दुनिया की पहली ऐसी तकनीक जो हवा से तैयार करेगी बिजली

Updated Thu, 01 Oct 2015 06:28 PM IST
Electricity from the air - Drayson's big idea
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हवा से मुफ़्त में बिजली बनाना, एक फंतासी जैसा लगता है लेकिन व्यवसायी और पूर्व वैज्ञानिक लॉर्ड ड्रेसन ने लंदन के रॉयल इंस्टीट्यूशन में एक ऐसी ही तकनीक का प्रदर्शन किया।
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उनका दावा है कि फ़्रीवोल्ट नामक यह टक्नोलॉजी हवा में मौजूद तरंगों की ऊर्जा को इस्तेमाल कर बहुत कम उर्जा से चलने वाले उपकरणों जैसे सेंसरों को बिजली मुहैया कराई जा सकती है।


असल में इस टेक्नोलॉजी में हवा में 4जी और डिज़िटल टेलीविज़न की रेडियो तरंगों की ऊर्जा का इस्तेमाल होता है।

लॉर्ड ड्रेसन कहते हैं कि यह दुनिया की पहली ऐसी तकनीक है, “इसके लिए किसी अतिरिक्त बुनियादी ढांचे की ज़रूरत नहीं है, ना ही इसके लिए अतिरिक्त ऊर्जा प्रसारित करने की ज़रूरत होती है, यह ऐसी ऊर्जा को रिसाइकिल करता है जो इस्तेमाल से बची रह जाती है।”

रॉयल इंस्टीट्यूट में इस तकनीक का प्रदर्शन किया गया। यह वही संस्थान है जहां माइकल फ़्राइडे ने 19वीं शताब्दी में विद्युतचुंबकत्व पर काम किया था।

फ़्रीवोल्ट ड्रेसन

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लॉर्ड ड्रेसन ने पहले ये दिखाया कि कमरे में कितनी रेडियो फ़्रीक्वेंसी है और इसके बाद उन्होंने एक लाउडस्पीकर को चलाने के लिए फ़्रीवोल्ट का इस्तेमाल किया।

उन्होंने एक पर्सनल पॉल्यूशन मॉनिटर क्लीनस्पेस टैग के ज़रूरत भर की बिजली पैदा करने का प्रदर्शन किया।

यह पॉल्यूशन मॉनिटर ड्रेसन टेक्नोलॉजीज़ द्वारा एक अभियान के तहत बनाया गया है ताकि शहरों में वायु गुणवत्ता को सुधारा जा सके और लोगों को प्रदूषण के स्तर की जानकारी दी जा सके।

इस उपकरण में एक बैटरी होती है जो फ़्रीवोल्ट के माध्यम से रिचार्ज होती रहती है।

इस तकनीक का पेटेंट कराया गया है और इसे अब सुपरमार्केट जैसी जगहों पर इस्तेमाल किया जा सकता है जहां अगले चरण की इंटरनेट सुविधाओं की तैयारी चल रही है।

लेकिन डिसरप्टिव एनॉलीसिस के संस्थापक और तकनीकी विशेषज्ञ डीन बब्ले फ़्रीवोल्ट को लेकर बहुत उत्साहित नहीं हैं।

उनके मुताबिक वायु प्रदूषण सेंसर का विचार तो दिलचस्प है लेकिन इसके लिए फ़्रीवोल्ट की क्या ज़रूरत। यही काम एक बैटरी और बहुत कम ऊर्जा वाले ट्रांसमीटर से हो सकता है।

वो कहते हैं कि अभी इस सवाल का जवाब दिया जाना बाकी है कि इसका मोबाइल नेटवर्क पर क्या असर पड़ेगा, क्योंकि ये मोबाइल का ही स्पेक्ट्रम है जिसे फ़्रीवोल्ट इस्तेमाल कर रहा है।

मोबाइल नेटवर्क

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उनके अनुसार, ये जो ‘फ़्री एनर्जी’ है वो शायद संचार के लिए ज़रूरी हो।

लॉर्ड ड्रेसन को मैंने बताया कि इसके लिए मोबाइल नेटवर्क फ़ीस मांग सकते हैं। हालांकि उन्हें भरोसा है कि इसका कोई क़ानूनी आधार नहीं है। वो इस तकनीक को बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं।

वो कहते हैं, “उद्योग जगत इसकी सराहना करेगा क्योंकि इसके लिए अलग से ढांचा बनाने की ज़रूरत नहीं है।”

हालांकि इस तरह की कोशिशें पहले भी हो चुकी हैं लेकिन व्यावसायिक रूप से टिकाउ तकनीक विकसित करने में सफलता नहीं मिली।

लेकिन इस ब्रितानी कंपनी का मानना है कि उसने एक समाधान खोज निकाला है। अगर ये सही है तो फ़्रीवोल्ट बहुत लुभावना व्यवसाय साबित होगा।
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