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टोक्यो ओलंपिक: लवलीना 'किक बॉक्सर' से कैसे बनीं मुक्केबाज, पढ़िए बोरगोहेन की संघर्ष भरी कहानी

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: मुकेश कुमार झा Updated Fri, 30 Jul 2021 05:21 PM IST

सार

हमेशा मुस्कुराती रहने वाली लवलीना टोक्यो का टिकट कटाकर असम की पहली महिला ओलंपियन बनीं। उन्होंने इसे पदक में बदल कर और भी यादगार बना दिया। 
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लवलीना बोरगोहेन
लवलीना बोरगोहेन - फोटो : PTI
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विस्तार

भारतीय महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन (69 किग्रा) ने चीनी ताइपे की पूर्व विश्व चैंपियन निएन चिन चेन को 4-1 से हराकर ओलंपिक में अपना पदक पक्का किया। असम के गोलाघाट जिले की रहने वाली लवलीना ओलंपिक में भाग लेने वाली असम की पहली महिला खिलाड़ी हैं। लवलीना मुक्केबाजी में आने से पहले किक बॉक्सिंग करती थीं, जिसमें वो राष्ट्रीय स्तर पर पदक भी जीत चुकी हैं। दरअसल, लवलीना ने अपनी बड़ी बहनों लीचा और लीमा को देखकर किक बॉक्सिंग करना शुरू किया था। बचपन में लवलीना को काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा। ओलंपिक में देश के लिए दूसरा पदक पक्का करने वाली मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन को मुक्केबाजी में लाने का श्रेय बोरो को जाता है। बोरो को लवलीना पर विश्वास था। इसलिए बोरो ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में एक दिन पहले ही कह दिया था, 'वह आराम से जीतेगी, कोई चिंता की बात नहीं है।'
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यहां से शुरू हुआ था सफर

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