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श्री पारस अस्पताल प्रकरण: प्रशासन की भूमिका से जनप्रतिनिधि असंतुष्ट, सीबीआई जांच की मांग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Mon, 21 Jun 2021 09:34 AM IST
सार

एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल ने मामले का खुलासा एसआईटी से कराने की मांग की है। उधर, पूर्व विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह ने कहा कि जिस मामले में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होना चाहिए था उसमें क्लीनचिट देने से शासन व प्रशासन की मंशा जाहिर हो गई है।

श्री पारस अस्पताल आगरा
श्री पारस अस्पताल आगरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

श्री पारस अस्पताल प्रकरण में स्थानीय प्रशासन की भूमिका से जनप्रतिनिधि असंतुष्ट हैं। भाजपा विधायक योगेंद्र उपाध्याय ने जांच रिपोर्ट को संदिग्ध बताते हुए रविवार को गंभीर सवाल उठाए हैं। एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल ने मामले का खुलासा एसआईटी से कराने की मांग की है। उधर, पूर्व विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह ने कहा कि जिस मामले में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होना चाहिए था उसमें क्लीनचिट देने से शासन व प्रशासन की मंशा जाहिर हो गई है।



श्री पारस अस्पताल पर मॉकड्रिल के नाम पर ऑक्सीजन बंद कर 22 मरीजों की मौत का आरोप है। उस दिन अस्पताल में 96 मरीज भर्ती थे। जांच में प्रशासन ने 16 मौतें स्वीकारी हैं, परंतु इन मौतों की वजह ऑक्सीजन की कमी नहीं मानी, जबकि उस समय ऑक्सीजन का विकराल संकट था। 26 अप्रैल को मॉकड्रिल और 22 मरीजों की छंटनी मामले में अस्पताल को क्लीनचिट मिलने से एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। 


प्रशासन पर जांच में पक्षपात के आरोप लग रहे हैं। सरकार की छवि पर भी असर पड़ रहा है। एक तरफ विपक्ष इस मामले को सत्ता के दबाव में दी गई क्लीनचिट बता रहा है। दूसरी तरफ भाजपा विधायक भी जांच को संदिग्ध बता रहे हैं। ऐसे में आगे मामला ठंडा होने की बजाय गर्म हो सकता है। मुख्यमंत्री के आदेश पर की गई जांच पर सवाल उठने से शासन भी चिंतित है। 

भाजपा विधायक योगेंद्र उपाध्याय
भाजपा विधायक योगेंद्र उपाध्याय - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन अपने कर्मों पर डाल रहा पर्दा
स्थानीय प्रशासन की जांच संदिग्ध प्रतीत हो रही है। कोई राजनीतिक दबाव नहीं था। प्रशासन अपने कर्मों पर पर्दा डाल रहा है। इस मामले में सरकार से बात करेंगे। प्रभावी कार्रवाई का अनुरोध करेंगे। इस जांच से सरकार की छवि नहीं, स्थानीय प्रशासन की छवि धूमिल हुई है।- योगेंद्र उपाध्याय, विधायक व मुख्य सचेतक, विधान मंडल

मरीजों के परिजनों को न्याय मिले
 मैं इस जांच से असंतुष्ट हूं। वीडियो में कहा जा रहा है कि ऑक्सीजन नहीं है। प्रशासन कह रहा है ऑक्सीजन की कमी नहीं थी। इसमें गंभीर अनियिमितता हैं। सरकार इस मामले का खुलासा एसआईटी जांच से कराए। जिन मरीजों का देहांत हुआ उनके परिजनों को न्याय मिल सके। - डॉ. आकाश अग्रवाल, सदस्य विधान परिषद

पुरुषोत्तम खंडेलवाल
पुरुषोत्तम खंडेलवाल - फोटो : अमर उजाला
सीबीआई से कराई जाए जांच
22 मरीजों की मौत हुई या नहीं इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए। सत्ता के दबाव में जांच की गई है। चिकित्सक के राजनीतिक संबंध हैं। पीड़ितों के बयानों के आधार पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होना चाहिए। रिपोर्ट में पीड़ितों के बयानों को अहमियत क्यों नहीं दी गई। - डॉ. धर्मपाल सिंह, पूर्व विधायक, बसपा

किसी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा
अभी मामले की जांच चल रही है। जांच का अंतिम परिणाम आ जाए तभी हमारा बोलना उचित होगा। प्रशासनिक और पुलिस दोनों जांचें अभी चल रही हैं। मामला बहुत बड़ा है। जांच बिल्कुल निष्पक्ष होगी। हमारी संपूर्ण विषय पर निगाह है। किसी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा। - पुरुषोत्तम खंडेलवाल, विधायक, भाजपा

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