श्री पारस अस्पताल प्रकरण: दूसरे जनपदों के मरीजों का नहीं देखा रिकॉर्ड, पांच जिलों के लोग थे भर्ती

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Tue, 20 Jul 2021 10:28 AM IST

सार

 श्री पारस अस्पताल संचालक डॉ. अरिन्जय जैन मैनपुरी का मूल निवासी है। फिरोजाबाद, इटावा, मैनपुरी, कासगंज, एटा के अलावा फरुखाबाद, औरया, कन्नौज व अलीगढ़ से सबसे ज्यादा मरीज रेफर होते हैं।
श्री पारस अस्पताल आगरा
श्री पारस अस्पताल आगरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

श्री पारस अस्पताल प्रकरण में प्रशासन ने दूसरे जिलों के भर्ती मरीजों का रिकार्ड ही नहीं खंगाला। 26 अप्रैल को 96 मरीज भर्ती थे। जिनमें 50 से अधिक दूसरे जिलों के मरीज थे। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें उन जिलों में बैठे श्रीपारस के एजेंट ने रेफर किया था। जिन 16 मृतकों की जांच की गई है, उनमें 11 आगरा और पांच दूसरे जिलों के शामिल हैं। 
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 श्री पारस अस्पताल संचालक डॉ. अरिन्जय जैन मैनपुरी का मूल निवासी है। फिरोजाबाद, इटावा, मैनपुरी, कासगंज, एटा के अलावा फरुखाबाद, औरया, कन्नौज व अलीगढ़ से सबसे ज्यादा मरीज रेफर होते हैं। 25 अप्रैल को जब ऑक्सीजन संकट था, उस दिन भी गैर जिलों से यहां मरीज भर्ती हुए। जिनकी संख्या 50 से अधिक मानी जा रही है। पीड़ितों का आरोप है कि प्रशासन ने श्री पारस में भर्ती सिर्फ आगरा के मरीजों की जांच की, बाकी गैर जिलों के मरीजों को जांच में शामिल नहीं किया। जबकि जांच रिपोर्ट में प्रशासन ने माना है कि श्री पारस में गैर जिलों के मरीज भर्ती थे। अब ऐसे में सवाल खड़े हो गया है कि गैर जिलों के मरीजों की सूची क्यों नहीं जारी की गई। उन्हें जांच में शामिल क्यों नहीं किया। कितने मरीज डिस्चार्ज किए। डिस्चार्ज होने के बाद मरीजों का क्या हुआ। पीड़ित प्रशासन पर मौतों की वास्तविक स्थित छिपाने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि ऑक्सीजन किल्लत से जूझने वाले लोग मौतों की वजह ऑक्सीजन की कमी बता रहे हैं। न्यायिक जांच की मांग जोर पकड़ रही है।

पिछले साल भी भर्ती थे 96 मरीज
- महामारी फैलाने के आरोप में पिछले साल सात अप्रैल 2020 को जब प्रशासन ने श्री पारस अस्पताल सील किया था उन दिनों भी 11 जिलों के 96 मरीज भर्ती थे। जिन्हें कार्रवाई के डर से अस्पताल संचालक ने डिस्चार्ज कर दिया। उनके संपर्क में आए लोग संक्रमित हो गए। जिसके बाद संक्रमण फैलाने और मरीजों का ब्योरा छिपाने के आरोप में डॉ. अरिन्जय जैन व प्रबंधन के विरुद्ध महामारी एक्ट में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस साल फिर वही हुआ। बड़ी संख्या में गैर जिलों के मरीजों को भर्ती कर लिया।

इटावा, मैनपुरी से आते हैं ज्यादा मरीज
- इटावा निवासी राजू सिंह ने बताया कि मैंने अपने बहनोई को बुखार आने पर पहले इटावा में स्थानीय चिकित्सक को दिखाया था। उसी ने हमें श्री पारस में रेफर किया। राजू के बहनोई रिंकू  की 27 अप्रैल को श्री पारस अस्पताल में मौत हो गई। मैनपुरी निवासी दुरबीन सिंह के 26 वर्षीय पुत्र सनोज कुमार ने भी मॉकड्रिल कांड के बाद दम तोड़ा। पीड़ित पिता का आरोप हैं कि उन्हें मैनपुरी से यहां रेफर किया था। बताया कि श्रीपारस में सबसे ज्यादा मरीज इटावा और मैनपुरी से ही आते हैं। 

एंबुलेंस गिरोह से जुड़े हैं तार
- सामाजिक कार्यकर्ता नरेश पारस का कहना है कि श्री पारस अस्पताल के तार गैर जिलों में झोलाछाप व एंबुलेंस गिरोह से जुड़े हैं। जो गरीब व भोले-भाले लोगों को यहां भर्ती कराते हैं। बदले में उन्हें अस्पताल द्वारा कमीशन दिया जाता है। इस काम के लिए संचालक ने पीआरओ रखा है। उन्होंने एसएसपी को पत्र लिख श्रीपारस में मरीजों को रेफर करने वाले कथित चिकित्सकों व एंबुलेंसों की जांच कराने की मांग की है।
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