तंगहाली की वजह से BMW बेचना चाहतीं हैं धावक दुती चंद, अभ्यास के लिए नहीं बचा पैसा

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अंशुल तलमले Updated Sat, 11 Jul 2020 06:25 PM IST
अपनी BMW कार के साथ दुती चंद
अपनी BMW कार के साथ दुती चंद - फोटो : सोशल मीडिया
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शीर्ष भारतीय महिला धावक दुती चंद ने अपने फेसबुक पेज पर कार के साथ तस्वीर शेयर करते हुए ओडिय में लिखा, 'मैं अपनी बीएमडब्ल्यू कार बेचना चाहती हूं। अगर कोई खरीदना चाहता है, तो मुझसे मैसेंजर पर संपर्क करे।' हालांकि बाद में उन्होंने इस पोस्ट को हटा लिया, लेकिन सवाल उठते हैं कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी आ गई, जो राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित देश की सबसे तेज एथलीट को यह कदम उठाना पड़ा।

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प्रतिमाह पांच लाख का खर्च
मीडिया से अपनी परेशानी साझा करते हुए दुती कहतीं हैं, 'अभी तक ट्रेनिंग काफी अच्छी रही है, इससे पहले, प्रशिक्षण के लिए धन से संबंधित कोई समस्या नहीं थी क्योंकि टोक्यो ओलंपिक सामने आ रहे थे और हमारी राज्य सरकार से 50 लाख रुपये भी मिले थे, लेकिन कोरोना वायरस के कारण ओलंपिक टाल दिए गए। प्रायोजकों से जो पैसे मिले थे, वह समाप्त हो गए। अब अपनी डाइट, ट्रेनिंग और अन्य जरूरी चीजों के लिए पैसों की आवश्कता है। कोच, फिजियोथेरेपिस्ट, आहार विशेषज्ञ और अन्य की सैलरी मिलाकर प्रतिमाह पांच लाख का खर्च अब वहन कर पाना दुती के लिए मुश्किल हो रहा है।


30 लाख में खरीदी थी बीएमडब्ल्यू
24 साल की दुती ने 2015 बीएमडब्ल्यू 3-सीरीज मॉडल की कार खरीदी थी। एशियाई खेलों में उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए ओडिशा की नवीन पटनायक सरकार ने उन्हें तीन करोड़ रुपये नकद दिेए थे। बेहद गरीब परिवार से आने वाली इस खिलाड़ी ने पहले अपना घर बनाया फिर कार खरीदी थी। दुती ने यह भी कहा कि उनके पास दो अन्य कार भी है, जिन्हें रखने की पर्याप्त जगह भी नहीं है, इसलिए वह एक कार को बेचना चाहती हैं।

पहले ही जताई थी आशंका
ओडिशा माइनिंग कॉरपोरेशन में कार्यरत इस एथलीट ने अप्रैल में ही कहा था कि कोरोना महामारी के कारण देश प्रदेश ही नहीं, दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। अब मूलभूत सुविधाओं पर पूरा फोकस है और ऐसे में आगे प्रायोजन मिलेगा या नहीं, कुछ कह नहीं सकते। उन्होंने बताया था कि मैंने जर्मनी में तीन महीने अभ्यास के लिए हवाई टिकट बुक करा ली थी जिसका पैसा वापिस नहीं मिला, इसके अलावा अभ्यास रूकने से उनकी लय भी टूट गई है और अब उन्हें रफ्तार पकड़ने में छह महीने लगेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा अभ्यास शेड्यूल ऐसा था कि अक्तूबर से धीरे धीरे रफ्तार पकड़ते हैं और मार्च से कड़ा अभ्यास शुरू होता है, जबकि अप्रैल में पूरी रफ्तार पकड़ लेते हैं। मैने मार्च से जून तक जर्मनी में अभ्यास के बाद सीधे टोक्यो जाने की सोची थी, लेकिन सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया।

 

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