प्रेरणा: हॉकी कप्तान मनप्रीत सिंह का बयान, कहा- सेमीफाइनल में हार के बाद प्रधानमंत्री की उत्साहवर्धक बातों ने किया प्रेरित

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ओम. प्रकाश Updated Wed, 11 Aug 2021 09:31 AM IST

सार

भारतीय हॉकी कप्तान मनप्रीत सिंह ने कहा है कि टोक्यो ओलंपिक में सेमीफाइनल में हार के बाद प्रधानमंत्री की उत्साहवर्धक बातों ने प्रेरित किया। पीएम की बातों ने खिलाड़ियों में सकारात्मक ऊर्जा पैदा की जिसके बाद टीम इंडिया 41 साल बाद ओलंपिक में पदक जीतने में सफल रही। 
मनप्रीत सिंह
मनप्रीत सिंह - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह ने कहा कि ओलंपिक के सेमीफाइनल में बेल्जियम से हार के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्साहवर्धक बातों का अद्भुत असर हुआ। इस बातों ने खिलाड़ियों में सकारात्मक ऊर्जा पैदा की और टीम 41 साल बाद इन खेलों में पदक जीतने में सफल रही। उन्होंन कहा,‘सेमीफाइनल हारने के बाद हम सभी बहुत निराश थे। तभी कोच ने आकर कहा कि प्रधानमंत्री आप लोगों से बात करना चाहते हैं। उन्होंने कहा आप सभी ने अच्छा खेला और निराश न हों, बस अपने खेल और अगले मैच पर ध्यान दें, देश को आप सभी पर गर्व है। 
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इससे हमें सकारात्मक ऊर्जा मिली और फिर हमने बैठक की। हमने कहा कि हमें एक और मौका मिला है और अगर हम खाली हाथ लौटते हैं तो हमें जीवन भर यही पछतावा रहेगा। हमने अपने आप से कहा कि हमारे हाथ में 60 मिनट हैं और अगर हम इन 60 मिनटों में अपना सर्वश्रेष्ठ दें तो हम अपने चेहरे पर मुस्कान के साथ देश लौट सकते हैं।’ भारत ने ओलंपिक में आठ स्वर्ण पदक जीते हैं। उसने आखिरी पदक 1980 के मास्को खेलों (स्वर्ण) में जीता था। मनप्रीत ने कहा कि बहुत अच्छा लग रहा है।

यह मेरा तीसरा ओलंपिक था और इस बार मैं टीम का कप्तान था। मेरा पहला ओलंपिक 2012 में काफी निराशाजनक रहा था क्योंकि हमने कोई मैच नहीं जीता था। लेकिन फिर हमने सुधार किया और एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीते। हमने 2016 में अच्छा खेला लेकिन क्वार्टर फाइनल की बाधा को पार नहीं कर सके। इस बार हमारी मानसिकता अलग थी क्योंकि हमने काफी मेहनत की थी। हमने बंगलूरू में एक साथ समय बिताया था। परिसर के अंदर एकांतवास पर थे। हम सभी दूसरों से अलग थे। इसलिए ओलंपिक में जाने से पहले हमारा विचार था कि हमने बहुत त्याग किया है। 

अगर हम अपना सर्वश्रेष्ठ देंगे तो हम निश्चित रूप से पदक जीत सकते हैं। यह एक युवा टीम थी और इसलिए मानसिकता काफी मजबूत थी। अनुभवी खिलाड़ियों के रूप में हमने युवाओं से अपना अनुभव साझा किया। हमारी मानसिकता थी कि हमें किसी भी टीम को कम नहीं आंकना चाहिए क्योंकि यह ओलंपिक है और सभी टीमें उस मंच पर अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करती हैं। हमने हर मैच में अपना सर्वश्रेष्ठ दिया और एक बार में एक मैच पर ध्यान दे रहे थे।
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