सख्ती: एप के बाद अब चाइनीज मोबाइल के खिलाफ सरकार ले सकती है बड़ा फैसला, लागू हो सकता है नया नियम

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रदीप पाण्डेय Updated Tue, 19 Oct 2021 03:27 PM IST

सार

फोन में पहले से इंस्टॉल आने वाले एप्स के लिए सरकार सोर्स कोड की मांग कर सकती है। नए नियम के आने के बाद मोबाइल निर्माता कंपनियों से उन कंपनियों की भी लिस्ट मांगी जा सकती है जिनके पार्ट्स मोबाइल में इस्तेमाल हो रहे हैं।
OnePlus Nord 2
OnePlus Nord 2 - फोटो : unsplash
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विस्तार

साल 2020 में भारत सरकार ने पबजी और टिकटॉक समेत करीब 250 से अधिक चाइनीज एप्स पर बैन लगाए थे और एक साल बाद अब चाइनीज स्मार्टफोन सरकार के निशाने पर हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार जल्द ही भारत में लॉन्च होने वाले सभी चाइनीज स्मार्टफोन की जांच कर सकती है। इस जांच के दौरान पता लगाया जाएगा कि फोन में पहले से इंस्टॉल आ रहे एप्स कही यूजर्स की जासूसी तो नहीं कर रहे। इसके अलावा फोन के पार्ट्स की भी जांच की जा सकती है। इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस जांच के लिए सरकार एक नया नियम बना सकती है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...
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पूरी इंडस्ट्री पर लागू होगा नियम

रिपोर्ट के मुताबिक नए नियम के आने के बाद जांच के दायरे में पूरी भारतीय मोबाइल इंडस्ट्री आएगी, हालांकि चाइनीज कंपनियों की जांच सख्ती से की जाएगी। फोन में पहले से इंस्टॉल आने वाले एप्स के लिए सरकार सोर्स कोड की मांग कर सकती है। नए नियम के आने के बाद मोबाइल निर्माता कंपनियों से उन कंपनियों की भी लिस्ट मांगी जा सकती है जिनके पार्ट्स मोबाइल में इस्तेमाल हो रहे हैं। कुल मिलाकर कहें तो सरकार भारत में लॉन्च होने वाले सभी स्मार्टफोन के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की जांच करना चाहती है।

वीवो, ओप्पो, शाओमी लिस्ट में टॉप पर

भारतीय स्मार्टफोन बाजार में Vivo, Oppo, Xiaomi और OnePlus की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी है। ऐसे में नए नियम के लागू होने के बाद इन कंपनियों की जांच सख्ती से की जाएगी। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि भारत में बिकने वाले स्मार्टफोन भारतीय यूजर्स के लिए सुरक्षित हैं या नहीं। इस रिपोर्ट पर सरकार या चाइनीज मोबाइल कंपनियों की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं आया है।
 

पहले से इंस्टॉल एप से जासूसी का खतरा

हाल ही में डबलिन के ट्रिनिटी कॉलेज में की गई रिसर्च में कहा गया था कि तमाम कंपनियों के फोन में पहले से इंस्टॉल्ड एप चुपके से यूजर्स का डाटा अपने सर्वर पर स्टोर कर रहे हैं। ये एप्स स्क्रीन, वेब एक्टिविटी, फोन कॉल, डिवाइस आईडेंटिफायर जैसी जानकारी को स्टोर करते हैं। इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए सैमसंग, शाओमी, हुवावे और रियलमी, लिनेजOS और e/OS के भेजे गए डाटा का इस्तेमाल किया गया है। जिन एप्स पर जासूसी का आरोप है उनमें गूगल, फेसबुक और माइक्रोसॉफ्ट एप्स के नाम शामिल हैं। इस रिपोर्ट को 'एंड्रॉयड मोबाइल OS स्नूपिंग बाय सैमसंग, शाओमी, हुवावे और रियलमी हेड सेट' के नाम से प्रकाशित किया गया है।
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