लक्ष्य: थोड़े आराम के बाद फिर से तैयारियों में जुटेंगे नीरज, एशियाई और राष्ट्रमंडल खेल एजेंडे में

हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Fri, 13 Aug 2021 10:12 AM IST

सार

  • थोड़े आराम कर एक माह बाद एनआईएस में फिर से तैयारी की योजना बना रहे हैं
  • अब अगले साल कंपटीशन में उतरेंगे नीरज
  • मां के आंसुओं ने नीरज को बुरी तरह कर दिया था भावुक
नीरज चोपड़ा
नीरज चोपड़ा - फोटो : social media
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विस्तार

नीरज चोपड़ा के सम्मान समारोहों का सिलसिला थामे नहीं थम रहा है। बावजूद इसके उनका दिमाग अगले वर्ष होने वाले राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों की तैयारियों को लेकर ताना-बाना बुन रहा है। नीरज अमर उजाला से खुलासा करते हैं कि पहले वह घर जाकर अपनों के बीच आराम के पल गुजारना चाहते हैं। उसके बाद तैयारियों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। वह एक माह के आराम के बाद एनआईएस पटियाला में फिर से तैयारियां शुरू कर देंगे। रही बात कंपटीशन की तो नीरज अगले साल ही अंतरराष्ट्रीय कंपटीशन में भाला फेंकते नजर आएंगे।
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एशियाई, राष्ट्रमंडल खेल एजेंडे में
नीरज का कहना है कि इस साल डायमंड लीग के अलावा कुछ अन्य ऐसे अंतरराष्ट्रीय कंपटीशन हैं जिनमें उन्हें शिरकत करनी थी, लेकिन थकावट होने और तैयारियां नहीं होने की वजह से उन्हें इन कंपटीशनों से किनारा करना पड़ेगा। बिना तैयारियों के अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उतरना ठीक नहीं रहेगा। हां, उन्होंने अगले वर्ष जनवरी में अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक का कैलेंडर जारी होने के बाद मुकाबलों में उतरने की योजना बनाई है। ये अंतरराष्ट्रीय मुकाबले उनकी राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों की तैयारियों का हिस्सा बनेंगे। फिल्हाल उनके एजेंडे में राष्ट्रमंडल और एशियाई खेल सर्वोपरि हैं।

ज्यादा दिन तैयारियों से दूर नहीं रहा जा सकता
नीरज यह भी कहते हैं कि ज्यादा दिनों तक तैयारियों से दूर नहीं रहा जा सकता है। इस लिए उन्होंने अपनी थकावट उतारने और सम्मान समारोहों से निपटने के लिए एक माह का समय दिया है। वैसे तो वह सर्दियों में दक्षिण अफ्रीका में तैयारियों के इच्छुक हैं, लेकिन हो सकता है कोरोना के चलते वह वहां नहीं जाएं और एनआईएस पटियाला में ही एक माह बाद तैयारियां शुरू करने की कोशिश करेंगे।

स्वर्ण के साथ मां से मिलना था अनमोल पल
ओलंपिक स्वर्ण जीतने के बाद नीरज को देश और दुनिया से बधाईयां मिलने का तांता लगा है, लेकिन नीरज के लिए सबसे अनमोल पल मां से मिलना था। नीरज खुलासा करते हैं कि मां और पिता के आंसू देख वह भावुक हो गए। मां के आंसू देख उन्हें लगा कि उनका त्याग कितना बड़ा है, जिन्होंने छोटी उम्र में दिल पर पत्थर रख उन्हें कुछ बनने के लिए अपने से दूर भेज दिया। यही वजह थी कि उन्होंने स्वर्ण पदक को उनके गले में डाल दिया। जितना इस पदक पर उनका हक है उतना ही उनके माता-पिता का भी है। नीरज के मुताबिक परिवार के सदस्यों और दोस्तों से बात कर उन्हें ऐसा लगा कि मानों उनके पदक की उनसे भी ज्यादा खुशी उन्हें है। यह वाकई सच्ची खुशी है। नीरज कहते हैं कि वह जल्द से जल्द घर जाना चाहते हैं।

खेल सिखाता है आपस में मिलकर रहना
पाकिस्तान के अरशद नदीम के साथ नीरज कई कंपटीशन में उतर चुके हैं। एशियाई खेलों में कांस्य जीतने वाले नदीम ओलंपिक में पांचवें स्थान पर रहे। नीरज खुलासा करते हैं कि नदीम के साथ उनका अच्छा संबंध है। खेल यही सिखाता है कि आपस में मिल-जुलकर रहो। बात होती है। दोनों एक दूसरे के बारे में पूछते हैं। जिस तरह वह भाला फेंक का स्तर बढ़ाने का काम अपने देश के लिए कर रहे हैं वही नदीम अपने देश के लिए कर रहा है।
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