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Football Referee: खिलाड़ियों से ज्यादा रेफरी का काम मुश्किल, हर मैच में 12 KM लगाते हैं दौड़, ऐसे बनाएं करियर

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रोहित राज Updated Sun, 27 Nov 2022 05:19 PM IST
सार

रेफरी कैसे बनते हैं? उन्हें इसके लिए क्या करना पड़ता है? भारत में रेफरी बनने के लिए क्या करना होता है? हम इन भी सवालों के जवाब आपको यहां बता रहे हैं...

फुटबॉल रेफरी
फुटबॉल रेफरी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कतर में फुटबॉल विश्व कप का रोमांच चरम पर है। अर्जेंटीना के लियोनल मेसी, पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो, पोलैंड के रॉबर्ट लेवनडॉस्की और फ्रांस के किलियन एम्बापे सहित कई स्टार खिलाड़ियों पर फैंस की नजर हैं। मैच के दौरान दोनों टीमों के 11-11 खिलाड़ियों की परीक्षा तो होती ही हैं, साथ ही एक ऐसा शख्स भी मैदान पर मौजूद होता है जिस पर सबकी नजरें होती हैं। मैच को कंट्रोल करने वाले उस शख्स को रेफरी कहा जाता है। उसका काम मैच को सही से करवाने का होता है। क्रिकेट के अंपायरों की तरह ही उसका फैसला अंतिम होता है।


फुटबॉल मैच में मिडफील्डर को सबसे ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। वह फॉरवर्ड, डिफेंडर या गोलकीपर की तुलना में ज्यादा दौड़ लगाया है। एक मिडफील्डर 90 मिनट के मैच में करीब आठ से 10 किलोमीटर की दौड़ लगाता है। वहीं, एक रेफरी इतने ही मिनट में करीब 10 से 12 किमी तक दौड़ता है। साथ ही उसे खिलाड़ियों पर भी पैनी नजर रखनी होती है। ऐसे में रेफरी को शारीरिक रूप से फिट होने के साथ-साथ मानसिक रूप से मजबूत होना होता है।


अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए जिस तरह खिलाड़ी कई स्तरों से गुजरते हैं उसी तरह रेफरी भी अलग-अलग चरणों को पार कर वहां तक पहुंचते हैं। कई फुटबॉल फैंस यह जानना चाहते हैं कि रेफरी कैसे बनते हैं? उन्हें इसके लिए क्या करना पड़ता है? भारत में रेफरी बनने के लिए क्या करना होता है? हम इन भी सवालों के जवाब आपको यहां बता रहे हैं...

भारत के अनुभवी रेफरी प्रांजल बनर्जी
भारत के अनुभवी रेफरी प्रांजल बनर्जी - फोटो : सोशल मीडिया
योग्यता
  • भारत का नागरिक होना आवश्यक है।
  • आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए और वह मैट्रिक (दसवीं कक्षा) की परीक्षा को पास कर चुका हो।
  • यदि उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का रेफरी बनना है तो 35 साल की आयु तक राष्ट्रीय स्तर की सारी परीक्षाओं को पास करना होगा। भारत में एक रेफरी के लिए रिटायर होने की आयु 45 वर्ष है।

आवेदन कैसे करें?
  • भारत में रेफरी के रूप में अपनी यात्रा शुरू करने की आवेदन प्रक्रिया सरल है। आवेदक को सबसे पहले अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) की वेबसाइट पर पंजीकरण कराना होगा। वेबसाइट में रेफरी एडमिनिस्ट्रेशन सिस्टम ऑफ इंडिया (आरएएसआई) पोर्टल है जो आवेदकों की राह को आसान बनाता है।
  • इसके बाद उसे एआईएफएफ रेफरींग कैलेंडर पर नजर रखनी होगी और अपने स्थानीय जिला फुटबॉल संघ में पंजीकरण और परीक्षा की तारीखों का पता लगाना पड़ेगा। राज्य के रेफरी के प्रमुख द्वारा साल में एक या दो बार परीक्षा ली जाती है।
  • आवेदक को अपने सारे डॉक्यूमेंट को वहां दिखाना पड़ता है। ऐसे में उनके सारे डॉक्यूमेंट सही होने चाहिए।

भारतीय रेफरी
भारतीय रेफरी - फोटो : सोशल मीडिया
कैसे होती है परीक्षा?
  • रेफरी परीक्षा के चार भाग हैं।
  • भाग 1: शारीरिक परीक्षण - एक फुटबॉल मैच की मांगों को देखते हुए एक रेफरी के लिए शारीरिक फिटनेस बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए एक रेफरी को शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट होना चाहिए। इसके लिए उसकी परीक्षा भी होती है। परीक्षण में 6.5 सेकंड में 60 मीटर स्प्रिंट और एक लंबी दौड़ लगानी पड़ती है।
  • भाग 2: लिखित परीक्षा - शारीरिक परीक्षण के बाद आवेदकों को लिखित परीक्षा से गुजरना पड़ता है। उनसे खेल के नियमों के बारे में पूछा जाता है।
  • भाग 3: मौखिक परीक्षा- आवेदकों को एक मौखिक परीक्षा से गुजरना होगा जहां उनसे खेलों के नियमों के बारे में पूछताछ की जाएगी।
  • भाग 4: प्रायोगिक परीक्षा - परीक्षा का अंतिम भाग प्रायोगिक परीक्षा है। यहां आवेदकों को जूनियर श्रेणी के मैचों में रेफरी, सहायक रेफरी और चौथे अधिकारी के रूप में काम करने के लिए कहा जाएगा, जहां उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा।
  • एक बार जब कोई आवेदक सभी चार परीक्षण पास कर लेता है, तो उसे पांचवें श्रेणी के रेफरी के रूप में प्रमाणित किया जाता है।

पांचवें श्रेणी का रेफरी कौन से मैच में उतरता है और पहले श्रेणी का रेफरी बनने के लिए उसे क्या करना पड़ता है?

पांचवें श्रेणी का रेफरी: ये राज्य संघों की निगरानी में आते हैं और केवल राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं के संचालन की जिम्मेदारी इन्हें दी जाती है।  उनका दायरा ज्यादातर जूनियर मैचों के इर्द-गिर्द घूमता है। एक साल में कम से कम 30 मैच में हिस्सा लेने के बाद वह पदोन्नति परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं। ये मैच RASI पोर्टल पर अपडेट होने चाहिए। रेफरी को वार्षिक फिटनेस टेस्ट भी पास करना होता है। पदोन्नति परीक्षा में भी चार मोड होते हैं- फिटनेस, लिखित, मौखिक और प्रैक्टिकल। परीक्षा पास करने पर रेफरी की पदोन्नति चौथे श्रेणी में हो जाती है। 

चौथे श्रेणी का रेफरी: ये भी राज्य संघों की निगरानी में आते हैं और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं के संचालन के लिए जिम्मेदार होते हैं। इस स्तर पर काम करने के एक साल बाद वह पदोन्नति परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसमें श्रेणी चार की तरह ही अलग-अलग परीक्षाएं होती हैं। परीक्षा में पास करने पर वह तीसरे श्रेणी में आ जाते हैं।

तीसरे श्रेणी का रेफरी: ये भी राज्य संघों की प्रत्यक्ष निगरानी में आते हैं और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं के संचालन के लिए जिम्मेदार होते हैं। एक रेफरी को तीसरे श्रेणी के रेफरी या सहायक रेफरी के रूप में 365 दिनों के लिए अपने राज्य में सक्रिय होने की आवश्यकता होती है और उन्हें राज्य में  शीर्ष स्तर पर कम से कम 30 मैचों में अंपायरिंग करनी होती है। इसके बाद ही वह दूसरे श्रेणी के लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्हें फिर से सारी परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। जब वे परीक्षा पास कर लेते हैं तो दूसरे श्रेणी में आ जाते हैं।

दूसरे श्रेणी का रेफरी: इस स्तर के रेफरी सीधे एआईएफएफ की निगरानी में आते हैं। वे सभी राष्ट्रीय स्तर के मैचों में अंपायरिंग करने के योग्य होते हैं।  यहां जो लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हैं उन्हें पहले श्रेणी या सहायक रेफरी के रूप में पदोन्नत किया जाता है। उनका सालाना फिटनेस टेस्ट भी होता है। पहले श्रेणी में पदोन्नति के लिए उनके सामने एकमात्र शर्त फिटनेस टेस्ट पास करना है।

भारतीय रेफरी
भारतीय रेफरी - फोटो : सोशल मीडिया
पहले श्रेणी का रेफरी: इस लेवल के रेफरी के पास आई-लीग और आईएसएल मैचों में अंपायरिंग करने का अवसर होता है। उनका वार्षिक फिटनेस टेस्ट के साथ-साथ रैंडम फिटनेस टेस्ट भी किया जाता है। साथ ही मैचों में उनके प्रदर्शन को भी देखा जाता है। इस स्तर पर उनके प्रदर्शन के आधार पर, उन्हें एआईएफएफ द्वारा फीफा रेफरी और सहायक रेफरी के लिए नामांकित किया जाता है।

फीफा रेफरी
भारत में छह फीफा रेफरी का कोटा है। उन्हें देश के सभी रेफरी के बीच बेस्ट माना जाता है। उन्हें सालाना फीफा द्वारा आयोजित रेफरिंग कोर्स से गुजरना होगा। इसके अलावा वार्षिक/या रैंडम फिटनेस टेस्ट में भाग लेना पड़ता है। एक बार चयन होने के बाद वे फीफा द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में रेफरी की भूमिका निभा सकते हैं। उनके प्रदर्शन के आधार पर एआईएफएफ तय करेगा कि फीफा रेफरी पैनल बदलाव किया जाए या नहीं।
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