबान के नेताओं ने महिलाओं की इज्जत करने और उनके अधिकारों की रक्षा करने का वादा किया था। हालांकि सत्ता में आने के बाद महिलाओं को काम पर जाने की छूट नहीं थी और लड़कियों का स्कूल जाना भी बैन कर दिया गया था। महिलाओं को अपना चेहरा ढंककर रखना पड़ता था और वो किसी पुरुष के साथ ही घर के बाहर निकल सकती थीं।

फरखुंदा ने बताया लड़कियों को क्यों निकाला बाहर

अफगानिस्तान महिला टीम की कप्तान फरखुंदा ने बताया कि इस मिशन के पीछे उनका उद्देश्य यही था कि ये लड़कियां उस खेल से दूर न हों, जिससे वो प्यार करती हैं। लड़कियों को अफगानिस्तान से पुर्तगाल भेजने के बाद फरखुंदा खुद उनसे मिलने के लिए पहुंची। उनसे मिलने के बाद कई लड़कियां भावुक हो गईं और रोने लगीं। फरखुंदा फिलहाल कनाडा में रहती हैं और वहां की यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट फुटबॉल कोच हैं। उन्होंने बताया कि इस रेस्क्यू ऑपरेशन में कुल 80 लोगों को पुर्तगाल पहुंचाया गया है, जिसमें फुटबॉल खिलाड़ियों के अलावा उनके परिवार के लोग और छोटे बच्चे भी शामिल हैं। 

पुर्तगाल पहुंचकर ली राहत की सांस

फुटबॉल खिलाड़ियों के साथ पुतर्गाल पहुंची एक लड़की ने बताया कि काबुल एयरपोर्ट में हालात बहुत ही खराब हैं। उसने यहां बिताए तीन दिनों को याद किया और बताया कि ये दिन बहुत ही मुश्किल थे। हालांकि पुर्तगाल पहुंचने के बाद उनके अंदर नई उम्मीद जगी है। यहां वो अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर सकती है। उन्होंने कहा कि अभी भविष्य को लेकर चिंता है लेकिन जरूरी यह है कि हम अब सुरक्षित हैं। 
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