टोक्यो ओलंपिक: नीरज ने स्वर्ण पदक मिल्खा सिंह को समर्पित किया, कहा- वे स्वर्ग से आज मुझे देख रहे होंगे

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: मुकेश कुमार झा Updated Sat, 07 Aug 2021 10:06 PM IST

सार

कामयाबी की नई इबारत लिखने वाले नीरज ने अपने गोल्ड मेडल को भारत के महान धावक दिवंगत मिल्खा सिंह को समर्पित किया।
नीरज चोपड़ा ने मिल्खा सिंह का सपना किया पूरा
नीरज चोपड़ा ने मिल्खा सिंह का सपना किया पूरा - फोटो : social media
विज्ञापन
ख़बर सुनें

विस्तार

भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा शनिवार को टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। एथलेटिक्स में भारत का यह पहला मेडल है। इस गोल्ड के साथ नीरज ने 'फ्लाइंग सिख' का सपना साकार किया। कामयाबी की नई इबारत लिखने वाले नीरज ने अपने गोल्ड मेडल को भारत के महान धावक दिवंगत मिल्खा सिंह को समर्पित किया। गोल्ड जीतने के बाद नीरज ने कहा, 'मैं अपने गोल्ड मेडल को महान धावक मिल्खा सिंह को समर्पित करता हूं। वे शायद मुझे स्वर्ग से देख रहे होंगे। मैं पदक के साथ मिल्खा सिंह से मिलना चाहता था। विश्वास नहीं हो रहा। पहली बार है जब भारत ने एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीता है इसलिए मैं बहुत खुश हूं। हमारे पास अन्य खेलों में ओलंपिक का एक ही गोल्ड है।'
विज्ञापन


मिल्खा सिंह के बेटे जीव मिल्खा ने नीरज का शुक्रिया अदा किया
मिल्खा सिंह के बेटे जीव मिल्खा सिंह ने ट्वीट कर नीरज का शुक्रिया अदा किया। उन्होंनो कहा, आपने (नीरज) न केवल हमें ओलंपिक खेलों में पहली बार एथलेटिक्स का स्वर्ण पदक दिलाया बल्कि आपने इसे मेरे पिता को भी समर्पित किया। मिल्खा परिवार इस सम्मान के लिए सदा आभारी रहेगा।'

 

मिल्खा सिंह की रफ्तार की दुनिया थी दीवानी
एशियाई खेलों में चार स्वर्ण पदक और कॉमनवेल्थ गेम्स में एक गोल्ड मेडल जीतने वाले मिल्खा सिंह की रफ्तार की दीवानी दुनिया थी। फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर इस धावक को दुनिया के हर कोने से प्यार और समर्थन मिला। मिल्खा का जन्म अविभाजित भारत (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था, लेकिन वह आजादी के बाद हिंदुस्तान आ गए थे। मिल्खा की प्रतिभा और रफ्तार का यह जलवा था कि उन्हें पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान ने उन्हें 'फ्लाइंग सिख' की उपाधि से नवाजा था। इसके बाद से मिल्खा सिंह को पूरी दुनिया में 'फ्लाइंग सिख' के नाम से जाना जाने लगा।

एथलेटिक्स में कोई भी भारतीय गोल्ड जीते, यह थी ख्वाहिश
बता दें कि 'फ्लाइंग सिख' मिल्खा सिंह की ख्वाहिश थी कि ओलंपिक में एथलेटिक्स में कोई भी भारतीय गोल्ड जीते। मालूम हो कि मिल्खा सिंह ने मेलबर्न ओलंपिक (1956), रोम ओलंपिक (1960) और टोक्यो ओलंपिक (1964) में हिस्सा लिया था, लेकिन वे पदक नहीं जीत सके थे। उन्होंने रोम ओलंपिक में 400 मीटर रेस में हिस्सा लिया था, लेकिन पदक जीतने से सेकंड के दसवें हिस्से से चूक गए थे और चौथे स्थान पर रहे थे।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Sports news in Hindi related to live update of Sports News, live scores and more cricket news etc. Stay updated with us for all breaking news from Sports and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads

Follow Us

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00