अपराजिता: रक्तदान कर जीवन में बिखेर रहीं खुशियों के रंग, ताजनगरी की महिलाएं लोगों को कर रहीं जागरूक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 24 Jun 2021 12:11 PM IST

सार

तमाम लोगों के लिए अपराजिता बन चुकीं इन महिलाओं का कहना है कि उन्हें उस समय बहुत खुशी होती है, जब उनका रक्त किसी जरूरतमंद के जीवन में संजीवनी का काम करता है।
अपराजिता: रक्तदान करने वाली महिलाएं
अपराजिता: रक्तदान करने वाली महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

रक्तदान, महादान जैसे नारों को सार्थक करने में अब ताजनगरी की महिलाएं भी पीछे नहीं है। वह बढ़-चढ़कर रक्तदान कर रही हैं। इतना ही नहीं वे रक्तदान करने के साथ-साथ लोगों को जागरूक भी कर रही हैं। तमाम लोगों के लिए अपराजिता बन चुकीं इन महिलाओं का कहना है कि उन्हें उस समय बहुत खुशी होती है, जब उनका रक्त किसी जरूरतमंद के जीवन में संजीवनी का काम करता है। काफी महिलाओं ने साल में एक बार रक्तदान करने का संकल्प ले रखा है। यही कारण है कि कोई महिला पिछले पंद्रह सालों से तो कोई पांच साल से रक्तदान कर जीवन में खुशियों के रंग बिखेर रही हैं।  
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साल में एक बार रक्तदान जरूर करती हूं: फातिमा
राहुल नगर, बोदला निवासी फातिमा खान के लिए वो दिन काफी राहत देने वाला था, जब उनके पड़ोस में रहने वाली बुजुर्ग महिला को खून की जरूरत पड़ी। ब्लड ग्रुप न मिलने के कारण फातिमा उस समय महिला के लिए अपराजिता बनकर सामने आईं। फातिमा बताती हैं कि मेरा ब्लड ग्रुप मैच कर गया। उस दिन से साल में एक बार रक्तदान जरूर करती हूं। 


मेरी सलाह से 15 लोग कर चुके है रक्तदान: देवांशी
जीवनी मंडी की रहने वाली देवांशी ने पहला रक्तदान सन 2016 में किया। उस साल से उन्होंने छह महीने में एक बार रक्तदान करने को अपने जीवन में शामिल कर लिया। देवांशी बताती हैं कि मैं अपने दोस्तों को भी रक्तदान करने की सलाह देती हूं। मेरी सलाह से मैंने पांच साल में 15 लोग रक्तदान कर चुके हैं।

अपराजिता: रक्तदान कर लोगों की बचा रही जान
अपराजिता: रक्तदान कर लोगों की बचा रही जान - फोटो : अमर उजाला
मेरा रक्त सहेली के पति के काम आया: पारूल 
आवास विकास कॉलोनी में रहने वाली पारुल भारद्वाज ने जब अपनी सहेली के पति को रक्त दिया, उस दिन उन्हें रक्तदान की असली ताकत पता चली। पारुल बताती हैं कि मेरी सहेली के पति जब घर लौटे, वह दिन मेरे लिए किसी पर्व से कम नहीं था। उस दिन से मैं दूसरों को भी भी रक्तदान के लिए जागरूक कर रही हूं। 

रक्तदान करने का महत्व जानती हूं: अंजू 
दयालबाग की रहने वाली और सेंट जॉर्जेस स्कूल में शिक्षिका अंजू जसूजा ने पहली बार सन 1995 में अपने रिश्तेदार को रक्त दिया। अंजू बताती हैं कि जब से वह 12 बार रक्तदान कर चुकी हैं। मेरा खून किसी के जीवन को बचाता है, तो मुझे काफी खुशी मिलती है। एक शिक्षिका के नाते मैं रक्तदान के महत्व को अच्छी तरह से समझती हूं।

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