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म्यांमार में इंटरनेट सेवाएं रोकने पर लोगों को ऑफलाइन एप ब्रिजफाई का सहारा

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 03 Feb 2021 03:26 PM IST

सार

दो दिनों में 6 लाख से ज्यादा डाउनलोड, नए एप से अभियान चलाने की तैयारी...
 
Protest in Myanmar
Protest in Myanmar - फोटो : Agency
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विस्तार

म्यांमार में सैनिक शासन लौटने के बाद अब खबर है कि वहां सिविल सोसायटी के संगठन लोकतंत्र बहाली की मुहिम छेड़ने की तैयारी में हैं। हालांकि रविवार रात को हुए सैनिक तख्ता पलट के बाद से देश में किसी बड़े विरोध प्रदर्शन की खबर नहीं मिली है, लेकिन कई मीडिया रिपोर्टों में वहां के नागरिक समाज में मौजूद बेचैनी की चर्चा की गई है। एक खबर के मुताबिक देश के नौजवान अब ऑफलाइन मेसेजिंग एप ब्रिजफाई के जरिए अभियान चलाने की तैयारी कर रहे हैं। हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक पिछले दो दिन में छह लाख से ज्यादा लोगों ने इस एप को डाउनलोड किया है। हांगकांग के चीन विरोधी गुटों अपने आंदोलन के दौरान इस एप का खूब इस्तेमाल किया था।

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सोमवार को सैनिक शासकों ने देश में इंटरनेट सेवा रोक दी थी। बाद में इसे बहाल कर दिया गया। लेकिन इस बीच बड़ी संख्या में ब्रिजफाई एप को डाउनलोड किया गया। इस एप को मेक्सिको की एक कंपनी ने तैयार किया है। उस कंपनी ने मंगलवार को एक ट्वीट में कहा कि ‘हमें उम्मीद है कि इस कठिन वक्त में ये एप म्यांमार के लोगों के काम आएगा।’ सैनिक तख्ता पलट के बाद यंगून और राजधानी नेयपीदॉव के आसपास के इलाकों में इंटरनेट के साथ फोन सेवाएं भी कुछ देर के लिए रोक दी गई थीं। तभी सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लोगों को ब्रिजफाई एप डाउनलोड करने के लिए कहना शुरू कर दिया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि भविष्य में सैनिक शासक इंटरनेट बाधित करने के कदम लगातार उठा सकते हैं। इसलिए आपस में संवाद बनाए रखने के लिए पहले से तैयारी जरूरी है।


ब्रिजफाई एप तैयार करने वाली कंपनी के मददगारों में बिज स्टोन भी शामिल हैं। स्टोन ट्विटर के सह-संस्थापक थे। इस एप का इस्तेमाल थाईलैंड में राजशाही विरोधी प्रदर्शनकारियों ने भी किया है। ये एप ब्लूटूथ के जरिए काम करता है। यह संदेश के आदान-प्रदान के लिए मेश नेटवर्क्स का इस्तेमाल करता है। यानी यह इंटरनेट सेवा ना होने पर भी दो फोन के बीच संदेश का आदान-प्रदान करने में सक्षम है। इस एप को सबसे ज्यादा लोकप्रियता उन देशों में मिली है, जहां के शासक इंटरनेट सेवा प्रदाताओं पर प्रतिबंध लगाते रहे हैं। हालांकि जानकारों का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियां इस एप के जरिए होने वाले संदेशों के आदान-प्रदान की निगरानी भी कर सकती हैं। ब्रिजफाई की तरह का ही एक एप फायरचैट है, जिसका ईरान और इराक में सत्ता विरोधी संगठनों ने खूब इस्तेमाल किया है।

ब्रिटिश अखबार द गार्जियन के मुताबिक मंगलवार को म्यांमार के बहुत से लोगों ने सोशल मीडिया पर आंग सान सू ची के लिए समर्थन जताया। कुछ लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैरियर तोड़ने की तस्वीरें डालीं। म्यांमार में इसे सैनिक शासन के विरोध का प्रतीक माना जाता है। एक दशक पहले सैनिक शासन के दौरान भी ऐसी तस्वीरों के जरिए विरोध जताया जाता था। खबर है कि म्यांमार के कुछ शहरों में मंगलवार शाम को लोगों ने अपनी बालकनी में मोमबत्ती जला कर आंग सान सू ची के लिए अपना समर्थन जताया।

द गार्जियन की एक खबर के मुताबिक दर्जनों अस्पतालों में डॉक्टरों और दूसरे स्वास्थ्य कर्मियों ने सैनिक शासन के तहत काम करने से इंकार कर दिया है। उधर संसद के लिए निर्वाचित करीब 400 सदस्यों को अपने सरकारी आवासों में ही रहने को कहा गया है। समाचार एजेंसी एपी ने उनमें से एक निर्वाचित सांसद से बातचीत की। उन्होंने बताया कि वे अपने आवासीय परिसर में एक-दूसरे से बातचीत कर सकते हैं और फोन पर देश के दूसरे हिस्सों के लोगों से भी संपर्क में हैं। लेकिन उन्हें परिसर के बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है।

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